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दुनिया को क्या संदेश दे रहा है ईरान: दुनिया में शुरू हो सकती है ऐसी होड़, हर देश तलाशेगा 'चोक पॉइंट्स'
Tue, 23 Jun 2026 08:00 AM IST
Devesh Tripathi
एडवर्ड फिशमैन, पूर्व राजनयिक एवं लेखक
एडवर्ड फिशमैन, पूर्व राजनयिक एवं लेखक
Published by: Devesh Tripathi
Updated Tue, 23 Jun 2026 08:00 AM IST
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होर्मुज जलडमरूमध्य
- फोटो :
hormuztracking.com
विस्तार
अमेरिका और ईरान के बीच हाल में हुए अस्थायी शांति समझौते के तहत होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित करने, कुछ आर्थिक प्रतिबंधों में राहत देने और ईरान की उसकी संपत्तियों तक पहुंच बहाल करने पर सहमति बनी थी। साथ ही, ईरान के परमाणु कार्यक्रम के भविष्य को लेकर वार्ता शुरू करने की भी घोषणा की गई थी। हालांकि, क्षेत्रीय तनाव कम होने के बजाय फिर से बढ़ता दिखाई दे रहा है। लेबनान और अन्य मोर्चों पर इस्राइल की लगातार सैन्य कार्रवाइयों के बाद ईरान ने चेतावनी दी है कि यदि उसके सुरक्षा हितों की अनदेखी जारी रही, तो वह होर्मुज जलडमरूमध्य में नए प्रतिबंध लगा सकता है तथा टोल व्यवस्था दोबारा लागू कर सकता है।भले ही युद्ध और प्रतिबंधों ने ईरान को सैन्य तथा आर्थिक रूप से नुकसान पहुंचाया हो, लेकिन होर्मुज जलडमरूमध्य पर उसका भौगोलिक प्रभाव अब भी उसे एक महत्वपूर्ण रणनीतिक शक्ति बनाए हुए है। दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में से एक पर उसका नियंत्रण उसे क्षेत्रीय और वैश्विक कूटनीति में मजबूत सौदेबाजी की स्थिति प्रदान करता है। यदि मौजूदा तनाव जारी रहता है, तो होर्मुज एक बार फिर वैश्विक राजनीति और ऊर्जा सुरक्षा का प्रमुख केंद्र बन सकता है। बेशक ट्रंप ने भी कहा है कि होर्मुज हमेशा के लिए टोल-फ्री रहेगा, लेकिन इस जलमार्ग पर ईरान की पकड़ ढीली होने की संभावना कम ही है, क्योंकि इससे तेहरान को रणनीतिक व आर्थिक लाभ मिलता है।
जापान की प्रधानमंत्री सनाए तकाइची ने ईरानी सरकार से अपने देश के लिए तेल ले जाने वाले टैंकरों के सुरक्षित आवागमन की अपील की है। यानी तेहरान अब दुनियाभर की सरकारों के साथ अलग से समझौते करने की स्थिति में है। ईरान इस रणनीतिक स्थिति का उपयोग भविष्य में प्रतिबंधों में और राहत तथा अन्य कूटनीतिक रियायतें हासिल करने के लिए कर सकता है। साथ ही, जलडमरूमध्य को बंद करने या टोल लगाने की चेतावनी ईरान के लिए सैन्य हमलों और आर्थिक दबाव के खिलाफ एक प्रभावी प्रतिरोधक का काम कर सकती है। जहाज मालिक और ऊर्जा व्यापारी अतिरिक्त शुल्क का विरोध कर सकते हैं, पर इसकी लागत वैश्विक ऊर्जा व्यापार के पैमाने पर बहुत अधिक नहीं मानी जा रही है। एक बड़े ऑयल टैंकर के लिए, 20 लाख डॉलर का खर्च तेल के प्रति बैरल करीब एक डॉलर के बराबर है। ईरान की धमकियों की वजह से बीमा दरें बहुत बढ़ गई हैं; कुछ मामलों में प्रीमियम बढ़कर प्रति यात्रा 75 लाख डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है।
सऊदी अरब व संयुक्त अरब अमीरात होर्मुज को फिर से खुलते हुए देखने के लिए बेताब हैं, ताकि वे अपने मुनाफे वाले तेल निर्यात को पूरी रफ्तार से फिर से शुरू कर सकें। ऐसे में, ये देश ईरान के टोल को एक आवश्यक, भले ही अस्थायी, व्यवस्था के रूप में स्वीकार कर सकते हैं। इससे उन्हें ऐसी नई तेल पाइपलाइनें विकसित करने का समय मिल जाएगा, जो होर्मुज जलडमरूमध्य पर उनकी निर्भरता कम कर सकें। कतर के उप-प्रधानमंत्री पहले ही मान चुके हैं कि ‘अस्थायी शुल्क’ पर बातचीत की जा सकती है। होर्मुज को खुला रखने के लिए, ईरान मुआवजे की मांग करेगा। अगर वह सीधे जहाज मालिकों से भुगतान नहीं लेता है, तो संभावना है कि वह प्रतिबंधों में ढील के जरिये परोक्ष रूप से भुगतान हासिल कर लेगा। किसी भी स्थिति में, तेहरान को फायदा ही मिलेगा। और अगर सुरक्षित रास्ता ईरान की सहमति पर निर्भर करता है, तो होर्मुज पर उसका ही नियंत्रण होगा। यह स्थिति दीर्घकाल में चीन के लिए फायदेमंद हो सकती है, क्योंकि इससे उन ऊर्जा तकनीक की मांग बढ़ सकती है, जिन पर चीन का दबदबा है।
अगर दुनिया की तेल आपूर्ति का पांचवां हिस्सा ईरान की वजह से हमेशा रुकावट के खतरे में रहता है, तो देशों के पास जीवाश्म ईंधन पर अपनी निर्भरता कम करने और चीन में बने सोलर पैनल, इलेक्ट्रिक गाड़ियां और बैटरी का आयात बढ़ाने की और भी बड़ी वजह होगी। इसका मतलब यह भी होगा कि दुनिया एक जोखिम भरी निर्भरता को छोड़कर दूसरी निर्भरता अपना लेगी। पिछले साल रेयर-अर्थ मिनरल्स (दुर्लभ मृदा धातुएं) के निर्यात पर चीन द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों ने यह भी दिखाया कि वैश्विक आपूर्ति शृंखला के अहम ‘चोक पॉइंट्स’ कितने प्रभावशाली हथियार बन सकते हैं। इस कदम ने अमेरिकी नीति में बड़ा बदलाव लाने पर मजबूर कर दिया। अब ईरान ने दिखा दिया है कि होर्मुज को बंद करके दुनिया की सबसे ताकतवर सेना को भी पीछे हटने पर मजबूर किया जा सकता है। जिन देशों का अहम रास्तों पर नियंत्रण है, उनकी नजर से यह बात जरूर गुजरी होगी।
इतिहास में, भौगोलिक रूप से अहम और संकरे रास्तों का फायदा उठाना आम बात रही है। हालांकि, दूसरे विश्वयुद्ध के बाद से वैश्विक समुद्री व्यापार काफी हद तक निर्बाध और स्वतंत्र बना रहा, क्योंकि अमेरिका ने दुनिया के प्रमुख समुद्री मार्गों की सुरक्षा व नौवहन स्वतंत्रता की गारंटी दी थी। पर, ईरान द्वारा होर्मुज पर कब्जा करने से इस व्यवस्था में दरार आ गई है। इंडोनेशिया के राष्ट्रपति ने हाल ही में पूछा, ‘क्या हमें पता है कि पूर्वी एशिया की 70 प्रतिशत ऊर्जा जरूरतें और 70 फीसदी व्यापार इंडोनेशिया की जलसंधियों से होकर गुजरता है?’ इस टिप्पणी के बाद इंडोनेशियाई अधिकारियों ने तुरंत स्पष्ट किया कि मलक्का जलडमरूमध्य पर टोल लगाने की कोई योजना नहीं है, पर इस विचार का सामने आना यह संकेत देता है कि अमेरिकी ताकत के दम पर चलने वाला आजाद और खुला वैश्विक व्यापार अब किसी और चीज की जगह ले रहा है। मलक्का जलडमरूमध्य वही रणनीतिक समुद्री मार्ग है, जिसके जरिये दुनिया के लगभग एक-तिहाई व्यापार का आवागमन होता है। भविष्य में ऐसे कई हालात बन सकते हैं। हूती बाब-अल-मंदेब पर पकड़ मजबूत कर सकते हैं, रूस समुद्री इंटरनेट केबलों को निशाना बना सकता है और चीन ताइवान के आसपास जहाजों पर नियंत्रण बढ़ा सकता है। इसके संकेत भी दिखने लगे हैं। इसी महीने चीन ने ताइवान के पास वाणिज्यिक जहाजों की जांच के लिए अपनी समुद्री एजेंसी के जहाज भेजे, जिसे उसने ‘विशेष समुद्री यातायात कानून प्रवर्तन अभियान’ बताया।
अमेरिकी प्रशासन ने ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकने की कोशिश की, क्योंकि उन्हें डर था कि इससे पश्चिम एशिया में परमाणु हथियारों की होड़ शुरू हो सकती है। इस युद्ध के जरिये ट्रंप उस समस्या को हमेशा के लिए खत्म करना चाहते थे। पर, विडंबना देखिए कि होर्मुज में ईरान की सफलता एक अलग तरह की होड़ शुरू कर सकती है, जिसमें हर देश पैसे और ताकत हासिल करने के लिए ‘चोकपॉइंट्स’ की तलाश करेगा।
©The New York Times 2026