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अंतरराष्ट्रीय: अमेरिका में भारतीय ट्रैवल एजेंसियों पर कार्रवाई की घोषणा, महंगा न पड़ जाए सात समंदर पार का सपना
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अमेरिका से निर्वासित किए जा रहे लोग (फाइल)
- फोटो :
पीटीआई
विस्तार
अमेरिकी विदेश विभाग ने हाल ही में भारत आधारित ट्रैवल एजेंसियों के मालिकों, कार्यकारी और वरिष्ठ अधिकारियों पर वीजा प्रतिबंधों की घोषणा की, जिन पर जान-बूझकर अमेरिका में अनधिकृत प्रवासन कराने के आरोप हैं। फिलहाल इस बात की अब तक कोई विस्तृत जानकारी नहीं है कि इस कदम का कितने लोगों और कितनी ट्रैवल एजेंसियों पर असर पड़ेगा। साफ है, यह कदम ट्रंप प्रशासन की अवैध आप्रवासन पर कड़ी कार्रवाई का हिस्सा है, जिसमें निर्वासन में वृद्धि व कठोर सीमा नियंत्रण शामिल है।
दरअसल, ये एजेंसियां, विशेषकर पंजाब और गुजरात जैसे राज्यों में ज्यादा सक्रिय हैं, जहां इच्छुक प्रवासियों को कानूनी तरीके से जाने का प्रलोभन देकर खतरनाक और अनधिकृत रास्तों के जरिये ले जाती हैं, जिसका परिणाम दुखद निर्वासन के रूप में आता है। इस साल की शुरुआत में, संभवत: उसके इतिहास में पहली बार, अमेरिका ने सैन्य विमानों से 300 से ज्यादा भारतीयों को निर्वासित कर भेजा और अन्य पचास से ज्यादा को पनामा पहुंचाया गया। इससे यही स्पष्ट संकेत मिलता है कि अवैध आप्रवासन को रोकने के लिए वाशिंगटन कोई ढिलाई बरतने के मूड में नहीं है।
भारत सरकार ने सार्वजनिक रूप से अवैध आप्रवासन का विरोध किया है। अमेरिका में कितने भारतीय पर्याप्त दस्तावेजों के बिना रह रहे हैं, इसका ठोस डाटा न होना सबसे बड़ी चुनौती है। प्यू रिसर्च सेंटर का अनुमान है कि वर्ष 2022 तक अमेरिका में सात लाख से ज्यादा भारतीय बिना पुख्ता दस्तावेजों के रह रहे थे, जो उन्हें मेक्सिको और अल सल्वाडोर वासियों के बाद तीसरा सबसे बड़ा समूह बनाता है।
भारत और अमेरिका पहले ही ऐसे करीब 18 हजार भारतीय नागरिकों की पहचान कर चुके हैं, जो अमेरिका में बिना कानूनी मान्यता के रह रहे हैं। इस वर्ष फरवरी में पंजाब पुलिस ने पूरे राज्य में 1,200 से ज्यादा ‘आप्रवासी फर्मों’ पर छापा मारा था। इसके बावजूद लोगों की किसी भी तरह से ‘अमरीका’ जाने की चाहत बनी हुई है। पंजाब और गुजरात जैसे समृद्ध राज्यों से अवैध आप्रवासन के मामले इतनी प्रमुखता से क्यों आते हैं?
इसका जवाब प्रवास को प्रेरित करने वाली सामाजिक-आर्थिक गतिशीलता में निहित है। इन राज्यों से अवैध आप्रवासन के मूल में गरीबी नहीं, बल्कि ‘सापेक्ष वंचन’ है यानी विदेश, विशेषकर अमेरिका में पहले से ही बस चुके रिश्तेदारों या समुदाय के सदस्यों की सफलता का अनुकरण करने की भावना का होना है। पंजाबी सिख और गुजराती पटेल प्रवासियों ने वहां मोटल और रेस्तरां जैसे समृद्ध जातीय व्यवसाय स्थापित किए हैं, जिससे महत्वाकांक्षी प्रवासियों के लिए एक शक्तिशाली आकर्षण पैदा हुआ है।
विदेश में परिवार का होना एक प्रतिष्ठा का प्रतीक बन गया है, जो परिवारों को इन जोखिम भरे उपक्रमों में अक्सर प्रति व्यक्ति 25 से 70 लाख रुपये तक के भारी निवेश के लिए प्रोत्साहित करता है। इतनी भारी लागत में गरीब शामिल नहीं हैं, इसी वजह से भारत के गरीब राज्यों से सामान्यत: कम अवैध प्रवास होता है।
जॉन होपकिंस यूनिवर्सिटी की स्कॉलर एबी बुडिमैन और देवेश कपूर द्वारा फरवरी 2025 में पेश किए गए शोधपत्र में उल्लेख किया गया कि ‘ट्रंप प्रशासन ने एकदम स्पष्ट कर दिया है कि उनके दूसरे कार्यकाल में नए लोगों के लिए अमेरिका के दरवाजे बंद रहेंगे। फिर भी, केवल दबाव-केंद्रित रणनीति समस्या का समाधान नहीं कर सकती, इसलिए अमेरिका और भारत को प्रतिबंधों और निर्वासनों से परे जाकर व्यापक समाधान के लिए सहयोग करना चाहिए।