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क्वाड के एजेंडा में हिंद-प्रशांत : क्षेत्र में बुनियादी ढांचे के विकास के लिए पांच साल बेहद अहम, चीन की मनमानी पर लगेगी लगाम
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क्वाड समिट 2022
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विस्तार
हिंद महासागर में आई सुनामी के बाद तटीय देशों की मदद करने के उद्देश्य से वर्ष 2004 में क्वाड की शुरुआत हुई थी। वर्ष 2007 में जापान के तत्कालीन प्रधानमंत्री शिंजो आबे ने क्वाड को एक औपचारिक आकार देने की कोशिश की थी। लेकिन वह अपने लक्ष्य में सफल नहीं हुए,क्योंकि क्वाड का एक सदस्य ऑस्ट्रेलिया सशंकित था कि अगर क्वाड आक्रामक ढंग से चीन के खिलाफ मोर्चाबंदी शुरू करता है, तो चीन के साथ उसकी अपनी साझेदारी पर इसका असर पड़ेगा।
वर्ष 2017 में ऑस्ट्रेलिया चीन के मामले में अपने इस असमंजस से बाहर निकल तो आया, लेकिन इसके सदस्य देश तब अपने उद्देश्य में इसलिए सफल नहीं हो पाए, क्योंकि उसके बाद कोरोना महामारी ने दुनिया को अपनी चपेट में लेना शुरू कर दिया था। फिर यूक्रेन संकट ने भी क्वाड के सदस्यों को हिंद-प्रशांत पर अपना ध्यान केंद्रित करने से रोके रखा। अलबत्ता जापान की राजधानी टोक्यो में हो रहे शिखर बैठक ने यह धारणा ध्वस्त कर दी कि क्वाड अपनी प्रासंगिकता खो रहा है।
टोक्यो शिखर बैठक इस तरह की दूसरी ही बैठक है, जिसमें क्वाड के नेता मौजूद हुए। ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बानीज और जापान के प्रधानमंत्री फूमियो किशिदा ने क्वाड शिखर बैठक में पहली बार भाग लिया। शिखर बैठक से एक दिन पहले क्वाड के नेताओं ने हिंद-प्रशांत आर्थिक समूह (आईपीईएफ) की शुरुआत की, जिसका उद्देश्य टिकाऊ विकास हासिल करने के लिए हिंद-प्रशांत क्षेत्र को मुक्त, समावेशी, एक दूसरे से जुड़े और सुरक्षित रखना है।
यह अपनी विस्तारवादी नीतियों को बेहद आक्रामक ढंग से आगे बढ़ा रहे उस चीन को एक ठोस संदेश है, जिस पर अनैतिक व्यापार नीतियां लागू करने और आर्थिक बल प्रयोग करने का आरोप है। हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आईपीईएफ की शुरुआत को इस क्षेत्र को एक पावर हाउस बनाने की सामूहिक इच्छा के प्रतिबिंब के रूप में देखते हैं, जो वैश्विक अर्थव्यवस्था को रफ्तार देने का काम करेगा।
हालांकि चीनी विदेशमंत्री वांग यी ने हाल ही में लॉन्च किए गए आईपीईएफ पर निशाना साधते हुए कहा कि चीन क्षेत्रीय सहयोग के खिलाफ नहीं था, पर नए समूह में उसने विभाजन और टकराव पैदा करने का प्रयास देखा। क्वाड ने अब हिंद-प्रशांत क्षेत्र में अवैध मछली पकड़ने की जांच में भी भूमिका निभाने का फैसला किया है। इस क्षेत्र में 95 प्रतिशत अवैध मछली पकड़ने की गतिविधियों के लिए चीन जिम्मेदार है।
वैश्विक मछली भंडार की अनियंत्रित लूट लाखों लोगों की आजीविका और खाद्य सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा है। यह पहल भारत, सिंगापुर और प्रशांत क्षेत्र में मौजूदा निगरानी केंद्रों को जोड़ने के लिए उपग्रह प्रौद्योगिकी का उपयोग करेगी। हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने क्वाड के रचनात्मक एजेंडे की ओर इशारा किया। उन्होंने टीका वितरण, जलवायु कार्रवाई, आपूर्ति शृंखला में लचीलापन, आपदा प्रतिक्रिया, आर्थिक सहयोग और कोविड-19 महामारी से उत्पन्न प्रतिकूल परिस्थितियों में समन्वय में वृद्धि पर प्रकाश डाला।
उनका कहना था कि क्वाड देशों के बीच विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति और स्थिरता में योगदान दे रहा है। क्वाड फेलोशिप भी लॉन्च की गई। यह अपनी तरह का पहला स्कॉलरशिप कार्यक्रम है, जिसे सदस्य देशों के वैज्ञानिकों और तकनीकविदों की अगली पीढ़ी के बीच संबंध बनाने के लिए तैयार किया गया है। यह फेलोशिप प्रति वर्ष हरेक क्वाड देश के 25 छात्रों को अमेरिका के विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित विश्वविद्यालयों में परास्नातक और डॉक्टरेट की डिग्री हासिल करने का मौका देगी।
अमेरिका ने यह भी एलान किया कि वह चीन को ताइवान पर जबरदस्ती कब्जा नहीं करने देगा, और अगर ऐसा कुछ होता है, तो वह सैन्य तरीके से जवाबी कार्रवाई करेगा। हालांकि, राष्ट्रपति जो बाइडन ने कहा कि अमेरिका अपनी 'वन चाइना पॉलिसी' नहीं छोड़ रहा है और केवल ताइवान पर जबरन कब्जा करने के खिलाफ है। साथ ही, उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने जितना यूक्रेन के लिए किया है, उससे कहीं अधिक वह ताइवान के लिए करेंगे।
यूक्रेन के मामले में अमेरिका ने खुद को केवल हथियारों और खुफिया जानकारी की आपूर्ति तक सीमित रखा। बाइडन के इस बयान से चीन के साथ तनाव बढ़ने की आशंका है और ऐसा कहकर उन्होंने अपने प्रशासन को भी हैरान कर दिया है। अमेरिका पहले भी चीन को बल प्रयोग के खिलाफ चेतावनी दे चुका है, लेकिन यह स्पष्ट नहीं किया था कि अगर ऐसा होता है, तो वह किस हद तक जाएगा। बाद में व्हाइट हाउस के एक अधिकारी ने कहा कि ताइवान के प्रति नीति में कोई बदलाव नहीं हुआ है।
शायद अमेरिका चीन को संकेत दे रहा था कि उसके लिए खुद को सिर्फ हथियारों की आपूर्ति तक सीमित रखना मुश्किल होगा, क्योंकि ताइवान पर जबरन कब्जा जापानियों को युद्ध शुरू करने के लिए उकसाएगा। ऐसे में अमेरिका भी सैन्य कार्रवाई शामिल हो जाएगा। सम्मेलन के दूसरे दिन ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री एंथनी अल्बानीज ने कार्बन उत्सर्जन में कमी लाने पर बात की। किशिदा ने यूक्रेन पर रूसी हमले को संयुक्त राष्ट्र चार्टर का उल्लंघन बताया।
सदस्य देशों ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र में बुनियादी ढांचे के विकास के लिए पांच साल में पचास अरब डॉलर आवंटित करने का संकल्प लिया। साझा घोषणापत्र में भी इस क्षेत्र में ताकत के बल पर यथास्थिति बदलने के खिलाफ विचार व्यक्त किए गए और दक्षिण एवं पूर्व चीन सागर के सैन्यीकरण के खिलाफ चेतावनी जारी की गई। दूसरे दिन प्रधानमंत्री मोदी ने अमेरिकी राष्ट्रपति तथा जापान व ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री के साथ द्विपक्षीय बातचीत की। बाइडन और किशिदा ने जहां कोविड से निपटने में भारत के रुख की सराहना की, वहीं ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री ने भारत से अपने रिश्ते को महत्वपूर्ण बताया।
यूक्रेन में संकट के बाद ऐसा प्रतीत हुआ कि हिंद-प्रशांत ठंडे बस्ते में चला गया है, लेकिन टोक्यो क्वाड शिखर सम्मेलन ने इस बात पर जोर डाला है कि दुनिया की प्रमुख लोकतांत्रिक शक्तियां इस क्षेत्र की स्थिति के बारे में चिंतित हैं। इस शिखर सम्मेलन में इस बात पर भी प्रकाश डाला गया कि क्वाड के अन्य सदस्य यूक्रेन पर भारतीय रुख की प्रशंसा करते हैं, जिसने शत्रुता को समाप्त करने और बातचीत व कूटनीति पर लौटने की मांग की। इन सभी तथ्यों से यह साफ है कि इस शिखर सम्मेलन के बाद क्वाड और अधिक जीवंत होगा। (- लेखक एमपीआईडीएसए में एसोसिएट फेलो हैं।)