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जानना जरूरी है: धनेश्वर कुबेर कैसे हुए शाप से मुक्त… महाभारत और भीम से जुड़ा है प्रेरक प्रसंग

Sun, 27 Oct 2024 08:08 AM IST
Ashutosh Garg आशुतोष गर्ग
Updated Sun, 27 Oct 2024 08:08 AM IST
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सार
जानना जरूरी है:  भीम को खोजते हुए पांडव सरोवर तक पहुंच गए। कुबेर भी पहुंचे। वहां भीम गदा लिए खड़े थे। मणिमान समेत अनेक यक्षों के शव बिखरे पड़े थे। यह देख कुबेर मुस्कराने लगे। सब चकित रह गए।
 
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Indian mythology from mahabharata know how dhaneshwar kuber freed from curse
धनेश्वर कुबेर को कैसे शाप से मिली मुक्ति - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

पांडवों का वनवास-काल चल रहा था। एक दिन द्रौपदी ने टहलते हुए देखा कि हवा से उड़कर एक अद्भुत कमल पुष्प उसके निकट पड़ा था। उसकी सुवास ने द्रौपदी का मन मोह लिया। द्रौपदी के मन में उसी तरह के और पुष्प प्राप्त करने की इच्छा उत्पन्न हो गई। उन्होंने भीम से वैसे ही और पुष्प लाने का अनुरोध किया। भीम, द्रौपदी से बहुत प्रेम करते थे। वह द्रौपदी की बात टाल नहीं पाए और कमल की खोज में निकल पड़े। कुछ देर भटकने के बाद भीम को एक बड़ा-सा सरोवर दिखा, जिसमें वैसे ही कमल पुष्प तैर रहे थे, जैसे उन्हें चाहिए थे। वह पुष्प लेने के लिए तुरंत सरोवर में उतर गए। तभी उन्होंने देखा कि बहुत-से यक्ष उनकी ओर दौड़े आ रहे थे। यक्ष निकट आए, तो उनमें से एक ने भीम से पूछा, ‘कौन हो? यहां क्यों आए हो?’


‘मैं महाराज पांडु का पुत्र भीम हूं और अपनी पत्नी द्रौपदी के लिए ये पुष्प लेने आया हूं,’ भीम ने निडरता से उत्तर दिया। यक्ष बोला, ‘यह यक्षराज कुबेर का सरोवर है। यहां से पुष्प लेने के लिए महाराज कुबेर से अनुमति लेनी होगी।’ भीम को अपनी शक्ति पर घमंड था। उन्होंने आवेश में कहा, ‘सरोवर से पुष्प लेने के लिए अनुमति कैसी? कौन रोकेगा मुझे?’


भीम और यक्षों के बीच होने लगा युद्ध
भीम का व्यवहार देखकर यक्षों ने मिलकर भीम पर हमला कर दिया। यक्षों और भीमसेन में भयंकर युद्ध हुआ, जिसमें बहुत-से यक्ष घायल हो गए और कई मारे गए। यह समाचार कुबेर के मित्र एवं सेनापति मणिमान तक पहुंच गया। वह अपने अस्त्र-शस्त्र लेकर भीम से युद्ध करने के लिए आ गया। दोनों में घमासान युद्ध हुआ लेकिन मणिमान भी भीम के सामने टिक नहीं पाया। भीम ने गदा के वार से मणिमान को यमलोक पहुंचा दिया। मणिमान की मृत्यु के बारे में सुनकर कुबेर भीम से मिलने सरोवर पर आए।

पांडव भी पहुंचे सरोवर
उधर, भीम के वापस नहीं आने से चिंतित पांडव भी उन्हें खोजते हुए सरोवर तक पहुंच गए। कुबेर और पांडव जब युद्ध-स्थल पर पहुंचे, तो भीम खून से लथपथ हाथ में गदा लिए खड़े थे। उनके सामने मणिमान समेत अनेक यक्षों के क्षत-विक्षत शव बिखरे पड़े थे। यह देख कुबेर मुस्कराने लगे। उन्हें प्रसन्न देखकर सब चकित रह गए।
‘यक्षराज! आपकी सेना को इतनी भारी क्षति पहुंची है, फिर भी आप प्रसन्न कैसे हैं?’ युधिष्ठिर ने पूछा।

कुबेर ने कहा, ‘युधिष्ठिर! मणिमान और इन यक्षों की मृत्यु तो बहुत पहले ही महर्षि अगस् त्य के शाप के कारण निश्चित हो गई थी। भीम तो केवल निमित्त मात्र हैं। मैं प्रसन्न इसलिए हूं, क्योंकि भीम के द्वारा मणिमान की मृत्यु से मैं शाप से मुक्त हो गया हूं!’

‘वह कैसे?’ युधिष्ठिर ने आश्चर्य से पूछा।
कुबेर बोले, ‘एक बार मुझे इंद्र-सभा का निमंत्रण मिला था। मैं और मणिमान, कुछ यक्षों के साथ आकाश-मार्ग से जा रहे थे। हमने ऊपर से देखा कि महर्षि अगस्त्य नदी में खड़े होकर सूर्य को अर्घ्य दे रहे थे। तभी मणिमान को शरारत सूझी। उसने ऊपर से ही महर्षि अगस्त्य पर थूक दिया! अगस्त्य को क्रोध आ गया। वह ऊपर देखते हुए मणिमान से बोले-‘मणिमान! तुमने मेरा अपमान किया है। मैं शाप देता हूं कि तुम और तुम्हारे अन्य साथी यक्ष, शीघ्र ही एक मनुष्य के हाथों मारे जाओगे!’ अगस्त्य के शाप से घबराकर मैंने महर्षि से क्षमा मांगी, तो उनका क्रोध बढ़ गया और उन्होंने मुझे भी शाप दे दिया, ‘कुबेर! तुम अपने मित्र को समझाने के बजाय उसका साथ दे रहे हो।

मैं तुम्हें भी शाप देता हूं कि मणिमान की मृत्यु होने पर तुम्हारी बुद्धि में खोट उत्पन्न हो जाएगा और इसका शव देखकर तुम्हें दुख नहीं, अपितु प्रसन्नता होगी! परंतु मणिमान के हत्यारे को देखने के उपरांत तुम मेरे शाप से मुक्त हो जाओगे।’ इसीलिए मैं मुस्करा रहा था, लेकिन भीम के दर्शन से मेरी बुद्धि में उत्पन्न हुआ खोट दूर हो गया है।’ धनेश्वर कुबेर ने प्रसन्न होकर भीम को सरोवर से कमल-पुष्प ले जाने की अनुमति दे दी।
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