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आर्थिकी: शोध और नवाचार में भारत का रसूख... सरकार के साथ उद्योग जगत भी प्रभावी योगदान करेगा
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प्रतीकात्मक
- फोटो :
ANI/Pexels
विस्तार
देश को दुनिया की प्रमुख ज्ञान आधारित व सेवा प्रधान अर्थव्यवस्था बनाने में बौद्धिक संपदा, शोध और नवाचार का योगदान लगातार बढ़ रहा है। 12 नवंबर को विश्व बौद्धिक संपदा संगठन (डब्ल्यूआईपीओ) द्वारा प्रकाशित विश्व बौद्धिक संपदा संकेतक रिपोर्ट 2024 के मुताबिक, भारत ने तीन प्रमुख बौद्धिक संपदा अधिकारों (आईपी)-पेटेंट, ट्रेडमार्क और औद्योगिक डिजाइनों के लिए शीर्ष 10 देशों में जगह बनाई है। बौद्धिक संपदा में आविष्कार, रचनात्मक कार्य, कलात्मक कार्य, डिजाइन, कॉपीराइट, पेटेंट, ट्रेडमार्क, शोध व नवाचार शामिल हैं।कॉपीराइट के उल्लघंन में भारत का प्रयास
भारत ने कॉपीराइट अधिकारों के उल्लंघन पर गतिशील निषेधात्मक आदेश जारी कर कॉपीराइट की नकल रोकने के सशक्त प्रयास किए हैं। इसके अलावा, आईपी-आधारित कर रियायतें देकर और नकली उत्पादों के बारे में जागरूकता फैलाकर भी भारत ने इस दिशा में उल्लेखनीय काम किया है।
वहीं इस रिपोर्ट के अनुसार, पेटेंट के लिए भारत 64,480 आवेदनों के साथ विश्व स्तर पर छठे स्थान पर है। ऐसा पहली बार हुआ है। वर्ष 2018 और 2023 के बीच, पेटेंट और औद्योगिक डिजाइन आवेदन दोगुने से अधिक हो गए, जबकि ट्रेडमार्क दाखिल करने में 60 प्रतिशत की वृद्धि हुई। वैश्विक स्तर पर भारत ट्रेडमार्क फाइलिंग में चौथे स्थान पर है, जिसमें 2023 में 6.1 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।
ट्रेडमार्क कार्यालय में भारत का दूसरा स्थान
भारत का ट्रेडमार्क कार्यालय सक्रिय पंजीकरण में दूसरे स्थान पर है। इसमें 32 लाख से अधिक ट्रेडमार्क प्रभावी हैं, जो ब्रांड संरक्षण में देश की मजबूत स्थिति को दर्शाता है। बौद्धिक संपदा, शोध एवं नवाचार की दुनिया में बढ़ती हुई रैंकिंग से भारत नवाचार का प्रमुख केंद्र बनता जा रहा है। आईपी मापदंडों के मद्देनजर भारत का आर्थिक रसूख वैश्विक पटल पर बढ़ रहा है।
बौद्धिक संपदा, शोध एवं नवाचार के मद्देनजर भारत ने कारोबारी विशेषज्ञता, रचनात्मकता, राजनीतिक और संचालन से जुड़ी स्थिरता, सरकार की प्रभावशीलता जैसे विविध क्षेत्रों में अच्छे सुधार किए हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने सितंबर में राष्ट्रीय सुपरकंप्यूटिंग मिशन के अंतर्गत स्वदेश में विकसित लगभग 130 करोड़ रुपये की लागत के तीन परम रुद्र सुपरकंप्यूटर राष्ट्र को समर्पित किए।
कृषि की चुनौतियों के समाधान के लिए भारत ने जिस तरह विज्ञान व प्रौद्योगिकी का उपयोग किया, उससे भारत कृषि विकास की डगर पर तेजी से आगे बढ़ा है। ग्लोबल इनोवेशन इंडेक्स के बढ़ने से भारत में वैश्विक फाइनेंस और कॉमर्स कंपनियां आ रही हैं। पूरी दुनिया में मेड इन इंडिया और ब्रांड इंडिया की चमकीली पहचान बन रही है। यद्यपि भारत के विकास में बौद्धिक संपदा, शोध एवं नवाचार से जुड़े तीन आधारों की बढ़ती भूमिका दिखाई दे रही है, लेकिन विकास को और ऊंचाई देने के लिए इस क्षेत्र में सरकार व निजी क्षेत्र का परिव्यय बढ़ाना होगा।
भारत में आरएंडीडी पर व्यय
इस समय भारत में आरएंडडी पर जीडीपी का करीब 0.67 प्रतिशत ही व्यय हो रहा है। दुनिया के कुल सकल घरेलू उत्पाद का करीब दो फीसदी शोध व विकास में व्यय होता है। उम्मीद की जानी चाहिए कि सरकार बौद्धिक संपदा, शोध व नवाचार से संबंधित विभिन्न रिपोर्टों के मद्देनजर इसे नई ऊंचाई तक पहुंचाने के लिए और कदम उठाएगी।
साथ ही, देश को वर्ष 2030 तक दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था और वर्ष 2047 तक विकसित देश बनाने के बड़े लक्ष्य को हासिल करने के मद्देनजर सरकार के साथ उद्योग जगत भी बौद्धिक संपदा, शोध और नवाचार की भूमिका को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए योगदान करेगा।