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उच्च शिक्षा का वैश्विक केंद्र बने भारत : अमेरिका-चीन के बाद तीसरी सबसे बड़ी उच्चतर शिक्षा प्रणाली है

Fri, 26 Jul 2019 01:41 AM IST
देवेन्द्र सिंह असवाल देवेन्द्र सिंह असवाल
देवेन्द्र सिंह असवाल Published by: देवेन्द्र सिंह असवाल Updated Fri, 26 Jul 2019 01:41 AM IST
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India would becomes the global center of higher education
फाइल फोटो

उच्च शिक्षा के अखिल भारतीय सर्वेक्षण-2018 के अनुसार, भारत में 907 विश्वविद्यालय तथा 50,000 उच्च शिक्षा संस्थान हैं, जिनमें 3.3 करोड़ छात्र नामांकित हैं। भारतीय उच्च शिक्षा प्रणाली, अमेरिका और चीन के बाद तीसरी सबसे बड़ी उच्चतर शिक्षा प्रणाली है। इस समय भारत में 79 हजार विदेशी छात्र पढ़ते हैं, जबकि सात लाख भारतीय छात्र विदेशों में पढ़ते हैं। एसोसिएशन ऑफ इंडियन यूनिवर्सिटीज के अनुसार, भारत के पास अंतरराष्ट्रीय छात्रों को आकर्षित करने और शिक्षित करने की बहुत बड़ी क्षमता है।


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उच्च शिक्षा के अखिल भारतीय सर्वेक्षण-2018 के अनुसार, भारत में 907 विश्वविद्यालय तथा 50,000 उच्च शिक्षा संस्थान हैं, जिनमें 3.3 करोड़ छात्र नामांकित हैं। भारतीय उच्च शिक्षा प्रणाली, अमेरिका और चीन के बाद तीसरी सबसे बड़ी उच्चतर शिक्षा प्रणाली है। इस समय भारत में 79 हजार विदेशी छात्र पढ़ते हैं, जबकि सात लाख भारतीय छात्र विदेशों में पढ़ते हैं। एसोसिएशन ऑफ इंडियन यूनिवर्सिटीज के अनुसार, भारत के पास अंतरराष्ट्रीय छात्रों को आकर्षित करने और शिक्षित करने की बहुत बड़ी क्षमता है।

इस बार बजट भाषण में वित्त मंत्री ने उच्च शिक्षा प्रणाली में बदलाव के लिए नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति लाने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि देश में अनुसंधान के वित्तपोषण, समन्वय और संवर्धन के लिए एक राष्ट्रीय अनुसंधान फाउंडेशन की स्थापना की जाएगी और भारतीय विश्वविद्यालयों की अंतरराष्ट्रीय रैंकिंग बढ़ाने और उन्हें 'विश्व स्तरीय' बनाने के लिए ठोस प्रयास किए जाएंगे। विदेशी छात्रों को आकर्षित करने के लिए एक नया कार्यक्रम स्टडी इन इंडिया भी चलाया जाएगा। इसलिए राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2019 के मसौदे (मसौदा राशिनी-2019) के जरिये उच्च शिक्षा के अंतरराष्ट्रीयकरण पर जोर दिया गया है।

मसौदा राशिनी 2019 भारत में उच्च शिक्षा के अंतरराष्ट्रीयकरण को बढ़ावा देने के लिए एक सामयिक और विचारशील दृष्टिकोण है, जो छात्र और संकाय गतिशीलता को सुविधाजनक बनाने, अनुसंधान के लिए अंतरराष्ट्रीय साझेदारी स्थापित करने तथा विदेशी छात्रों को दाखिला देने की प्रक्रियाओं को आसान बनाने पर बल देता है। इस मसौदे में घरेलू स्तर पर शिक्षा के अंतरराष्ट्रीयकरण पर जोर दिया गया है।

यह मसौदा वैश्विक मानकों पर आधारित राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा योग्यता फ्रेमवर्क के महत्व और आवश्यकता पर भी प्रकाश डालता है और संयुक्त कार्यक्रमों की सुविधा के लिए विदेशी और भारतीय संस्थानों के बीच सहयोग के महत्व को रेखांकित करता है। वर्तमान में केवल 150 विदेशी संस्थान दोहरी व्यवस्था के तहत भारतीय विश्वविद्यालय को पाठ्यक्रम प्रदान करते हैं।

यह मसौदा भारतीय विश्वविद्यालयों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से, भारतीय भाषाओं, कला, इतिहास, आयुर्वेद, योग, आदि पर विशेष रूप से तैयार पाठ्यक्रमों की पेशकश करने की सिफारिश करता है, ताकि भारत उच्च शिक्षा का आकर्षक गंतव्य बन सके।

भारत में विदेशी छात्रों को आकर्षित करने दिशा में आवास, गुणवत्तापूर्ण बुनियादी सुविधाओं और वीजा संबंधी कुछ कठिनाइयां हैं। इस मसौदे में विदेशी छात्रों के रहने और स्थानीय भाषा पाठ्यक्रम व अन्य पुल पाठ्यक्रम के जरिये एकीकृत सुविधा प्रदान करने की सिफारिश की गई है। छात्र विनिमय कार्यक्रमों के लिए विदेशों में शिक्षण संस्थानों के साथ टाई-अप का विस्तार किया जाएगा। भारतीय शिक्षकों को विदेशी विश्वविद्यालय से संपर्क करने तथा विदेशी शिक्षकों को भारत आने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।

मसौदा नीति में अंतरराष्ट्रीय शिक्षा के लिए एक अंतर-विश्वविद्यालयीय केंद्र और अंतरराष्ट्रीय शिक्षा केंद्र स्थापित करने का प्रस्ताव है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2019 का मसौदा भारत में उच्च शिक्षा के अंतरराष्ट्रीयकरण पर जोर देता है, ताकि भारत विदेशी छात्रों के लिए एक आकर्षक गंतव्य बने और देश पुनः तक्षशिला और नालंदा की तरह उच्च शिक्षा का वैश्विक केंद्र बन सके।

-लेखक लोकसभा के पूर्व अपर सचिव रहे हैं।
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