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भारत और ब्रिटेन: दोनों देशों के लिए जरूरी है एफटीए, समझौते को तार्कित अंत तक ले जाना भी द्विपक्षीय जिम्मेदारी
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पीएम ऋषि सुनक और पीएम नरेंद्र मोदी
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अमर उजाला
विस्तार
हाल ही में खालिस्तान समर्थक समूह द्वारा लंदन स्थित भारतीय दूतावास पर किए गए हमले को लेकर मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) पर जारी वार्ता में आए गतिरोध के बीच दोनों देशों ने 24 से 28 अप्रैल के बीच लंदन में होने वाली बातचीत को लेकर लचीला रुख अपनाने का फैसला किया है। भारतीय दूतावास पर हमले के बाद भारत ने नई दिल्ली स्थित ब्रिटिश उच्चायोग में पदस्थ उप उच्चायुक्त क्रिस्टिन स्कॉट को तलब कर विरोध दर्ज कराया था।
ब्रिटेन की प्रशांत विदेश नीति का झुकाव भारत की ओर है, तो इसकी एक बड़ी वजह यही है कि वह इस क्षेत्र की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था के साथ संबंधों को मजबूत करना चाहता है। दोनों देशों के बीच 29 अरब पाउंड, यानी करीब 35.3 अरब डॉलर का व्यापार होता है और अब वे एफटीए वार्ताओं को तार्किक अंत तक ले जाना चाहते हैं, जिससे उन्हें पारस्परिक आधार पर लाभ होगा। दोनों देशों ने 2023 के अंत तक एफटीए को अंतिम रूप देने के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए कुल 26 में से शेष 13 नीति अध्यायों को पूरा करने की प्रतिबद्धता जताई है।
आखिर भारत और ब्रिटेन के लिए क्या दांव पर है? यूक्रेन पर रूसी हमले ने ब्रिटेन सहित पश्चिमी दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं को खासा नुकसान पहुंचाया है। ब्रिटेन सहित पश्चिम ने यूक्रेन पर हमले का विरोध कर रूस पर प्रतिबंध लाद दिए, लेकिन इसका खामियाजा भी उन्हें भुगतना पड़ा है। इस पृष्ठभूमि में भारत और ब्रिटेन के बीच एफटीए वार्ता का महत्व बढ़ गया है, क्योंकि युद्ध से उपजे प्रभाव को बेअसर करने में यह कदम सहायक हो सकता है। वैसे भी युद्ध के जल्द खत्म होने के आसार नजर नहीं आ रहे हैं। भारत और ब्रिटेन के बीच एफटीए वार्ता का नौवां दौर सोमवार को लंदन में शुरू होगा, जिससे ब्रिटिश मीडिया में इस वार्ता के भविष्य को लेकर उठे संदेहों पर विराम लग जाएगा।
एफटीए वार्ता को लेकर दोनों पक्षों को काफी उम्मीदें हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक भारत फार्मास्यूटिकल, कपड़ा, खाद्य एवं पेय, तंबाकू, चमड़ा, फुटवियर, चावल सहित कृषि उत्पादों का ब्रिटेन को होने वाला निर्यात बढ़ाना चाहता है। डिजिटल सेवाओं और आईसीटी क्षेत्रों को भी लाभ होगा और एफटीए के तहत द्विपक्षीय व्यापार का विस्तार होगा। ठीक इसी तरह से ब्रिटेन रसायनों, कुछ फलों और सब्जियों, मोटर वाहनों और पुर्जों, परिवहन उपकरण, बिजली के उपकरणों, चिकित्सा उपकरणों, वाइन, स्कॉच और स्पिरिट के लिए भारत के बाजार में पहुंच हासिल करने का इच्छुक है, जिससे विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र को प्रोत्साहन मिलेगा, लेकिन स्थानीय उद्योग को कुछ प्रभावित भी कर सकता है।
ब्रिटिश हितधारकों को उम्मीद है कि एफटीए सकारात्मक परिणाम देगा, जैसे डिजिटल सेवाओं और डिजिटल रूप से सक्षम सेवाओं के माध्यम से व्यापार को सुविधाजनक बनाने के लिए नियामक बाधाओं को दूर करना। विशेषज्ञों का मानना है कि इस वार्ता में ब्रिटिश व्यवसायों के लिए निवेशक सुरक्षा सहित अन्य कठिन मुद्दों को हल किया जाएगा, क्योंकि वे विवादों के मामले में भारतीय अदालतों में फंसने के बजाय शीघ्र मध्यस्थता पसंद करते हैं। ब्रिटेन ने स्कॉच, व्हिस्की और ऑटोमोबाइल्स पर शुल्क रियायतों की मांग पर भी जोर दिया है, जिसे लेकर भारत के साथ गतिरोध बना हुआ है। दूसरी ओर, कॉरपोरेट क्षेत्र वीजा और गतिशीलता के मुद्दों पर प्रगति चाहेगा।
भारत विभिन्न देशों में अपने व्यापार संबंधों का विस्तार कर रहा है। केंद्रीय वित्त मंत्री, निर्मला सीतारमण ने हाल ही में कहा था, 'मुक्त व्यापार समझौतों पर आजकल बहुत तेजी से हस्ताक्षर किए जा रहे हैं और भारत ने हाल ही में ऑस्ट्रेलिया के साथ एक समझौता किया है। संयुक्त अरब अमीरात, मॉरीशस और आसियान के साथ ऐसे समझौते पहले ही हो चुके हैं। भारत ने कम विकसित देशों को कोटा-मुक्त और शुल्क-मुक्त व्यवस्था दी है, जो एक प्रगतिशील कदम है। भारत ने उन देशों के साथ काम करने को लेकर उत्सुकता भी प्रदर्शित की है, जो उनके साथ एफटीए रखने के लिए हमारे साथ सहमत हैं। हमने दक्षिण कोरिया और जापान के साथ सामान और सेवाओं के अलावा आसियान के साथ समझौते किए हैं। हमने कम से कम तीन बड़े समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं। इसलिए, हम ब्रिटेन, कनाडा और यूरोपीय संघ के साथ एक समान मार्ग पर आगे बढ़ेंगे, जो प्रगति पर है, क्योंकि वार्ता संतोष की भावना के साथ चल रही है।'
पिछले दौर की वार्ता के एक भाग के रूप में, भारत और ब्रिटेन ने 21 जुलाई, 2022 को शिक्षा और नर्सिंग के क्षेत्र में समझौतों पर हस्ताक्षर किए थे। ये पेशेवरों के लिए अल्पकालिक गतिशीलता को आसान बनाएंगे और रोजगार के अवसर पैदा करेंगे। ध्यान रहे, भारत ब्रिटेन का 10वां सबसे बड़ा सेवा व्यापार भागीदार है।
हाल ही में ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ऋषि सुनक ने प्रधानमंत्री मोदी से बात की और बकाया मुद्दों को हल करने के लिए चल रही एफटीए वार्ता को बढ़ावा देने के अपने संकल्प को व्यक्त किया, जिससे निकट भविष्य में समझौते को पूरा करने के लिए स्पष्टता लाने में मदद मिली। सुनक का फोन मीडिया रिपोर्ट्स की पृष्ठभूमि में आया था, जिनमें कहा गया था कि भारत ने लंदन में भारतीय उच्चायोग पर हमले के पीछे खालिस्तान समर्थक समूहों के खिलाफ ब्रिटेन द्वारा कड़ी कार्रवाई किए जाने तक एफटीए वार्ता रोक दी है।
सुनक ने पिछले महीने लंदन में भारतीय उच्चायोग के बाहर 'अस्वीकार्य' हिंसा की अपनी निंदा दोहराई और भारतीय राजनयिक कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उठाए जा रहे कदमों की मोदी को जानकारी दी, जिसकी भारतीय प्रधानमंत्री ने सराहना की।
विश्लेषकों का मत है कि एफटीए को तार्किक अंत तक ले जाने के लिए भारत और ब्रिटेन का दृढ़ संकल्प एफटीए वार्ताओं की सफलता सुनिश्चित करेगा, ताकि व्यापार के क्षेत्र में एक नए युग की शुरुआत हो सके। यह दोनों देशों की अर्थव्यवस्था के हित में है।