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नेपाल को सख्त संदेश: दावे नकारना उचित, आपत्तियां सिरे से खारिज कर सटीक जवाब दिया, भारत की संप्रभुता पर सवाल...
Fri, 22 Aug 2025 06:38 AM IST
दीपक कुमार शर्मा
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Published by: दीपक कुमार शर्मा
Updated Fri, 22 Aug 2025 06:38 AM IST
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लिपुलेख दर्रे को लेकर भारत की नेपाल को खरी-खरी। (फाइल फोटो)
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विस्तार
लिपुलेख दर्रे पर नेपाल सरकार के दावे को खारिज कर भारत का यह स्पष्ट करना बिल्कुल उचित और समयोचित है कि उसकी संप्रभुता और सीमाई अधिकारों को लेकर किसी भी तरह का दखल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। दरअसल, नई दिल्ली में चीनी विदेश मंत्री की भारतीय विदेश मंत्री, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार और प्रधानमंत्री मोदी से बैठक के बाद जारी संयुक्त घोषणा पत्र में कहा गया कि भारत और चीन के बीच व्यापार उत्तराखंड के लिपुलेख, हिमाचल के शिपकी ला और सिक्किम के नाथु ला, तीनों दर्रों से होगा। इसके बाद ही नेपाली मीडिया और फिर वहां के विदेश मंत्रालय ने इसे लेकर आपत्ति जतानी शुरू कर दी।
उल्लेखनीय है कि लिपुलेख नेपाल के उत्तर-पश्चिम में स्थित है, जो भारत, नेपाल और चीन की सीमा से जुड़ा है। नवंबर, 2019 में जब जम्मू-कश्मीर का विभाजन कर दो केंद्रशासित प्रदेश बनाए, तब जो नक्शा जारी किया था, उसमें भी ये क्षेत्र शामिल थे। यह नहीं भूला जाना चाहिए कि भारत और चीन के बीच लिपुलेख दर्रे से व्यापार 1954 से शुरू हुआ था और फिलहाल कई दशकों से जारी भी है। गलवान घाटी और कोविड इत्यादि वजहों से यह बीच में कुछ वर्ष बाधित रहा, लेकिन इस आधार पर ऐसे क्षेत्रीय दावे नहीं स्वीकार किए जा सकते, जो ऐतिहासिक तथ्यों व साक्ष्यों की तरफ से आंखें मूंदे हुए हों। नेपाल के साथ भारत के पुराने सांस्कृतिक, आर्थिक और रणनीतिक संबंध रहे हैं, और भारत ने इनका हमेशा सम्मान भी किया है।
अब भी, भारत ने सीमा संबंधी मुद्दों को रचनात्मक संवादों के जरिये सुलझाने की बात की है। रणनीतिक दृष्टि से भी भारत के लिए महत्वपूर्ण होने के साथ चीन से सटा यह क्षेत्र भारत की सुरक्षा की भी गारंटी है। इस मामले में जहां भारत की नीति बिल्कुल स्पष्ट रही है, वहीं यह दुर्भाग्यपूर्ण ही कहा जाएगा कि नेपाल की राजनीति में बाहरी प्रभावों के चलते समय-समय पर इस तरह की दुर्भावनापूर्ण कोशिशें होती रही हैं। दूसरी बात यह कि ट्रंप की टैरिफ नीति के दबाव में बेशक चीन भारत के नजदीक आ रहा है, लेकिन अतीत के उसके विस्तारवादी इरादों के मद्देनजर भारत के लिए जरूरी है कि वह सीमाओं से जुड़े मामलों में दृढ़ बना रहे। संप्रभुता और राष्ट्रीय सुरक्षा के मामलों में भ्रम अच्छा नहीं होता। ऐसे में, नेपाल की आपत्तियों को सिरे से खारिज कर भारत ने उसे बिल्कुल सटीक जवाब दिया है कि सीमाओं और संप्रभुता पर उठे सवालों को सहन नहीं किया जाएगा।