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चीन के बाजार पर भारत की नजर
जयंतीलाल भंडारी
Updated Fri, 28 Oct 2016 12:35 PM IST
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जयंतीलाल भंडारी
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यकीनन इन दिनों भारत में बढ़ते जा रहे चीनी उत्पादों के बहिष्कार अभियान से परेशान होकर चीन द्वारा भारत के लोगों की मेहनत, ईमानदारी, प्रतिस्पर्धा क्षमता और मेक इन इंडिया अभियान का मखौल उड़ाया जा रहा है। चीन के इस रवैये को चुनौती के रूप में स्वीकार करना होगा। वस्तुत: सर्जिकल स्ट्राइक के बाद चीन के द्वारा पाकिस्तान का साथ दिए जाने के कारण चीनी माल का बहिष्कार भारत के उपभोक्ताओं के द्वारा उठाया गया पहला कदम है।
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निस्संदेह देश के अधिकांश लोगों के मन में यह विचार है कि चीन के तेज आर्थिक सुधार, बुनियादी ढांचा, आंतरिक व्यापार, शिक्षित-प्रशिक्षित श्रम शक्ति, जवाबदेह प्रशासन, भ्रष्टाचार की कमी, विकास की राष्ट्रीय भावना आदि आधारों के कारण भारत का चीन से मुकाबला मुश्किल है। लेकिन वस्तुस्थिति यह है कि भारत के ऐसे कई चमकीले आर्थिक पक्ष हैं, जिनके आधार पर भारत चीन को टक्कर दे सकता है। कई मापदंडों पर भारत चीन से आगे है। भारत के पास कुशल पेशेवरों की फौज है। वैश्विक आर्थिक अध्ययन बता रहे हैं कि भारत आने वाले वर्षों में दवा निर्माण, रसायन निर्माण और बायोटेक्नोलॉजी के क्षेत्रों में सबसे तेजी से उभरने वाला देश बन सकता है। इस समय भारत में श्रम लागत चीन की तुलना में सस्ती भी है।
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अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने कई बार अमेरिकी युवाओं को आगाह किया कि वे भारतीय छात्रों की तरह अध्ययनशील, परिश्रमी और प्रतिस्पर्धी बनें, अन्यथा अमेरिकी रोजगार बाजार में भारत के प्रतिभावान युवा वर्चस्व बनाते दिखेंगे। भारत 7.6 फीसदी की विकास दर के साथ दुनिया की सबसे तेज गति से बढ़ती अर्थव्यवस्था है। हाल में प्रकाशित अंकटाड की रिपोर्ट बताती है कि वर्ष 2015-16 में भारत में विदेशी निवेश 63 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। भारत के बाद दूसरा क्रम अमेरिका का और तीसरा क्रम चीन का है।
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निश्चित रूप से भारत का वर्तमान आर्थिक परिदृश्य आश्वस्त करने वाला है। चीन को टक्कर देने के लिए जरूरी है रणनीतिक प्रयास। हमें भारत और चीन के बीच द्विपक्षीय व्यापार में बढ़ते असंतुलन को समझना होगा। चीनी उत्पादों की गुणवत्ता पर भले सवाल हों, मगर यह निर्विवाद है कि वे सस्ते होते हैं। भारत के कई उद्योग भी कच्चे माल के लिए चीन पर निर्भर हैं। बल्ब, झालर, रेडिमेड वस्त्र, खिलौने, चाइनीज इलेक्ट्रॉनिक उत्पाद और तरह-तरह के कई चीनी उत्पाद भारतीय उद्योगों पर बुरा असर डाल रहे हैं। द्विपक्षीय व्यापार में चीन की एकतरफा बढ़त है।
चीन के बाजार में भारतीय सामान की पैठ बढ़ाने के लिए उन क्षेत्रों को समझना होगा, जहां चीन को भारतीय सामान की दरकार है। चूंकि भारतीय उत्पाद गुणवत्ता और विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी होते हैं। इसलिए ऐसा कोई कारण नहीं है कि चीनी उपभोक्ता और कंपनियां इन्हें न खरीदें। चीन में प्रदूषण कानून सख्त होने से पर्यावरण से जुड़े कई उद्योगों की इकाइयां बड़ी संख्या में बंद हो गई हैं। ऐसे में भारत चीन के बाजार में ऑटो कम्पोनेंट, स्टेनलेस स्टील, इन्वर्टर, कॉटन यार्न, लेदर सामान आदि वस्तुओं के निर्यात तेजी से बढ़ाने की संभावना रखता है। इतना ही नहीं भारत अपनी ज्ञान आधारित अर्थव्यवस्था, सूचना प्रौद्योगिकी, बायोटेक्नोलॉजी, फार्मास्युटिकल, इंजीनियरिंग, मेडिकल एवं विज्ञान के क्षेत्रों की विजय पताका चीन में भी फहरा सकता है।