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पॉजिटिविटी की कन्सल्टेंसी
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आप लोगों को पॉजिटिव रहना चाहिए। चाहे कोरोना का संक्रमण ही क्यों न हो जाए, पॉजिटिव रहना बहुत जरूरी है। असली चीज कोरोना नहीं है, असली चीज पॉजिटिविटी है। आप समझे कि नहीं समझे। हुआ यह कि कल सुबह-सुबह ही दौलतराम जी का फोन आ गया। बिना रुके वह लगातार बोले ही जा रहे थे। उन्होंने कहा, आपको पता है, पूरे देश में लंबे लॉकडाउन के कारण लोगों में घनघोर नकारात्मकता घर करती जा रही है। नकारात्मक विचार एकदम पागल कुत्ते की तरह लोगों के पीछे पड़े हैं।
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ऐसे में पाजिटिव बने रहना बहुत आवश्यक है। चाहे कितनी और कैसी भी मुसीबत क्यों न आए, पॉजिटिविटी की डोर को कसके पकड़े रहो। बल्कि मैं तो यह कहता हूं कि पॉजिटिविटी की डोर पकड़ कर एकदम चमगादड़ की तरह लटक जाओ। इस पर मैंने उनसे कहा, लेकिन हम तो पहले से ही पॉजिटिव हैं। वह बोले, तुम पॉजिटिव नहीं हो। बल्कि तुम्हारी आवाज से तो ऐसा लग रहा है कि तुम नकारात्मकता के गर्त में गले-गले तक डूबे हुए हो। बहुत कमजोर और मरी-मरी-सी आवाज आ रही है तुम्हारी।
मैंने कहा, जी, मेरी आवाज तो ठीक है, दरअसल नेटवर्क कमजोर है। वह बोले, मुझे मत बहलाओ। नेटवर्क कमजोर होने पर ऐसी मरियल आवाज नहीं आती, दूसरी तरह से आती है। तुम्हारी आवाज तो ऐसी आ रही है, मानो तुम्हें किसी ने अस्सी फुट गहरे कुएं में धकेल दिया हो। मैंने उन्हें कहा, आप गलत कह रहे हैं। हमारे इलाके में तो कोई कुआं ही नहीं है। मेरी इस बात पर वह खिलखिलाकर हंस पड़े। फिर कहने लगे, यही तो नकारात्मकता है। अब तुम इस बात के लिए उदास हो रहे हो कि तुम्हारे इलाके में कोई कुआं नहीं है।
लेकिन प्यारे भाई, इसमें उदास होने जैसी कोई बात नहीं है। कुआं नहीं है, तो क्या हुआ। यार, नल तो है, या फिर हैंडपंप होगा। आदमी को एक न एक विकल्प हमेशा तैयार रखना चाहिए। नहीं, तो काम नहीं चलता। मैंने कहा, आप फिर गलत समझ रहे हैं। मैं कुएं के कारण उदास नहीं हूं। मैं तो आपको वास्तविकता बता रहा हूं। वह झट से बोल उठे, यह वास्तविकता नहीं है, बल्कि यह नकारात्मकता है। मुझे देखिए, मैं दिन भर पॉजिटिविटी से भरा रहता हूं। जबकि हालत यह है कि मेरी वाइफ को बुखार है, घर में गैस खत्म हो गई है, बेडरूम का एसी भी काम नहीं कर रहा है।
और कोढ़ में खाज यह कि आज सुबह-सुबह जब मैं अपने घर के सामने टहल रहा था, तब पड़ोस वाले रामखिलावन जी का कुत्ता एकाएक मुझ पर झपट पड़ा। मैंने तत्काल संभलने की कोशिश की, लेकिन इस कोशिश में मेरे दाएं पांव में फ्रैक्चर हो गया। मैं फिर भी पॉजिटिव हूं, क्योंकि मेरा बायां पैर तो सुरक्षित है। यही तो पॉजिटिविटी है। मैंने कहा, यह तो बहुत ही बुरा हुआ। आपको इस बारे में रामखिलावन जी से शिकायत करनी चाहिए थी।
उन्होंने अपने कुत्ते को इस तरह कैसे छोड़ दिया? वह बोले मैंने शिकायत की थी, मगर रामखिलावन जी उल्टे मुझसे कहने लगे कि चूंकि पिछले आठ-दस दिनों में आपके सिर और दाढ़ी के बाल एकदम रीछ जैसे हो गए हैं, ऐसे में, कुत्ता कितना भी संभ्रांत क्यों न हो, वह जरूर झपटेगा। कुत्तों का चरित्र ही है झपटना। मैंने कहा, अब आप क्या कर रहे हैं? गरम पानी में सेंधा नमक डालकर सेंक रहा हूं, उन्होंने बताया। मैंने पूछा, अब आपका दर्द कैसा है? वह बोले, दर्द तो है, पर दर्द के बावजूद सुबह से कई मित्रों को फोन करके मैं उन्हें निराशा से बाहर निकाल चुका हूं।
मैं यह सोचता हूं कि लॉकडाउन खत्म हो जाए, तो पॉजिटिविटी की कन्सलटेंसी खोल लूं। आप क्या कहते हो? मैंने कहा, बहुत उत्तम विचार है। लेकिन आपको मेरी एक विनम्र सलाह है कि खुदा न खास्ता, यदि कभी कुत्ता आपकी ओर लपके, तो पॉजिटिव आदमी को भागने के बजाय उसका सामना करना चाहिए, वर्ना हाथ-पांव में फ्रैक्चर हो सकता है। यह सुनकर वह हंस दिए, मुक्त हंसी। हंसते हुए वह कहने लगे, देखो, मुझसे बात करके थोड़ी ही देर में तुम्हारे विचार कितने पॉजिटिव हो गए। अपनी इस उपलब्धि पर वह देर तक हंसते रहे, फिर उन्होंने फोन बंद कर दिया।