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विकास का साझा संकल्प: भारत-जापान साझेदारी का नया अध्याय, मजबूत हुई रणनीतिक दोस्ती
सानाए ताकाइची की इस पहली आधिकारिक भारत यात्रा के दौरान 16वें भारत-जापान वार्षिक शिखर सम्मेलन में एआई, महत्वपूर्ण खनिज एवं धातु, ऊर्जा, रक्षा और आर्थिक सुरक्षा जैसे क्षेत्रों से जुड़े छह अहम समझौते तो हुए ही, पहला रक्षा सह-विकास समझौता भी हुआ है।
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पीएम मोदी और जापान की प्रधानमंत्री सानाए ताकाइची
- फोटो :
ANI
वैश्विक भू-राजनीति में तेजी से हो रहे बदलावों और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में बढ़ती आर्थिक व सुरक्षात्मक चुनौतियों के बीच, जापान की प्रधानमंत्री सानाए ताकाइची की तीन दिवसीय भारत यात्रा और प्रधानमंत्री मोदी के साथ उनकी पहली द्विपक्षीय शिखर वार्ता ने दोनों देशों के भरोसे की पुरानी नींव को तो मजबूती दी ही है, दुनिया को यह भी संकेत दिया है कि नई दिल्ली और टोक्यो की रणनीतिक साझेदारी आने वाले वक्त में वैश्विक राजनीति की दशा और दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाने वाली है। सानाए ताकाइची की इस पहली आधिकारिक भारत यात्रा के दौरान 16वें भारत-जापान वार्षिक शिखर सम्मेलन में एआई, महत्वपूर्ण खनिज एवं धातु, ऊर्जा, रक्षा और आर्थिक सुरक्षा जैसे क्षेत्रों से जुड़े छह अहम समझौते तो हुए ही, पहला रक्षा सह-विकास समझौता भी हुआ है। दरअसल, अब तक दोनों देश संयुक्त सैन्य अभ्यास और समुद्री सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में ही सहयोग करते रहे हैं, पर इसके जरिये भारतीय नौसेना के लिए आधुनिक संचार प्रणाली तथा स्टील्थ तकनीक के संयुक्त विकास का रास्ता खुल गया है। इस मुलाकात की खास बात यह रही कि दोनों प्रधानमंत्रियों ने किसी भी तीसरे देश का नाम लिए बगैर हिंद-प्रशांत क्षेत्र में ‘नियमों पर आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था’ को बनाए रखने की अपनी साझा प्रतिबद्धता को फिर से दोहराया। अगर अगस्त 2025 से लेकर अब तक की बात करें, तो दोनों देशों के बीच करीब 120 समझौतों पर सहमति बन चुकी है, जो अपने आप में एक रिकॉर्ड है। पिछले एक दशक में जापान यकीनन भारत का सबसे भरोसेमंद रणनीतिक साझेदार बना है और यही वजह है कि शिंजो आबे के समय से शुरू हुआ यह सफर शिगेरु इशिबा और फुमियो किशिदा से होते हुए अब सानाए ताकाइची के दौर में और अधिक परिपक्व व भरोसेमंद नजर आ रहा है। आज भारत में लगभग 1,400 जापानी कंपनियां काम कर रही हैं और जापान भारत के सबसे विश्वसनीय निवेशकों में शामिल है, जिसकी पुष्टि सानाए ताकाइची ने निजी क्षेत्र में सहयोग के लिए दोनों देशों के बीच 1.18 लाख करोड़ रुपये के 129 निवेश समझौतों की घोषणा करके भी कर दी। आज जब दुनिया में कई अंतरराष्ट्रीय रिश्ते अस्थिर होते जा रहे हैं, तब यह साझेदारी और भी अधिक महत्वपूर्ण बन जाती है। हालिया शिखर बैठक सिर्फ एक सफल कूटनीतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि यह भारत और जापान के बीच लगातार मजबूत होती साझेदारी का एक और महत्वपूर्ण पड़ाव है। यदि दोनों सरकारें इन समझौतों को समयबद्ध तरीके से लागू करती हैं, तो आने वाला दशक भारत-जापान संबंधों का सबसे सफल और निर्णायक दौर साबित हो सकता है।
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