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भारत से बेहतर रिश्तों की उम्मीद

Sun, 05 Mar 2017 07:34 PM IST
सुरेंद्र कुमार
सुरेंद्र कुमार Updated Sun, 05 Mar 2017 07:34 PM IST
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India expects to have better relationships
सुरेंद्र कुमार

तमाम कटु आलोचनाएं सहने के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पहली मार्च को अमेरिकी संसद के संयुक्त सत्र को पहली बार संबोधित किया, जिसके बारे में उनके ज्ञात आलोचक द न्यूयॉर्क टाइम्स ने लिखा है, 'अपने भाषण की ज्यादातर बातें वह पहले ही बोल चुके हैं'। और वाशिंगटन पोस्ट ने, जो उन्हें बख्शता नहीं है, अनिच्छा से स्वीकार किया कि जून, 2015 में राजनीति में प्रवेश करने के बाद यह ट्रंप का सबसे अच्छा भाषण रहा है और जो लोग उनके आसन्न पतन की उम्मीद कर रहे थे, वे निराश होंगे। ये दो टिप्पणियां उनके शासन के बारे में काफी कुछ कहती हैं।

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एक राष्ट्र, एक व्यक्ति और एक नियति जैसे आदर्श का आह्वान कर उन्होंने राष्ट्रीय एकता और ताकत का संदेश दिया है। अमेरिकी भावना, अमेरिकी महानता, आशावाद, राष्ट्रीय गौरव और लोगों के भीतर असंभव सपनों को साकार करने के भरोसे की बात करके ट्रंप ने अपनी प्रेरणादायी दृष्टि का परिचय दिया-'अब से अमेरिका को हमारी आकांक्षाओं द्वारा सशक्त बनाया जाएगा, वह भविष्य की आशंकाओं के नीचे दबेगा नहीं, अतीत की विफलताओं से मजबूर नहीं होगा, और हमारी भविष्योन्मुखी दृष्टि से निर्देशित होगा, न कि हमारे संदेहों की वजह से अंधा होगा।'
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अपने नेतृत्व पर संदेह करने वाले लोगों को संदेश देते हुए उन्होंने कहा कि 'हमारे सहयोगी पाएंगे कि अमेरिका एक बार फिर नेतृत्व करने के लिए तैयार है। दुनिया के सभी राष्ट्र पाएंगे कि अमेरिका मजबूत है। उन्होंने जोर देकर कहा कि अमेरिका दुनिया के साथ एक प्रत्यक्ष, मजबूत और सार्थक भागीदारी चाहता है। उन्होंने अपने पहले के विचारों को दोहराते हुए कहा कि नाटो एवं अन्य सहयोगी संगठनों को सामरिक और सैन्य, दोनों अभियानों में प्रत्यक्ष और सार्थक भूमिका निभानी चाहिए। अपनी प्राथमिकताओं के बारे में उन्होंने कहा कि मेरा काम विश्व का नेतृत्व करना नहीं, बल्कि अमेरिका का नेतृत्व करना है।
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ट्रंप ने रोजगार कम करने वाले ट्रांस पैसिफिक पार्टनरशिप से अलग हटने का फैसला किया, एक चौथाई अमेरिकी विनिर्माण रोजगार के नुकसान के लिए नाफ्टा पर दोष मढ़ा और एक खूबसूरत दीवार बनाने का वायदा किया, ड्रग्स की तस्करी रोकने, आपराधिक गिरोहों को नष्ट करने और हिंसक अपराधों को कम करने की बात की।

चुनावी बयानबाजी के विपरीत ट्रंप ज्यादा संयत थे। ओबामा केयर को समाप्त करने की सिफारिश करते हुए उन्होंने कहा कि सबको स्वास्थ्य बीमा उपलब्ध कराने के लिए स्वास्थ्य बीमा की लागत कम होनी चाहिए और हम वही करेंगे।

उनकी यह बात उनके मध्यवर्गीय समर्थकों के कानों में निश्चित रूप से संगीत की तरह गूंज रही होगी कि 'अमेरिका को अपने नागरिकों पर सबसे पहले ध्यान देना चाहिए,  तभी हम अमेरिका को महान बना सकते हैं।' मरते उद्योगों, रोजगार एवं धन का विदेशों में निर्यात तथा पश्चिम एशिया में साठ खरब डॉलर खर्च का जिक्र करते हुए उन्होंने इन्फ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में निजी एवं सार्वजनिक पूंजी के जरिये दस खरब डॉलर निवेश का वायदा किया, जिससे लाखों रोजगारों का सृजन होगा।

आव्रजन नीति के संदर्भ में उन्होंने दावा किया कि 9.4 करोड़ अमेरिकी कार्यबल से बाहर हैं, 4.3 करोड़ से ज्यादा लोग गरीबी में जी रहे हैं और 4.3 करोड़ से ज्यादा अमेरिकी फूड कूपन पर निर्भर हैं। किसी जादूगर की तरह उन्होंने कहा कि 'हर समस्या का समाधान किया जा सकता है' और लाखों रोजगार वापस लाने का वायदा किया।

हालांकि सात मुस्लिम बहुल देशों के लोगों के अमेरिका प्रवेश पर प्रतिबंध लगाने संबंधी फैसले की अमेरिका और विदेशों में काफी आलोचना हुई और अदालत ने उस पर रोक लगा दिया, लेकिन बहुत कम लोग उनके इस दावे से असहमत हो सकते हैं कि 'जिन जगहों पर उचित पुनरीक्षण नहीं होता, वहां से लोगों को निर्बाध आने देना लापरवाही है' और 'हम अपने राष्ट्र को चरमपंथियों की पनाहगाह नहीं बनने दे सकते।' उनकी इस बात से ज्यादार अमेरिकी सहमत हैं कि 'हमारा दायित्व अमेरिकियों की सेवा, संरक्षा व सुरक्षा' और 'इस्लामिक आतंकवाद से अपने राष्ट्र की रक्षा करना है।'

भारतीय इंजीनियर श्रीनिवास कुचिभोतला की कंसास में हत्या से भारतीय अमेरिकियों में काफी चिंता और बेचैनी है। उनकी सुरक्षा, एच 1बी वीजा, वीजा शुल्क में वृद्धि, व्यापक बाजार पहुंच, भारत में संयुक्त रक्षा उत्पादन और मोदी की अमेरिका यात्रा जैसे मुद्दों पर वाशिंगटन में भारतीय विदेश सचिव जयशंकर चर्चा कर सकते हैं। कुछ लोग ट्रंप के 'योग्यता के आधार पर वीजा प्रणाली' में उम्मीद की किरण देखते हैं। रसोइया और शोफर को छोड़ दें, तो वीजा के आवेदन करने वाले ज्यादातर भारतीय कम कुशल प्रवासी नहीं हैं। आईटी से जुड़े भारतीयों के लिए यह बहुत मुश्किल नहीं होना चाहिए-टीसीएस, इन्फोसिस, विप्रो, एचसीएल अपने कर्मचारियों के कौशल को उन्नत बनाएंगे, इसलिए योग्यता आधारित वीजा प्रणाली उनके अमेरिका प्रवेश में एक बड़ी बाधा नहीं बनेगी। कट्टरपंथी इस्लामी आतंकवाद से अमेरिका की रक्षा की कसम खाते हुए उन्होंने कहा कि रक्षा विभाग इस्लामिक स्टेट के नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए योजना तैयार कर रहा है।


पारंपरिक समझदारी यही कहती है कि व्यक्तिगत स्तर पर मोदी और ट्रंप के रिश्ते अच्छे होने चाहिए। दोनों ताकतवर, राष्ट्रवादी और ऐसे नेता हैं, जो आत्मविश्वास, ऊर्जा और गतिशीलता दर्शाते हैं तथा अपने-अपने राष्ट्र को महान बनाने की प्रेरणादायक दृष्टि प्रकट करते हैं। कुछ आर्थिक और रणनीतिक मुद्दों पर मतभेद के बावजूद दोनों पक्षों को बेहतर रिश्ते बनाने में सक्षम होना चाहिए। ट्रंप को अपने दावे पर टिके रहना चाहिए कि वह ह्वाइट हाउस में भारत के सबसे अच्छे दोस्त होंगे। उन्हें नरेंद्र मोदी से ज्यादा भरोसेमंद रणनीतिक साझेदार नहीं मिलेगा। ट्रंप को निश्चित रूप से निर्दोष लोगों पर हिंसक हमलों के खिलाफ स्पष्ट आलोचना करनी चाहिए, जो अमेरिकी समाज के बहुलतावादी ताने-बाने को नुकसान पहुंचाते हैं।

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