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विश्लेषण: भारत की पाकिस्तान पर फिर हुई कूटनीतिक जीत, पड़ोस में बुरा दौर खत्म होने की उम्मीदें भी कम

Thu, 29 Jun 2023 05:58 AM IST
Harsh Kakkar हर्ष कक्कड़
Updated Thu, 29 Jun 2023 05:58 AM IST
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सार
प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति बाइडन के संयुक्त बयान में आतंकवाद के जिक्र से जहां पाकिस्तान और अलग-थलग पड़ गया है, वहीं पाकिस्तानी कब्जे वाले कश्मीर पर रक्षामंत्री राजनाथ सिंह के ताजा बयान ने पड़ोसी मुल्क की बेचैनी बढ़ा दी है, जो कि पहले ही राजनीतिक और आर्थिक अस्थिरता के दौर से गुजर रहा है।
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india diplomatic victory on pakistan after pm modi america visit strong indo-us ties
Joe Biden and PM Modi - फोटो : Amar Ujala/Sonu Kumar

विस्तार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन की औपचारिक बातचीत के बाद जारी संयुक्त बयान से पाकिस्तान की बेचैनी खत्म होने का नाम ही नहीं ले रही है। संयुक्त बयान में कहा गया है, 'प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति बाइडन ने संयुक्त राष्ट्र में सूचीबद्ध सभी आतंकवादी समूहों के खिलाफ ठोस कार्रवाई का आह्वान किया। उन्होंने सीमा पार आतंकवाद और आतंकवादी प्रॉक्सी के इस्तेमाल की कड़ी निंदा की और पाकिस्तान से यह सुनिश्चित करने के लिए तत्काल कार्रवाई करने का आह्वान किया कि उसके देश का इस्तेमाल आतंकवादी हमले शुरू करने के लिए न किया जाए। उन्होंने 26/11 के मुंबई और पठानकोट हमलों के अपराधियों को न्याय के कटघरे में लाने का आह्वान किया।' 26/11 में अमेरिकी नागरिक भी मारे गए थे, इसलिए अमेरिका की इसमें दिलचस्पी है। ये बयान पाकिस्तान के लिए दिल पर चोट जैसा था।



पाकिस्तान को उम्मीद थी कि प्रधानमंत्री मोदी कश्मीर में मानवाधिकारों पर व्याख्यान देंगे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के प्रवक्ता जॉन किर्बी ने कहा कि भारत मानवाधिकारों पर व्याख्यान नहीं देगा। जिस बात ने पाकिस्तान को सबसे ज्यादा प्रभावित किया, वह संयुक्त विज्ञप्ति में जोड़ी गई टिप्पणियां थीं, जिसमें लिखा था, 'भारत और अमेरिका ने वित्तीय कार्रवाई कार्यबल (एफएटीएफ) से मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकवाद के वित्तपोषण से निपटने के लिए अपने मानकों के वैश्विक कार्यान्वयन में सुधार करने के तरीके की पहचान करने के लिए कहा।' साफ है कि यह पाकिस्तान के लिए चेतावनी थी कि वह अपने में सुधार करे या फिर ग्रे लिस्ट में जाने के लिए तैयार रहे।


पाकिस्तान के प्रवक्ता ने इन टिप्पणियों का खंडन करते हुए कहा, 'हम संयुक्त बयान में पाकिस्तान से संबंधित टिप्पणियों को अनुचित, एकतरफा और भ्रामक मानते हैं। यह राजनयिक मानदंडों के विपरीत है और इसके राजनीतिक निहितार्थ हैं। हमें आश्चर्य है कि अमेरिका के साथ पाकिस्तान के करीबी आतंकवाद विरोधी सहयोग के बावजूद इसे जोड़ा गया है।' उसने अमेरिकी दूतावास के मिशन के उप प्रमुख को भी तलब किया और आपत्ति पत्र सौंपा।

खुद को बचाने की पाकिस्तान की कोशिशें तब और विफल हो गईं, जब अमेरिकी विदेश विभाग के प्रवक्ता मैथ्यू मिलर ने अपनी दैनिक प्रेस वार्ता में कहा, 'हम पाकिस्तान के सभी आतंकवादी समूहों और उसके विभिन्न प्रमुख संगठनों को स्थायी रूप से नष्ट करने के लिए कदम उठाने पर भी लगातार कायम रहे हैं। हम इस मुद्दे को पाकिस्तानी अधिकारियों के समक्ष नियमित रूप से उठाएंगे।' जाहिर है, पाकिस्तान के पास मामले को शांत करने के अलावा कोई विकल्प नहीं है।

पाकिस्तान ने हाल के दिनों में अमेरिका और चीन के साथ अपने संबंधों को संतुलित करने का प्रयास किया है। उसे आईएमएफ से ऋण लेने और भारत को नियंत्रण में रखने के लिए अमेरिका की जरूरत है, जबकि राहत पैकेज और निवेश के लिए चीन की। लेकिन भारत अब मजबूती से अमेरिका के साथ जुड़ा है, जबकि पाकिस्तान को अमेरिकी खेमे से बाहर किया जा रहा है। 

भारत-अमेरिकी संयुक्त बयान भारत के लिए कूटनीतिक जीत है, जिससे इस्लामाबाद के खिलाफ अधिक आक्रामक रुख अपनाने के दरवाजे खुल गए हैं। प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा के कुछ ही दिनों बाद रक्षामंत्री राजनाथ सिंह का बयान आया, जिसमें उन्होंने कहा कि कश्मीर के एक हिस्से पर पाकिस्तान का अवैध कब्जा उसे इस क्षेत्र में कोई वैधता नहीं देता है। उन्होंने आगे कहा कि हमें ज्यादा कुछ नहीं करना पड़ेगा। पीओके की प्रताड़ित जनता खुद भारत का हिस्सा बनने की मांग करेगी। वे भारत का हिस्सा बनने के लिए नारे लगा रहे हैं। इसके जरिये भारत के लोगों को संदेश दिया गया कि सरकार पीओके को भारत का हिस्सा मानती है और इस पर कोई समझौता नहीं करेगी।

दूसरी तरफ पीओके के लोगों को यह संदेश दिया गया कि आप अपनी आवाज उठाएं, हथियार उठाएं और पाकिस्तानी सेना को चुनौती दें। तभी भारत में आपके शामिल होने का माहौल तैयार होगा। नियंत्रण रेखा से बंटे कश्मीर के दोनों हिस्सों में भारी अंतर है। एक हिस्सा विकास देख रहा है, जबकि दूसरा हिस्सा उपेक्षा का शिकार है। एक तरफ जीवन-स्तर में बढ़ोतरी देखी जा रही है, तो दूसरी तरफ गिरावट। एक समय आएगा, जब पीओके के लोग भारत में मिलने के लिए हथियार उठा लेंगे।

अनुच्छेद 370 हटाने के बाद भारत ने बातचीत के जरिये कश्मीर के समाधान का जिक्र बंद कर दिया है। यह संदेश दे दिया गया है कि कश्मीर पर बात नहीं होगी, केवल पीओके पर बात होगी। भारत ने आक्रामक कूटनीति के जरिये पाकिस्तान को अलग-थलग कर दिया है। साथ ही एफएटीफ की निगरानी भी बढ़ गई है, इसलिए पाकिस्तान को सावधानी से चलना होगा। अगर उसने एक भी गलत कदम उठाया, तो उसे वैश्विक आक्रोश का सामना करना पड़ सकता है।

पाकिस्तान ने अपना सामरिक महत्व खो दिया है, जबकि भारत का वैश्विक स्तर पर सम्मान हो रहा है। भारत-अमेरिका संबंधों में मजबूती के कारण पाकिस्तान स्वयं को अलग-थलग महसूस कर रहा है। अनुच्छेद 370 की बहाली की मांग करने वाली उसकी कश्मीर नीति की नई दिल्ली ने अनदेखी कर दी है। उभरता हुआ भारत अब निर्णायक फैसले ले रहा है। 

चीन लगातार पाकिस्तान का समर्थन कर रहा है। हाल ही में उसने पाकिस्तानी नागरिक साजिद मीर को वैश्विक आतंकवादी घोषित करने की भारत-अमेरिकी मांग को रोक दिया। घाटी में जी-20 बैठक पर रोक लगाने की पाकिस्तान की मांग का भी उसने समर्थन किया। अमेरिका-चीन के बीच बढ़ती प्रतिद्वंद्विता से पाकिस्तान की मुश्किलें बढ़ गई हैं। चीन के साथ उसकी नजदीकी से अमेरिका के साथ संबंधों पर असर पड़ा है।

पाकिस्तान की राजनीतिक, आर्थिक और सुरक्षा चिंताएं उसकी बेचैनी बढ़ा रही हैं। कुछ महीनों के भीतर चुनाव होने से वहां की स्थिति और खराब होगी। वह मात्र खंडन करने, भारतीय टिप्पणियों का जवाब देने और आतंकवादी गतिविधियों में कटौती करने में सक्षम है। वह जानता है कि यदि उसका कोई भी कदम भारत की सहनशीलता को पार करेगा, तो उसके विनाशकारी परिणाम होंगे।

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