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युद्ध की जगह लेता परोक्ष युद्ध, शिवदान सिंह से जानिए भविष्य की चुनौतियां
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : iStock
कुछ समय पहले देश के मीडिया की सुर्खियां थीं कि चीन भारत के प्रमुख राजनेताओं तथा व्यक्तियों का डाटा इकट्ठा कर रहा है। इस डाटा के आधार पर चीन इलेक्ट्रॉनिक तथा अन्य माध्यम से भारत के खिलाफ भ्रम फैलाने की कोशिश कर सकता है, जो हाइब्रिड युद्ध का उदाहरण है। रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, भविष्य में आमने-सामने का परंपरागत युद्ध नहीं होगा। युद्ध के लक्ष्य इस प्रकार के परोक्ष युद्ध से ही हासिल किए जाएंगे।
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भारत में क्षेत्रीयता के विवाद के दो बड़े उदाहरण पंजाब और कश्मीर में देखे जा सकते हैं, जो पाकिस्तान की कुख्यात खुफिया एजेंसी आईएसआई द्वारा पैदा किए गए थे। बीती सदी के 80 के दशक में पाकिस्तान के सैन्य शासक जियाउल हक ने भारत के पंजाब में खालिस्तान आंदोलन के बीज बोए।
इसे भीषण रूप देने के लिए उसने अपने यहां उग्रवादियों को प्रशिक्षित किया, फिर उन्हें पंजाब में भेजकर आतंकवादी घटनाएं करानी शुरू कर दीं। इससे भारत के सबसे उन्नत प्रदेश पंजाब में अशांति फैली और हिंदुओं तथा सिखों में तनाव की स्थिति पैदा हो गई। जबकि इन दोनों समुदायों में बहुत समय से करीबी रिश्ता रहा है।
उग्रवाद के दौर में खालिस्तानी उग्रवादी अक्सर हिंदू समाज के लोगों को निशाना बनाते थे, ताकि इन दोनों समुदायों में संदेह तथा दुश्मनी की स्थिति पैदा हो जाए और समाज धीरे-धीरे बिखर जाए। परंतु समय रहते पंजाब के राष्ट्रवादी सिखों ने स्थिति संभाली और पाकिस्तान के नापाक इरादे का मुंहतोड़ जवाब दिया।
पाकिस्तान इसी प्रकार कश्मीर में दुष्प्रचार फैलाकर वहां के मुस्लिम समुदाय को भारत-विरोधी बनाता रहा है। उसने समय-समय पर ऐसी स्थितियां पैदा की हैं, जिनसे कि कश्मीर के मुस्लिम समुदाय को लगे कि भारत सरकार उसके विरुद्ध है। आजादी के बाद से ही पाकिस्तान की सेना भारत के कश्मीर को हड़पना चाहती है।
इसके लिए पहला कुप्रयास उसने अक्तूबर, 1947 में ही कर दिया था, जब उसने अपने उत्तर-पश्चिमी क्षेत्र के पठानों को कबाइलियों के रूप में अपनी सेना के साथ घुसाकर श्रीनगर पर कब्जा करने का प्रयास किया था। लेकिन उसी समय भारतीय सेना ने पाकिस्तान के उस घिनौने इरादे को मिट्टी में मिला दिया था।
पाकिस्तान इन पठानों के जरिये विश्व बिरादरी को दिखाना चाहता था कि कश्मीर का अवाम भारत के खिलाफ उठ खड़ा हुआ है और वह पाकिस्तान के साथ मिलना चाह रहा है। वह पाकिस्तान का परोक्ष या हाइब्रिड युद्ध का ही नमूना था। पाकिस्तान के अलावा वैश्विक महाशक्तियां भी हाइब्रिड युद्ध लड़ रही हैं।
जैसे कि अफगानिस्तान में रूसी सेना के आने के बाद अमेरिका ने पाकिस्तान के तालिबान को अफगानिस्तान में भेजकर रूसी सेना को वापस जाने के लिए मजबूर कर दिया था। इस तरह का परोक्ष युद्ध लंबे समय से दुनिया के धनी समझे जाने वाले पश्चिम एशिया के तेल संपन्न देशों के बीच भी चल रहा है और क्षेत्र की आर्थिक संपदा को बर्बाद करने के लिए आईएस, हिजबुल्लाह, अल कायदा और तालिबान जैसे आतंकी संगठनों का गठन किया गया है, जिन्होंने इस क्षेत्र के सीरिया, लीबिया, इराक, अफगानिस्तान और पाकिस्तान जैसे देशों को करीब-करीब बर्बादी के कगार पर लाकर खड़ा कर दिया है।
विशेषज्ञों के अनुसार, अगले दशक तक पश्चिम एशिया के इन देशों में अशांति और फैल जाएगी तथा धीरे-धीरे इनकी प्राकृतिक संपदा भी खत्म हो जाएगी। पूर्वी लद्दाख में भारत-चीन सीमा पर विगत मई से तनाव है तथा दोनों देश की सेना पूरी तैयार के साथ आमने-सामने है। पर यह दावे के साथ कहा जा सकता है कि यह तनाव युद्ध में तब्दील नहीं होगा, क्योंकि आज के युग में इस तरह के युद्ध को कोई देश फायदे का सौदा नहीं मानता।
इसका मुख्य कारण यह है कि युद्ध में दुश्मन को क्षति पहुंचाते-पहुंचाते खुद को भी भारी क्षति उठानी पड़ती है। इसलिए चीन भले ही शक्ति प्रदर्शन करता रहे, पर वह कभी आगे बढ़ने की हिम्मत नहीं करेगा। लेकिन पाकिस्तान और चीन, दोनों तरह-तरह से हमारे देश में भ्रांतियां फैलाकर सांप्रदायिकता और क्षेत्रीयता की भावनाएं भड़काकर अशांति फैलाने की कोशिश करेंगे। इसके लिए वे इलेक्ट्रनिक तथा संचार के अन्य माध्यम से अपने भारत-विरोधी प्रोपोगेंडा को लक्ष्य तक पहुंचाने की कोशिश करते रहेंगे। इसे देखते हुए हमें सतर्क रहना होगा। (लेखक सेवानिवृत्त कर्नल हैं।)