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भारत-अमेरिका: मित्रता का मतलब अधीनता नहीं, धमकी देकर अनुयायी बनाना भी नहीं महानता का लक्षण

Fri, 01 Aug 2025 07:22 AM IST
Deepak Vohra दीपक वोहरा
Updated Fri, 01 Aug 2025 07:22 AM IST
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सार
संबंधों में उतार-चढ़ाव आते रहते हैं। चीन के साथ दोस्ती की कसमें खाने वाला पाकिस्तान भी तो आज अमेरिका की गोद में बैठा हुआ है। भारत ने अमेरिकी प्रतिबंध पहले भी झेले हैं, लेकिन ट्रंप की उन लोगों के प्रति बेलगाम शत्रुता, जो उनके वफादार अनुयायी बनने से इन्कार करते हैं, उन्हें अपने ही पैरों पर कुल्हाड़ी मारने के लिए मजबूर करती है।
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IND-USA: Friendship does not mean subordination, making followers by threatening is also not sign of greatness
डोनाल्ड ट्रंप के साथ पीएम मोदी - फोटो : पीटीआई

विस्तार

जिस तरह लोगों के बीच संबंधों के कई आयाम होते हैं, उसी तरह राष्ट्रों के बीच। मित्रता का अर्थ बिना शर्त अधीनता नहीं है। फिलीपींस के पूर्व राष्ट्रपति ने चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के प्रति अपने प्रेम का इजहार किया, जिन्होंने भारी ऋण और निवेश का वादा किया था, लेकिन जब एक अंतरराष्ट्रीय न्यायाधिकरण ने कुछ विवादित द्वीपों को मनीला को सौंप दिया, तो दोनों देश एक-दूसरे से भिड़ गए। चीन के साथ अपनी दोस्ती को पाकिस्तान पहाड़ों से ऊंचा, समुद्र से गहरा और मधु से ज्यादा मीठा बताता रहा है, लेकिन अब वह चीन के सबसे बड़े दुश्मन अमेरिका के साथ दोस्ती के गीत गा रहा है।



भारत-अमेरिका के बीच संबंध ठीक-ठाक चल रहे थे, लेकिन अपनी दूसरी बारी में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने आक्रामक रुख अपनाने का फैसला कर लिया। जुलाई में भारत जब अमेरिका के साथ एक व्यापार समझौते पर बातचीत कर रहा था, तो ट्रंप प्रशासन ने भारतीय आयातों पर 25 फीसदी टैरिफ लगा दिया और रूस से तेल एवं हथियार खरीदने पर  अतिरिक्त जुर्माना भी लगा दिया। अपनी मंशा स्पष्ट करते हुए ट्रंप ने कहा कि ब्रिक्स समूह (जिसमें भारत एक संस्थापक सदस्य है) मूलतः अमेरिका विरोधी है और डॉलर पर हमला करना चाहता है, लेकिन वह किसी को भी डॉलर पर हमला नहीं करने देंगे। इसलिए भारत के खिलाफ उनके टैरिफ आंशिक रूप से ब्रिक्स और आंशिक रूप से व्यापार के लिए लगाए हैं।


फिर ट्रंप ने दावा किया कि उन्होंने कई देशों के नेताओं से बात की है, और वे सभी अमेरिका को ‘बेहद खुश’ करना चाहते हैं। हो सकता है कि किसी ने उन्हें कहा हो कि उनका टैरिफ आतंकवाद भारत को रूस के और करीब ले जाएगा। शायद इसी कारण गुस्से में उन्होंने पोस्ट किया कि उन्हें इस बात की परवाह नहीं है कि भारत रूस के साथ क्या करता है और वे ‘अपनी मृत अर्थव्यवस्थाओं को एक साथ नीचे ले जा सकते हैं, मुझे इससे कोई फर्क नहीं पड़ता।’

ट्रंप की उन लोगों के प्रति बेलगाम शत्रुता, जो उनके वफादार अनुयायी बनने से इन्कार करते हैं, उन्हें अपने ही पैरों पर कुल्हाड़ी मारने के लिए मजबूर करती है। भू-राजनीतिक तनाव, आर्थिक चुनौतियों और अंतरराष्ट्रीय यात्रियों के बीच अमेरिका की बढ़ती नकारात्मक छवि के कारण, 2025 में अमेरिका में पर्यटकों का आगमन आधा होने की संभावना है। एक ऐसे देश में, जिसने स्वतंत्रता प्रेमियों और मानवीय भावना को महत्व देने वालों को आकर्षित किया, ट्रंप स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी के वादे को फिर से लिख रहे हैं।

अमेरिकी खुदरा विक्रेताओं को पर्यटकों की कमी का एहसास हो रहा है, जून 2025 में विदेशी पर्यटकों के आगमन में  छह फीसदी से ज्यादा की गिरावट आने की संभावना है। एक आलोचक ने पोस्ट किया है कि अगर ट्रंप का ब्रेन स्कैन कराया जाए, तो उसमें हड़प्पा के खंडहरों जैसी बहुत ज्यादा संरचनाएं (कैल्सीफिकेशन) दिखाई देंगी! डोनाल्ड ट्रंप को पता होना चाहिए कि एशियाई लोग टैरिफ के झटके को उन अमेरिकियों की तुलना में कहीं ज्यादा आसानी से झेल सकते हैं, जो मुश्किलें बर्दाश्त नहीं कर सकते। मेक अमेरिका ग्रेट एगेन के नारों के बावजूद अमेरिका पूरी तरह से सब्सिडी पर चलने वाला बेरोजगारों का देश है।

ट्रंप से दुखी होकर रूस और चीन ब्रिक्स के केंद्र के रूप में रिक (RIC) यानी रूस, भारत और चीन के समूह का प्रस्ताव रख चुके हैं। लेकिन भारत इसका सदस्य नहीं बन सकता, क्योंकि वह चीन पर कभी भरोसा नहीं करेगा। चीन पर भरोसा तो रूस भी नहीं करता, लेकिन कुछ संबंध सुविधा के लिए भी होते हैं।

टैरिफ के इस तूफान से हमें कैसे निपटना है? टैरिफ प्रतिबंधों से हल्का शब्द है। हम पहले भी 1974 और 1998 में ऐसे तूफानों का सामना कर चुके हैं, जब अमेरिका ने हमारे परमाणु कार्यक्रम को लेकर भारत पर प्रतिबंध लगाए थे। अधिकांश अमेरिकी सहयोगियों ने भी हमारे साथ यही किया। हमें आर्थिक नुकसान तो हुआ, लेकिन हम बच गए।

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की घोषणा पर नई दिल्ली की प्रतिक्रिया संतुलित और सम्मानजनक रही है। हमारे प्रवक्ता ने कहा कि हम टैरिफ घोषणा के निहितार्थों का अध्ययन कर रहे हैं और एक निष्पक्ष, संतुलित और पारस्परिक रूप से लाभकारी द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर बातचीत कर रहे हैं। हम अपने किसानों, उद्यमियों और एमएसएमई के कल्याण की रक्षा और संवर्धन को सर्वोच्च महत्व देते हैं, और अपने राष्ट्रीय हितों को सुरक्षित करने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाएंगे, जैसा कि ब्रिटेन के साथ व्यापक आर्थिक और व्यापार समझौते सहित अन्य व्यापार समझौतों में किया गया है। दिलचस्प बात यह है कि विभिन्न राष्ट्रों के खिलाफ अलग-अलग शुल्कों का पैटर्न महानतम रणनीतिकार कौटिल्य के सिद्धांत में वर्णित है, जो प्रत्येक पड़ोसी देश के साथ उसकी शक्ति और इरादों के आधार पर अलग-अलग व्यवहार करने की सलाह देता है।

ट्रंप प्रशासन ने विशिष्ट द्विपक्षीय शक्ति गतिशीलता के अनुसार, विभिन्न दबाव रणनीतियां लागू की हैं। वह दृढ़ स्थिति को दरकिनार करते हैं, सैन्य उलझनों (जो लंबे समय से अमेरिकी प्राथमिकता रही है) के खिलाफ हैं और टैरिफ को हथियार बनाना पसंद करते हैं, जिसका उन्होंने विरोधियों और सहयोगियों, दोनों के खिलाफ इस्तेमाल किया है। हमने विघटनकारी तकनीकों के बारे में सुना है, डोनाल्ड ट्रंप विघटनकारी शासन के सर्वोच्च चैंपियन हैं। उन्हें टैरिफ बहुत पसंद है, जिसे वे शब्दकोश का सबसे सुंदर शब्द कहते हैं। वैश्वीकरण को धिक्कार है!

आगे क्या होगा? डोनाल्ड ट्रंप हमें अपने बेकार एफ-35 बेचने की कोशिश करते रहेंगे और हम उनका विरोध करेंगे। वह 14 अगस्त, 2025 को पाकिस्तान के निर्माण दिवस परेड में मुख्य अतिथि होंगे। वाशिंगटन क्वाड पर धीमी गति से काम करेगा और यूक्रेन-रूस तथा इस्राइल-ईरान युद्धों पर अपना ध्यान केंद्रित रखेगा, ताकि उन्हें समाप्त होने से रोका जा सके। कंबोडिया-थाईलैंड संघर्ष वैश्विक उथल-पुथल का एक अच्छा रूपक है, जिसमें दो बौद्ध राष्ट्र एक हिंदू मंदिर वाले क्षेत्र के लिए लड़ते हैं और मुस्लिम राष्ट्र मलयेशिया शांति स्थापित करने की कोशिश करता है। प्रभुत्व का संघर्ष न तो समाप्त होगा और न ही संयुक्त राष्ट्र का नाश होगा।

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