अतुल्य असहिष्णुता
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
हम तो पहले ही कह रहे थे कि असहिष्णुता के हल्ले में बहुत झोल-झाल है। अवॉर्ड वापसी खुद सबसे बड़ी असहिष्णुता का मामला है। इतने बड़े देश में, छोटी-छोटी बातों को भी न पचाने की असहिष्णुता! खैर, अब तो अवॉर्ड वापसी की बाकायदा पोल ही खुल गई है। देश भर में अवॉर्ड वापसी के ढोल पीटने वाले, कर्नाटक में अवॉर्ड लेने पहुंच गए। वह भी सिर्फ इस बहाने कि वहां असहिष्णुता वाले अवॉर्ड वापसी की मांग कर रहे थे। अवॉर्ड वापसी भी चालू टाइप की नहीं, अवॉर्ड देने के फैसले की ही वापसी की मांग। अवॉर्ड वापसी वाले झट अवॉर्ड लेने वाले बन गए और के एस भगवान को अवॉर्ड दिला लाए। यह भी नहीं सोचा कि जब बंदे का नाम कलबुर्गी के बाद दूसरे नंबर पर चढ़ चुका है, अवॉर्ड उसके किस काम का!
हद तो यह है कि सेक्युलर वाले नए साल में भी असहिष्णुता का वही पुराना राग अलाप रहे हैं। यह तो जमाने के साथ चलना नहीं हुआ। फिर तिवारी जी, आमिर खान को राष्ट्रविरोधी क्यों नहीं कहते? गद्दीधारी पार्टी के सांसद हुए तो क्या हुआ, उनकी पार्टी में कम से कम इतनी डेमोक्रेसी जरूर है कि बंदा, असहिष्णुता की शिकायत करने वाले को राष्ट्रविरोधी वगैरह कह सके। अलबत्ता जब से सुषमा जी और पीएम जी पाकिस्तान होकर आए हैं, तब से ऐसे लोगों का पाकिस्तान का टिकट काटे जाने का सिलसिला रुक-सा गया है। अभी तय नहीं हो पाया है कि ऐसे लोगों को किस देश में भेजा जाए।
कोई यह क्यों नहीं पूछता कि आमिर खान की असहिष्णुता पर अपने मन की बात कहने के लिए तिवारी जी को जो खंडन करना पड़ा है, क्या वह भी असहिष्णुता का ही मामला नहीं है। केसरिया वालों की सहिष्णुता भी असहिष्णुता और सेक्युलर वालों की असहिष्णुता भी सहिष्णुता! यह भेदभाव बहुत चल लिया, अब और नहीं। अतुल्य भारत की ब्रांड एंबेसडरी से आमिर खान को तो वैसे भी हटना ही था। आखिर देश की छवि का मामला है। जब तक कोई आमिर जाएगा नहीं, तब तक गुजरात का चेहरा, देश का चेहरा कैसे बन पाएगा!