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प्रवासियों की बढ़ती अहमियत

Tue, 13 Feb 2018 06:43 PM IST
जयंतीलाल भंडारी
जयंतीलाल भंडारी Updated Tue, 13 Feb 2018 06:43 PM IST
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Increasing importance of migrants
जयंतीलाल भंडारी

हाल के अपने प्रवास के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ओमान में भारतीय समुदाय को संबोधित करते हुए कहा कि भारत तेजी से विकास कर रहा है और पूरी दुनिया में भारतीय प्रतिभाओं और कुशल भारतीय प्रवासियों की अहमियत बढ़ती जा रही है। इसमें कोई दो मत नहीं कि इन दिनों दुनिया भर में जैसे-जैसे आर्थिक विकास बढ़ने का परिदृश्य दिखाई दे रहा है, वैसे-वैसे भारतीय प्रतिभाओं और कुशल प्रवासियों का महत्व बढ़ता जा रहा है। इसकी पुष्टि नौ फरवरी को प्रकाशित भारत कौशल रिपोर्ट 2018 से भी हो रही है। यद्यपि दुनिया के कई विकसित देश प्रवासियों के लिए रोजगार के दरवाजे बंद करते दिख रहे हैं, पर विशिष्ट उपयोगिता के कारण भारतीय प्रतिभाओं और पेशेवरों का विदेशों में महत्व बना हुआ है। कई विकसित और विकासशील देश भारतीय प्रतिभाओं के लिए अपने दरवाजे बंद नहीं कर पा रहे हैं।


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गौरतलब है कि पिछले दिनों अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने भाषण में प्रतिभा आधारित इमिग्रेशन पॉलिसी की वकालत की। साथ ही उन्होंने वीजा में देशों का कोटा सिस्टम खत्म करने का संकेत दिया। इसका सबसे ज्यादा लाभ भारतीय समुदाय को होगा। प्रवासियों को लेकर ट्रंप के बदले हुए रुख से अमेरिकी भारतीय समुदाय और भारत के कुशल प्रोफेशनल्स बहुत उत्साहित हैं। उन्होंने ट्रंप से अपील की कि वह देशों के हिसाब से वैध स्थायी निवास की सीमा का अंत करें, ताकि उच्च कौशल प्राप्त भारतीय श्रमिकों को ग्रीन कार्ड मिलने में आ रही दिक्कतें दूर हों। इसी तरह से दक्षिण पूर्वी एशियाई देशों के संगठन आसियान के 10 देशों इंडोनेशिया, फिलीपीन्स, सिंगापुर, मलेशिया, ब्रुनेई, थाईलैंड, म्यांमार, लाओस, वियतनाम और कंबोडिया के राष्ट्र प्रमुखों ने पिछले माह 25 जनवरी को भारत के कुशल पेशेवरों के सहयोग से कारोबार विस्तार की बात कही है।

निस्संदेह विदेशों में प्रवासी भारतीय और कुशल भारतीय पेशेवर प्रभावशाली हैं। ये कितने प्रभावी और उपयोगी हैं, इसका अंदाज इसी जनवरी 2018 में अमेरिका में घटित हुए एच-1बी वीजा पर सख्ती के प्रस्ताव और फिर उस पर रोक संबंधी घटनाक्रम से लगाया जा सकता है। दो जनवरी को अमेरिका के डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी (डीएचएस) ने डोनाल्ड ट्रंप सरकार की ‘बाय अमेरिकन, हायर अमेरिकन नीति’ के तहत प्रस्तावित एच-1बी वीजा नियमों में संशोधन का प्रस्ताव किया था। इसके तहत एच-1बी वीजा पर अमेरिका में रहकर ग्रीन कार्ड का इंतजार कर रहे भारतीय सहित अन्य देशों के आईटी विशेषज्ञों को बड़ा झटका लग सकता था। जबकि ये वीजाधारक अमेरिकी अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में मदद कर रहे हैं। ऐसे में इनका जाना अमेरिकी अर्थव्यवस्था के लिए नुकसानदेह होगा।

पूरी दुनिया में प्रवासी भारतीयों और विदेशों में कार्य कर रही भारत की नई पीढ़ी की श्रेष्ठता को स्वीकार्यता मिली है। प्रवासी अपने कार्यरत देशों में रहते हुए भारत के विकास के लिए धन बरसाते हुए भी दिखाई दे रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र के कृषि विकास कोष द्वारा जारी की गई रिपोर्ट 2017 के मुताबिक, दुनिया भर के विभिन्न देशों में कार्यरत प्रवासियों के द्वारा अपनी कमाई को अपने-अपने देशों में भेजने के मामले में प्रवासी भारतीय पहले क्रम पर हैं। प्रवासी भारतीयों ने वर्ष 2016-17 में भारत में 62.7 अरब डॉलर की धनराशि भेजी है। इनमें से 40 फीसदी धनराशि ग्रामीण क्षेत्रों में भेजी गई है, जिसका बड़ा हिस्सा स्वास्थ्य सेवा, बेहतर शिक्षा और जीवन स्तर बढ़ाने में खर्च किया गया है।

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