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CLR James: सीएलआर जेम्स के सम्मान में

Sun, 01 Jan 2023 07:25 AM IST
Ramchandra Guha रामचंद्र गुहा
Updated Sun, 01 Jan 2023 07:25 AM IST
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सार
त्रिनिदाद में पैदा हुए सीएलआर जेम्स एक क्रिकेट लेखक होने के साथ ही अग्रणी सामाजिक इतिहासकार थे और उन्होंने फ्रांसीसी क्रांति के तुरंत बाद हैती में हुए दास विद्रोह पर ऐतिहासिक किताब भी लिखी थी। हाल ही में आई एक जीवनी उनके जीवन के अनेक अनछुए पहलुओं को सामने लाती है। 
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in the respect of CLR James read article by Ramchandra Guha
CLR James - फोटो : Social Media

विस्तार


अखबारों के स्तंभकारों के पास अमूमन अपने शब्दों को लेकर स्वतंत्रता होती है, लेकिन शायद ही उन्हें यह छूट शीर्षक के मामले में मिल पाती है। लेख के शीर्षक तय करना अखबारों के संपादकीय सहयोगियों के हाथ में होता है, क्योंकि उनमें इस बात की बेहतर समझ होती है कि पाठकों को कैसा शीर्षक पसंद आएगा। अखबारों में चालीस सालों से लिखते हुए मुझे जो शीर्षक सर्वाधिक पसंद आया, उसे अब बंद हो चुके संडे ऑब्जर्वर के एक उप-संपादक ने दिया था। यह आलेख त्रिनिदाद के लेखक और कार्यकर्ता सीएलआर जेम्स के संबंध में था और उस उप-संपादक ने शीर्षक दिया था, 'ब्लैक इज बाउंटीफुल'(अश्वेत उदार है)।

यह आलेख 84 वर्ष की उम्र में सीएलआर जेम्स का लंदन में निधन हो जाने के कुछ दिन बाद जून, 1989 में प्रकाशित हुआ था। मेरा ध्यान उनकी एक कृति और अमेरिकी इतिहासकार पॉल बुहले द्वारा लिखी गई उनकी जीवनी की ओर गया।  जेम्स के काम के अधिकांश भारतीय प्रशंसकों की तरह, मैं उनके नजदीक क्रिकेट के उनके शानदार सामाजिक इतिहास, बियॉन्ड ए बाउंड्री के माध्यम से आया था। मैंने यह किताब अपने कॉलेज की लाइब्रेरी में पढ़ी थी और बाद में मैंने फरवरी, 1978 में दिल्ली में हुए दूसरे विश्व पुस्तक मेले से महज चार रुपये में इसकी एक प्रति खरीदी। तबसे यह प्रति मेरे पास है और इसे मैं अनेक किताबों से अधिक महत्व देता हूं।


जेम्स ने एक क्रिकेट लेखक से कहीं अधिक महत्वपूर्ण काम किए। वह एक अग्रणी सामाजिक इतिहासकार थे और उन्होंने फ्रांसीसी क्रांति के तुरंत बाद हैती में हुए दास विद्रोह पर ऐतिहासिक किताब भी लिखी थी। वह त्रिनिदाद में पैदा हुए और वहीं पले-बढ़े। बाद के कई वर्ष उन्होंने अमेरिका में बिताए जहां वह मार्क्सवादी राजनीति में सक्रिय रहे। वह लंबे समय तक ब्रिटेन में भी रहे और अफ्रीका में हो रहे मुक्ति संघर्षों का करीबी से अनुसरण किया।

मैंने लगभग पांच दशकों से जुनूनी रूप से सीएलआर जेम्स का लिखा और उनके बारे में जो कुछ लिखा गया है, उसे पढ़ा है। पॉल बुहले द्वारा लिखी गई उनकी जीवनी में, जिसका ऊपर जिक्र आया है, उनके अमेरिका प्रवास पर विस्तार से लिखा गया है, लेकिन यह क्रिकेट पर उनके लेखन के लिहाज से कमजोर है। मैंने मिश्रित भावनाओं के साथ एक'उत्तर औपनिवेशिक आलोचक' के रूप में जेम्स की विरासत के बारे में पेशेवर शिक्षाविदों द्वारा लिखी किताबें और लेख पढ़े हैं, जिनमें शब्दों की जादूगरी तो है, लेकिन ठोस जीवनी या ऐतिहासिक विवरण के लिहाज से ये बेहद कमजोर हैं। एकमात्र भारतीय फारुख ढोंडी ने भी उनके बारे में लिखा, लेकिन वह भी निराशाजनक था। उनकी किताब पूर्ण जीवनी होने का दावा तो करती है, लेकिन वास्तव में वह वृद्धावस्था में जेम्स के बारे में बिखरी हई यादों को संजोने जैसी ही है।

जेम्स लंबे समय से एक ऐसे जीवनी लेखक के हकदार थे, जो उनके व्यक्तिगत जीवन की समृद्धि और उनकी सार्वजनिक गतिविधियों के साथ पूरी तरह से न्याय कर सके। अंततः कार्डिफ में रहने वाले लेखक जॉन विलियम्स ने यह काम किया। हाल ही में आई अपनी किताब, सी.एल.आर. जेम्सः ए लाइफ बियान्ड बाउन्ड्रीज, में विलियम्स ने व्यापक रूप से इंग्लैंड और अमेरिका के अभिलेखागारों की मदद ली और उन लोगों के गंभीर साक्षात्कार लिए, जो कि जेम्स को जानते थे और जिन्होंने उनके विपुल लेखन को पढ़ रखा है।

जेम्स अनिवार्यतः इस किताब के केंद्र में हैं, और साथ ही विलियम्स ने उनकी कहानी के अन्य महत्वपूर्ण चरित्रों का भी खयाल रखा है।इसमें उनके त्रिनिदाद के युवा दोस्तों, उनकी प्रेमिकाओं और पत्नियों, इंग्लैंड, अमेरिका, अफ्रीका और वेस्ट इंडीज में उनके राजनीतिक साथियों और विरोधियों का संवेदनशील तरीके से चित्रण है। जेम्स के जीवन के सर्वाधिक अर्थपूर्ण संबंध क्रिकेटर लेरी कॉन्सटेंटाइन, घुमंतू क्रांतिकारी लियोन ट्रॉट्स्की और त्रिनिदाद के राजनेता एरिक विलियम्स के साथ थे, और इसमें इन सबके बारे में संवेदनशीलता और पूरे अधिकार के साथ कहा गया है। किताब जहां अपने विषय के प्रति संवेदनशील है, इसमें किसी तरह की चापलूसी नहीं है। अमेरिका प्रवास के दौरान जेम्स वामपंथी हलकों से जुड़ गए थे, जिनके संप्रदायवाद को लेकर विलियम्स अधीर लगते हैं। वह आकर्षक युवतियों में उनकी रुचि के बारे में भी स्पष्ट हैं; यह निश्चित रूप से हमारे अपने कम लैंगिक भेदभाव वाले युग में निंदा के योग्य है।

विलियम्स ने उनके बारे में अनेक सम्मोहक उद्धरणों का भी जिक्र किया है। जेम्स एक शानदार लेखक थे, लेकिन उससे भी कहीं उम्दा वक्ता थेः जैसा कि एक युवा अंग्रेज महिला (जो कि बाद में उनकी कई प्रेमिकाओं में से एक थीं) ने 1930 के दशक में लंदन के उनके कम्युनिस्ट सर्किल के बारे में लिखा, 'अमूमन कोई एक व्यक्ति बातचीत पर हावी नहीं होता और यदि कोई कोशिश करता भी, तो अन्य लोग ऊब महसूस करने लगते। हालांकि जेम्स के मामले में हर कोई उनसे पूरी तरह से मोहित था। वे उनसे सवाल पूछ रहे थे; मुझे याद नहीं कि मैंने कुछ पूछा या नहीं, लेकिन हर कोई तैयार और खुश था कि वह हमें अपने विषय पर व्याख्यान दें।'

उनके प्रकाशक फ्रेदरिक बारबर्ग ने अपने लेखक के बारे में लिखाः 'मैं जिन्हें जानता हूं, जेम्स उनमें बहुत सहज व्यक्तित्वों में से एक थे... वह छह फुट तीन इंच कद के आकर्षक व्यक्ति थे। उनकी स्मृति असाधारण थी। वह न केवल मार्क्सवादी क्लासिक, बल्कि शेक्सपीयर के लंबे अंशों को अपनी मुलायम अंग्रेजी में उद्धृत कर सकते थे, जिन्हें सुनना अच्छा लगता था। वह बेहद मिलनसार थे, पूंजीवाद से उपजी विलासिता, बढ़िया भोजन, शानदार कपड़े, शानदार फर्नीचर और खूबसूरत महिलाओं से प्रेम करते थे और उनमें लेसमात्र का भी अपराधबोध नहीं होता था, जिसकी वर्ग संघर्ष के किसी अनुभवी योद्धा से अपेक्षा की जा सकती थी।' 

विलियम्स ने जेम्स की दो महान पुस्तकों पर ध्यान केंद्रित किया है। ब्लैक जेकोबिन्स के बारे में वह लिखते हैं कि 'सीएलआर का उद्देश्य हैती की क्रांति पर अपने विश्लेषण को इतिहास और भविष्य की क्रांतियों का खाका, दोनों बनाना था।' और, बियांड द बाउंड्री के संबंध में वह हमें इस बात का एक समृद्ध, सूक्ष्म विवरण देते हैं कि इस पुस्तक की कल्पना कैसे की गई थी, इसमें क्या कहना चाहा गया था, और इसे कैसे हासिल किया गया था।

विलियम्स जब इस जीवनी को पूरा कर रहे थे तब अमेरिका और अन्य जगहों पर ब्लैक लाइव्स मैटर विरोध प्रदर्शन आकार ले रहा था।विलियम्स ने इस संयोग को अपने विषय की दूरदर्शिता का प्रमाण माना: वे विचार जो जेम्स ने अपने समय में रखे थे—  वर्ग के साथ-साथ पहचान के महत्व के बारे में, नीचे से आने वाले विद्रोह के बारे में, अश्वेतों की प्रमुख भूमिकाओं के बारे में राजनीतिक संघर्ष में महिलाओं और युवाओं के बारे में— उन्होंने धीरे-धीरे राजनीतिक सोच में सबसे आगे अपना रास्ता बना लिया है।'

जॉन एल विलियम्स की शानदार शोध और खूबसूरती से आंकी गई किताब है, सीएलआर जेम्स। मुझे नहीं लगता कि अब मुझे किसी अन्य जीवनी या आलोचनात्मक अध्ययन को पढ़ने की आवश्यकता है। लेकिन मैं निश्चित रूप से हर एक साल के अंतराल में बियांड द बाउंड्री को पढता रहूंगा, जैसा कि मैंने अपनी किशोरावस्था में किया था।

 

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