जवाबी हमले से बदली छवि
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
भारत को अब तक एक सॉफ्ट स्टेट यानी उदार लोकतंत्र समझा जाता था। अपने मूल चरित्र में सॉफ्ट स्टेट होना बुरी बात नहीं है। लेकिन पाकिस्तान ने उसे भारत की कमजोरी समझ लिया था और जब चाहे, तब भारत में आतंकवादी हमले करता रहा। पहले पंजाब, फिर कश्मीर में उसने भारत को खूब परेशान किया। हर आतंकी हमले के बाद भारत की सरकारें कुछ धमकी देतीं और पाकिस्तान इसे गीदड़ भभकी समझता। लेकिन इधर तो पाकिस्तान खुलेआम आतंकवादियों को अपना समर्थन देने लगा था। बुरहान वानी की मौत पर उसने जिस तरह आंसू बहाए और मामले को संयुक्त राष्ट्र तक ले गया, उससे सारी दुनिया चकित रह गई। आखिर कोई देश अपने पड़ोसी को इस तरह कब तक बर्दाश्त करता रहे। लिहाजा 29 सितंबर की रात भारत ने दुनिया को दिखा दिया कि अब वह सॉफ्ट स्टेट नहीं रहा।
मई, 2014 में जब नरेंद्र मोदी ने सत्ता संभाली थी, तब उन्हें पाकिस्तान के इस चरित्र के बारे में अच्छी तरह पता था। फिर भी उन्हें लगा कि एक पड़ोसी से पड़ोसी धर्म निभाना चाहिए। इसलिए उन्होंने अपने शपथ ग्रहण समारोह में दक्षिण एशिया के तमाम राष्ट्राध्यक्षों के साथ पाक प्रधानमंत्री को भी बुलाया। दूसरी तरफ आतंकवादी भारत के खिलाफ जहर उगलते रहे और नवाज शरीफ चुप बैठे रहे। लेकिन मोदी संवाद का कोई भी मौका नहीं चूकते। यहां तक कि वह नवाज शरीफ के पोते की शादी में अचानक ही पाकिस्तान चले गए। लेकिन पाक हुक्मरान भारत को अतीत के चश्मे से ही देखते रहे।
पाकिस्तान की शह पर आतंकी लगातार भारत को उकसाते रहे। पठानकोट में भारत के सैन्य ठिकाने पर हमला हुआ। भारत ने पाकिस्तान को हर सबूत उपलब्ध करवाए, पाक जांच दल को पठानकोट भी बुलाया। पर इन सबका कोई फर्क नहीं पड़ा।
उड़ी में आतंकवादियों ने सो रहे भारतीय जवानों के तंबुओं पर हमला कर 18 जवानों को मार डाला। यह जघन्यता की पराकाष्ठा थी। पाक सेना पिछले एक महीने से सीमा पर संघर्ष विराम का लगातार उल्लंघन कर रही थी। उड़ी हमले के तुरंत बाद रक्षा मंत्री ने कह दिया था कि जवानों की शहादत बेकार नहीं जाएगी, बस प्रधानमंत्री के आदेश का इंतजार है। और अब जब भारतीय सेना के जवानों ने चुन-चुनकर आतंकवादियों के प्रशिक्षण शिविरों को सर्जिकल स्ट्राइक्स के जरिये निशाना बनाया, तो पाक हुक्मरान को जैसे सांप सूंघ गया। वे रोज बयान बदल रहे हैं। कभी कहते हैं कि हमला हुआ ही नहीं, कभी कहते हैं, हमने भारतीय फौजियों को मार गिराया, तो कभी परमाणु बम से जवाब देने की बात कर रहे हैं। आज पाकिस्तान के दोस्त उसका साथ छोड़ चुके है। अमेरिका उसके साथ नहीं है। दक्षिण एशिया में अफगानिस्तान, बांग्लादेश, श्रीलंका उसके खिलाफ हैं। ईरान उसका साथ नहीं दे रहा। संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब और बाकी मुस्लिम देश भी पाकिस्तान के समर्थन में नहीं हैं।
पहले जब कभी सीमा पर तनाव होता था, तब दुनिया भर के देश बयान देना शुरू कर देते थे, किंतु आज सर्जिकल स्ट्राइक के बाद भी सभी देशों की ओर से सकारात्मक बयान आ रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जब दुनिया भर में संबंधों का विस्तार कर रहे थे, तब देश में कुछ लोग उन पर सवाल उठाते थे। लेकिन सर्जिकल स्ट्राइक के बाद समूचे विपक्ष ने नरेंद्र मोदी के साहस की तारीफ की है। निश्चय ही इससे देश-दुनिया में सकारात्मक संदेश गया है।