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अवैध प्रवासन: जान की कीमत पर विदेश जाने से क्या लाभ, हर समय लटकी रहती है तलवार

Subhash Chandra Kushwaha सुभाष चंद्र कुशवाहा
Updated Thu, 27 Jul 2023 07:08 AM IST
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सार
अवैध तरीके से विदेश जाने से जहां फर्जी एजेंटों द्वारा लोगों की कमाई हड़पी जाती है, वहीं जान जाने या पकड़े जाने का जोखिम भी रहता है।
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Illegal Migration people earnings grabbed by fake agent threat to life or getting caught
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : Social Media

विस्तार

हाल के वर्षों में फर्जी एजेंटों द्वारा बेरोजगार युवकों और जीवन-यापन की कठिन परिस्थितियों से मुक्ति पाने के इच्छुक लोगों को पूरे परिवार सहित दूसरे देशों में गैर-कानूनी रूप से भेजे जाने की घटनाएं प्रकाश में आई हैं। कुछ फर्जी एजेंटों की गिरफ्तारियां भी हुई हैं, क्योंकि उनके द्वारा भेजे जा रहे लोग रास्तों में अपनी जान गंवा बैठे हैं। यूरोपीय देश सर्बिया जाने के लिए दिसंबर, 2022 तक भारतीयों को पूर्व वीजा की जरूरत नहीं थी। इसका फायदा उठाते हुए फर्जी एजेंटों द्वारा बहुत से भारतीयों को सर्बिया ले जाकर ‘मंकी रूट’ से दूसरे यूरोपीय देशों में अवैध तरीके से प्रवेश करा दिया जाता था। नतीजतन एक जनवरी, 2023 से सर्बिया ने यह सुविधा खत्म कर दी।



दिसंबर, 2022 में गुजरात पुलिस ने मेहसाणा जिले से भरम पटेल उर्फ बॉबी पटेल नामक एक एजेंट को पकड़ा, जो लाखों की रकम वसूल कर फर्जी तरीके से लोगों को अमेरिका भेजा करता था। उसके पास से 94 फर्जी पासपोर्ट बरामद हुए थे। वर्ष 2022 में 16,236 भारतीयों को अवैध रूप से अमेरिका में प्रवेश करते पकड़ा गया था। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि 2021-22 में कुल 63,927 भारतीय फर्जी तरीके से अमेरिका में घुसे। वर्ष 2022 में टेक्सास की सीमा पर दीवार से गिरकर एक भारतीय की मौत हो गई। अमेरिकी पुलिस ने गुजरात पुलिस से संपर्क भी साधा, मगर फर्जी एजेंटों की गतिविधियां जारी हैं।


अप्रैल, 2023 में पंजाब के पठानकोट की पुलिस ने दो फर्जी एजेंटों को गिरफ्तार किया था, जो गैर-कानूनी रूप से बेरोजगारों को विदेश भेजकर धन की उगाही करते थे। पंजाब में विगत एक दशक में फर्जी तरीके से विदेश भेजे जाने वाले मामलों में सात गुना बढ़ोतरी देखी गई है। ज्यादातर मामलों में पीड़ित पक्ष के लोग मदद के लिए पुलिस तक जाने का साहस नहीं करते, मगर जालंधर के जगतार चंद ने अपनी बेटी को फर्जी छात्र वीजा पर विदेश भेजने के मामले में बृजेश मिश्रा नामक एक एजेंट के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी।

विगत 12 जुलाई को गुजरात की चेतन राबरी ने प्रांतिज पुलिस स्टेशन (जिला साबरकांठा) को सूचित किया कि उनके पति चार फरवरी से लापता हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि महेंद्र पटेल और जॉनी पटेल नामक दो एजेंटों ने उनके पति को अमेरिका भेजने के लिए सत्तर लाख रुपये लिए थे, लेकिन फरवरी से उनके पति का कोई अता-पता नहीं है। बाद में पता चला कि राबरी के पति सहित नौ लोगों को उन एजेंटों ने फर्जी तरीके से अमेरिका भेजा था। एक साल के अंदर केवल गुजरात में यह तीसरा मामला पुलिस के सामने आया है। अभी वे लोग कहां हैं, इसका कोई पता नहीं है। जनवरी, 2023 में चार सदस्यीय गुजराती परिवार ने कनाडा-अमेरिका सीमा पर न्यूयॉर्क के करीब लारेंज नदी की बर्फ में दबकर जान गंवा दी थी।

रोजगार की बेहतर संभावना की तलाश में लोग अमेरिका, कनाडा और अन्य देशों में काम दिलाने का वादा करने वाले फर्जी एजेंटों के शिकार बन रहे हैं। विगत वर्षों में कितने भारतीय अवैध तरीकों से विदेश गए, इनके आंकड़े जुटा पाना आसान नहीं है। चोरी-छिपे विदेश भेजे जाने की घटनाएं तभी सामने आती हैं, जब कोई दुर्घटना होती है या लोग पकड़े जाते हैं।

अवैध तरीकों से विदेश जाने की यात्राएं जोखिम भरी होती हैं। लोगों को फर्जी एजेंटों द्वारा टैंकरों, खतरनाक समुद्री रास्तों या नदी मार्गों के जरिये दूसरे देशों में अनुचित दस्तावेजों के सहारे भेज दिया जाता है। इससे एक ओर फर्जी एजेंटों द्वारा लोगों की कमाई हड़पी जाती है, दूसरी ओर या तो उनकी जान जाती है या वे पकड़ लिए जाते हैं।

मूल और गंतव्य, दोनों देशों की सरकारें अवैध प्रवासन को रोकने पर तेजी से ध्यान केंद्रित कर रही हैं। ऐसी घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए संभावित प्रवासियों को जोखिमों के बारे में शिक्षित करना, सीमा नियंत्रण उपायों को मजबूत करना और फर्जी एजेंटों पर नकेल कसने के लिए जन जागरूकता अभियान चलाने की आवश्यकता है। इसमें अंतरराष्ट्रीय सहयोग महत्वपूर्ण है।

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