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पहल : तकनीक के भाषायी अनुवाद का बड़ा कदम, उड़ान प्रोजेक्ट से अहम बदलाव की उम्मीद

Sat, 25 Mar 2023 06:31 AM IST
Umesh Chaturvedi उमेश चतुर्वेदी
Updated Sat, 25 Mar 2023 06:31 AM IST
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सार
तकनीकी पुस्तकों के अनुवाद से संबंधित आईआईटी मुंबई का उड़ान प्रोजेक्ट उच्च शिक्षा को सुगम बनाने की दिशा में बड़ा बदलाव ला सकता है।
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IIT Mumbai UDAN project related to translation of technical books can bring a big change in higher education
प्रतीकात्मक तस्वीर। - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

लालबहादुर शास्त्री को दुनिया ‘जय जवान, जय किसान’ नारे, पाकिस्तान पर भारत की गर्वीली जीत और हरित क्रांति के लिए ही जानती है। बहुत कम लोगों को यह जानकारी है कि स्वाधीन भारत में शिक्षा व्यवस्था को भारतीय भाषाओं में लाने का सपना भी शास्त्री जी ने ही देखा था। इतना ही नहीं, उन्होंने दौलत सिंह कोठारी को इसके लिए प्रेरित किया था। शिक्षा में भारतीयता और भारतीय संदर्भों में शिक्षण को लेकर स्वाधीन भारत में जिस कोठारी आयोग ने रिपोर्ट दी थी, उसके अध्यक्ष दौलत सिंह कोठारी ही थे।



उसी दौर में शास्त्री जी ने कोठारी को एक और महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी थी। ज्ञान-विज्ञान और तकनीक की जानकारियों को भारतीय भाषाओं में लाने और उनके लिए भारतीय भाषाओं का शब्दकोश तैयार करने की उस जिम्मेदारी को दौलत सिंह कोठारी ने निभाया भी। लेकिन वह पर्याप्त नहीं रहा। अब आईआईटी मुंबई ने जो प्रोजेक्ट बनाया है, कह सकते हैं कि उसके जरिये न सिर्फ शास्त्री जी का सपना पूरा होने जा रहा है, बल्कि भारतीय भाषाओं में पश्चिमी और आधुनिक ज्ञान-विज्ञान की पुस्तकों की अबाध आपूर्ति होने जा रही है।


आईआईटी मुंबई का यह प्रोजेक्ट है उड़ान, जो सात वर्षों के लंबे प्रयास के बाद जमीनी हकीकत बनने लगा है। इसके जरिये तमाम तकनीकी पुस्तकों का अनुवाद होने लगा है। 27 फरवरी को खत्म हुए दिल्ली पुस्तक मेले में आईआईटी मुंबई ने उड़ान प्रोजेक्ट का स्टाल भी लगाया था। इस प्रोजेक्ट के तहत अंग्रेजी में उपलब्ध तकनीकी ज्ञान और विज्ञान की पुस्तकों का अनुवाद होने लगा है। यह अनुवाद अभी हिंदी, मराठी, तेलुगू, कन्नड़, मलयालम, तमिल, गुजराती, उड़िया और बांग्ला में उपलब्ध है। इंटरनेट पर ऑनलाइन मौजूद इस प्रोजेक्ट के जरिये भारतीय भाषाओं से अंग्रेजी में भी अनुवाद किया जा सकता है।

हाल के दिनों में मध्य प्रदेश समेत कुछ राज्य सरकारों ने इंजीनियरिंग और मेडिकल की हिंदी में पढ़ाई शुरू की है। हिंदी समेत भारतीय भाषाओं में तकनीकी विषयों की पढ़ाई के सामने बड़ी चुनौती यह है कि आधुनिक तकनीकी ज्ञान-विज्ञान की किताबें मौजूद नहीं हैं। अचानक हिंदी माध्यम से बारहवीं तक पढ़ाई के बाद इंजीनियरिंग या मेडिकल की प्रवेश परीक्षा पास करके पढ़ाई करने जाते हैं, तो हिंदी या भारतीय भाषाओं के माध्यम की किताबें न होने की वजह से उनके सामने चुनौती बढ़ जाती है। इस तनाव में कई बार बहुमूल्य जिंदगी आत्महत्या की राह अपना लेती है।

आईआईटी मुंबई के प्रोजेक्ट में बतौर पीएचडी शोधार्थी कार्य कर रहे आयुष माहेश्वरी का कहना है कि अंग्रेजी से मलयालम के अनुवाद प्रोजेक्ट को केरल सरकार ने एक तरह से मान्यता दे दी है। केरल सरकार ने 80 से ज्यादा तकनीकी और मेडिकल पुस्तकों के अनुवाद का काम उड़ान प्रोजेक्ट को दिया है। उड़ान प्रोजेक्ट की शुरुआत सात साल पहले शुरू हुई थी। यह आईआईटी मुंबई के प्रोफेसर गणेश रामकृष्णन की दिमाग की उपज है। उन्हें इस प्रोजेक्ट के लिए प्रेरित करने में मुंबई के उद्योगपति गणेश अरनाल की बड़ी भूमिका रही। अरनाल से पुस्तक मेला में मुलाकात हुई थी। इस मुलाकात के दौरान गणेश अरनाल ने कहा था कि तब उन्होंने अपने नाम राशि प्रोफेसर गणेश से इस प्रोजेक्ट के लिए आर्थिक सहयोग उपलब्ध कराने का भी प्रस्ताव रखा था।

इस प्रोजेक्ट से जुड़े प्रवीण इंगले और आयुष माहेश्वरी के अनुसार, उड़ान प्रोजेक्ट के जरिये सिर्फ तकनीकी पुस्तकों का ही अनुवाद ज्यादा बेहतर होता है। साहित्यिक रचनाओं के अनुवाद में यह प्रोजेक्ट उतना सफल नहीं है। आयुष माहेश्वरी के मुताबिक, प्रोफेसर गणेश का ध्यान गया कि जापान को करीब एक दर्जन नोबेल पुरस्कार मिले हैं, और सभी पुरस्कार विजेताओं की पढ़ाई का माध्यम जापानी ही रही है। इतना ही नहीं, वे जापानी में ही काम करते रहे हैं। तब प्रोफेसर गणेश को लगा कि क्यों न भारतीय भाषाओं में भी उच्च शिक्षण की दिशा में आगे बढ़ने के लिए काम किया जाए। फिर उन्हें गणेश अरनाल मिले। इसके बाद तो प्रोफेसर गणेश रामचंद्रन ने अपने सारे घोड़े खोल दिए। जिसका नतीजा उड़ान प्रोजेक्ट है। उड़ान प्रोजेक्ट ऑनलाइन https://udaanproject.org नाम से इंटरनेट पर है।   

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