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स्वभाव: बेबुनियाद विचार खुशियों को नष्ट करता है... बेकार की बातें न सोचें; वापस लौट आएगा शांति, प्रेम और आनंद
Tue, 22 Oct 2024 08:12 AM IST
ज्योति भास्कर
चार्ल्स डार्विन
चार्ल्स डार्विन
Published by: ज्योति भास्कर
Updated Tue, 22 Oct 2024 08:12 AM IST
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अमर उजाला / एएनआई
विस्तार
जब मैं बहुत छोटा था, तो मुझे याद है कि मैं बगीचे से सेब चुराता था, ताकि उन्हें उन लड़कों और युवकों को दे सकूं, जो पास ही एक झोपड़ी में रहते थे। लेकिन उन्हें फल देने से पहले मैं दिखावा करता था कि मैं कितना तेज दौड़ सकता हूं और यह आश्चर्यजनक है कि मुझे यह नहीं पता था कि मेरे दौड़ने की शक्ति पर जो आश्चर्य और प्रशंसा उन्होंने व्यक्त की थी, वह सेबों के लिए थी। लेकिन मुझे अच्छी तरह याद है कि मैं उनके यह कहने पर बहुत खुश हुआ था कि उन्होंने कभी किसी लड़के को इतनी तेज दौड़ते नहीं देखा!शाम को मेरे पिता मुझे कई छोटी-छोटी बातें बताते थे, जो उन्हें अपनी चिकित्सा पद्धति में उपयोगी लगती थीं। पिता जी के पास अक्सर कई लोग आते थे। पिता जी कहते थे कि लोग अपनी परेशानियां बताने के लिए आते हैं। लेकिन वे लोग सही समस्याओं पर बात न करके उनका कीमती समय बर्बाद करते थे। मुझे याद है, उन्होंने कहा था कि एक बेबुनियाद विचार भयंकर भूकंप की तरह ही जीवन से खुशियों को नष्ट कर देता है। हमारे जीवन के हर सेकंड में ये बेबुनियादी विचार मन में असुरक्षा उत्पन्न कर देते हैं। अज्ञानता अक्सर ज्ञान की तुलना में आत्मविश्वास पैदा करती है। ये वे लोग हैं, जो बहुत कम जानते हैं, और इतने सकारात्मक रूप से दावा करते हैं, मानो आखिरी सत्य इन्हीं के पास हो। हर कोई अपने झूठ को सही साबित करने में खुशी महसूस करता है। लेकिन झूठे तथ्य विज्ञान और जीवन की प्रगति के लिए बहुत हानिकारक है, क्योंकि अक्सर झूठ लंबे समय तक टिके रहते हैं। इसलिए हमें युवाओं को अच्छी शिक्षा के लिए प्रेरित करते रहना चाहिए, ताकि उनके मस्तिष्क में प्रभावशाली और उच्च विचार पैदा हो सकें।
मैंने शुरू से और लगातार अपने मन को मुक्त रखने का प्रयास किया है, ताकि किसी भी परिकल्पना या किसी ने कुछ कहा, चाहे वह कितनी भी प्रिय बात क्यों न हो, मैं उस परिकल्पना और उस बात को देखता हूं और जैसे ही वह परिकल्पना और व्यक्ति की बात तथ्य के विपरीत दिखाई देती है, मैं उससे दूर हो जाता हूं। मैं तथ्यों का अवलोकन करने और निष्कर्ष निकालने वाली मशीन में बदल गया हूं। मुझे लगता है कि एक नैतिक व्यक्ति वह है, जो अपने पिछले कार्यों और उनके उद्देश्यों पर विचार करने में सक्षम हो, जिसे पता हो कि किन विचारों को स्वीकार करना है और किन्हें अस्वीकार करना है। हमें सीखने की प्रवृत्ति को मजबूत करने की आवश्यकता है। आपने छोटे बच्चों को देखा होगा, वे बड़बड़ाते हैं, क्योंकि मनुष्य में बोलने की सहज प्रवृत्ति होती है। लेकिन किसी भी बच्चे में खाना पकाने, पढ़ने और लिखने की सहज प्रवृत्ति नहीं होती है। इसलिए हमें नई चीजों को सीखने के लिए उत्सुक रहना चाहिए। जो लोग अपने हिस्से का समय बर्बाद करते हैं, वे अपने जीवन का मूल्य खो देते हैं।
सूत्र: बेकार की बातें न सोचें
सोच ही हमारी भावनाओं का मूल कारण है। बस, इस बात से अवगत हो जाएं कि यह आपकी सोच ही है, जो बुरी भावनाओं का कारण बन रही है, इसका प्यार से स्वागत करें, और यह धीरे-धीरे आपकी आंखों के सामने गायब हो जाएगी। कुछ ही समय बाद, आप शांति, प्रेम और आनंद की अपनी स्वाभाविक स्थिति में वापस आ जाएंगे।