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किस-किस को जवाब दूं?

Wed, 16 Sep 2015 06:49 PM IST
अभिषेक मेहरोत्रा
अभिषेक मेहरोत्रा Updated Wed, 16 Sep 2015 06:49 PM IST
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How much i do reply

बड़ा ही अजीब जमाना आ गया है। अभी तक तो सिर्फ अपने बापू ही अपुन से आने-जाने से लेकर खर्च-जमा का हिसाब पूछते थे। पर जब से ‘नेशन वांट टू नो’ का चलन चला है, अपुन तो बड़ी मुश्किल में आ गए हैं। अब तो घर का बच्चा भी घड़ी-घड़ी सवाल पूछता है और आंख दिखाओ, तो टका-सा जवाब देता है कि टीवी नहीं देखते क्या, आजकल सवाल पूछने का चलन जोरों पर है।

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इससे तो लगता है कि टीवी पर फिर से वह रामायण वाला युग ही आ जाए, तो बेहतर है। बच्चों को न्यूज देखने की सलाह देकर मैं उनका गेस्ट कम टारगेट ज्यादा बन गया हूं। अब घर का हर शख्स एंकर-सा लगता है। कल तो हद ही हो गई, जब बच्चों को पिज्जाई टेस्ट से दूर करने के लिए मालपुए बनाने के लिए घर की सीनियर मोस्ट एंकर की तरह व्यवहार करने वाली श्रीमतीजी से कहा। इस पर आज के जुकरबर्गीय बच्चों ने सबसे पहले यही सवाल दाग दिया कि नेशन वांट्स टू नो, ह्वाट इज मालपुआ। गूगल बाबा की मदद से मैंने उन्हें मालपुआ के फोटो के दर्शन करा दिए, वरना ये ट्विटर पर ट्रेंड करके हमारी तो बेइज्जती कर देते।
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मगर जब फेसबुक पर मैंने फीलिंग हैप्पी, ईटिंग मालपुआ लिखा, तो मालपुआ न पहचानने वाले कितने पिज्जुओं को इसका टेस्ट भी कराना पड़ा। हमारे आधे मालपुए तो नेशन को समझाने-चखाने में ही निपट गए। कुछ महीनों से बच्चों के जल्दी सोने से उनके सनसनी टाइप सवालों से जरूर बच जाते हैं। पर ये जो नए ठुमकने वाले प्रोग्राम दिन भर चलते हैं, इनकी नई-नई नृत्य शैलियों पर दागे जा रहे सवालों से आजकल हम घायल हो रहे हैं। हमने तो घर में टीवी इसलिए लगवाया था कि सबका मन लगे और ज्ञान बढ़े, पर अब तो इसके चलते हमारे ही ज्ञान की रोज टेस्टिंग होती रहती है। बस सहारा है, तो गूगल महाराज का।
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तो भैया, अगली बार तो हम उस डीटीएच कंपनी का कनेक्शन लेंगे, जिसमें सवाल दागते टीवी वाले लोग कम दिखें। नहीं तो घर में एंकर बने मेरे बच्चे कहीं इतने ग्रूम न कर जाएं कि नेशनल से यूनिवर्सल तक के सवाल अपुन पर ही दागते रहें।

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