{"_id":"02218069653fffa9d39106b527a018b1","slug":"how-many-changes","type":"story","status":"publish","title_hn":"कितना कुछ बदल गया है!","category":{"title":"Opinion","title_hn":"नज़रिया ","slug":"opinion"}}
कितना कुछ बदल गया है!
दिलीप गुप्ते
Updated Tue, 18 Mar 2014 06:35 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सीरियल के बीच विज्ञापन आता है। दृश्य एकः नायक कार में बैठकर बेटे से कहता है, चलो विट्ठल काका के खेत। उनके भुट्टे खाने हैं, बड़े मीठे होते हैं।
विज्ञापन
दृश्य दोः कार एक जगह रुकती है। वहां मॉल खड़ा है। कारें आ रही हैं। फैशनेबल महिलाएं आकर्षक कैरीबैग लिए दिख रही हैं। नायक पास खड़े रिक्शे वाले से पूछता है कि खेत कहां गए। रिक्शे वाला कहता है, कौन से खेत, मैं यहां नौ साल से रिक्शा चला रहा हूं, खेत कभी नहीं देखा। नायक दूसरे से पूछता है। 'अरे आप उस विट्ठलया की बात कर रहे हैं? उसने तो आत्महत्या कर ली। तीन साल से सूखा पड़ा था। लगता है, आप लंबे समय बाद आए हैं।' दूसरे ने कहा।
विज्ञापन
दृश्य तीनः नायक रास्ते में कहता है, चलो कुछ चरपरा हो जाए। गोपीलाल का होटल पड़ोस में ही है। वहीं चलते हैं। अरे वही गोपीलाल का श्रीकृष्ण होटल, जहां तुम्हंे सबसे पहले कचौड़ी खिलाई थी।
विज्ञापन
दृश्य चारः कार रुकती है। नायक बाहर आता है। इधर-उधर देखता है। वहां पांच सितारा होटल देखकर चकित रह जाता है। पास के जूता पालिश करने वाले से गप्पूलाल पॉलिश वाले के बारे में पूछता है, जिसने सड़क पर पड़े पचास हजार रुपये लौटा दिए थे और जिसका सम्मान मंत्री ने किया था। जवाब मिलता है कि उसे तो मंत्री के कुछ लोगों ने ही मार-पीट कर भगा दिया। नायक फिर गोपीलाल के होटल के बारे में पूछता है। जवाब मिलता है, वह तो कब का तोड़ दिया गया। किसी बड़ी पार्टी ने उसे खरीद लिया। अब यहां कचौड़ी नहीं, पिज्जा मिलता है।
दृश्य पांचः नायक कहता है, चलो मेरे स्कूल चलते हैं। वहां बताएंगे कि सरकारी स्कूल में पढ़ा तुम्हारा बाप विदेशों में नाम कमा रहा है। पर वहां अब किसी कॉलेज की आलीशान इमारत खड़ी है। इस बीच, बेटा मोबाइल पर मां को बताता है कि पता नहीं, पापा को क्या हो गया है। जो है ही नहीं, वह जगह ढूंढ़ रहे हैं।
दृश्य छहः नायक को पत्नी जगा रही है। नायक जागकर मुग्ध होकर कह रहा है कि दस साल में कितना कुछ बदल गया है। पुरानी घिसी-पिटी चीजें फेंक दी हैं, और नया भारत खड़ा किया जा रहा है।