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आखिर एफएटीएफ से कब तक बचेगा पाकिस्तान

Wed, 09 Jun 2021 04:25 AM IST
केएस तोमर के एस तोमर
के एस तोमर Published by: केएस तोमर Updated Wed, 09 Jun 2021 04:25 AM IST
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How long will Pakistan survive FATF?
इमरान खान - फोटो : एएनआई

एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम में, फाइनेंशियल ऐक्शन टास्क फोर्स (एफएटीएफ) के मनी लॉन्ड्रिंग और प्रायोजित आतंकवाद से संबंधित एशिया पैसिफिक ग्रुप(एपीजी) ने पांच जून को पाकिस्तान को 'एनहेंस्ड फॉलोअप लिस्ट' यानी निगरानी सूची में बरकरार रखा है। वैश्विक आतंकी निगरानी निकाय की अगले हफ्ते होने वाली बैठक में इस पर चर्चा की जाएगी कि पाकिस्तान को ग्रे लिस्ट में रखा जाए या ब्लैक लिस्ट में शामिल किया जाए। एफएटीएफ के क्षेत्रीय सहयोगी एपीजी द्वारा जारी पाकिस्तान के पारस्परिक मूल्यांकन की दूसरी फॉलोअप रिपोर्ट में  भी एक मानदंड पर पाकिस्तान का दर्जा नीचे गिराया गया है। एपीजी ने पाया कि पाकिस्तान ने पांच मामलों में अनुपालन किया है, 15 अन्य मामलों में अनुपालन की दिशा में काम कर रहा है, जबकि एक मामले में उसने आंशिक अनुपालन किया।


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एपीजी ने साफ कर दिया है कि पाकिस्तान निगरानी में रहेगा और उसे मनी लॉन्ड्रिंग विरोधी व आतंकवाद के वित्तपोषण से निपटने के उपायों के  कार्यान्वयन को मजबूत करने से संबंधित प्रगति रिपोर्ट भेजना जारी रखना होगा। रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि पाकिस्तान ने अपनी पारस्परिक मूल्यांकन रिपोर्ट में पहचानी गई तकनीकी अनुपालन कमियों को दूर करने में
प्रगति की है और 22 सिफारिशों पर उसका फिर से मूल्यांकन किया गया है। इस निराशाजनक परिदृश्य में आतंक के वित्तपोषण और प्रायोजित करने के अपमान और कलंक को दूर करने के लिए, जिसके चलते इस साल फरवरी में उसे ग्रे लिस्ट में शामिल किया गया था, पाकिस्तान ने आखिरी कोशिश करते हुए कुछ सतही और छद्म आतंकवाद विरोधी उपाय किए हैं, ताकि वह एफएटीएफ की संभावित कड़ी कार्रवाई से बच निकले। एफएटीएफ ने उसे अपनी सरजमीं से आतंकी समूहों को समर्थन और संरक्षण देने सहित पूर्व शर्तों का पालन करने के लिए जून की समय सीमा दी है।

तय कार्यक्रम के अनुसार, एफएटीएफ का मूल्यांकन और अनुपालन समूह 14 जून से वर्चुअल बैठकें करना शुरू कर देगा, जबकि जोखिम, रुझान और विधियों का समूह पूरे घटनाक्रम पर नजर रखेगा। एफएटीएफ के एशिया-प्रशांत संयुक्त समूह (ए-पीजेजी) की अगली महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक पोस्ट ऑब्जर्वेशन पिरीयड रिपोर्ट (पीओपीआर) में निहित सिफारिशों से संबंधित पाकिस्तान के अनुपालन की जांच होगी। इससे अंततः पाकिस्तान की प्रगति पर आगे की कार्रवाई का फैसला होगा कि उसे ग्रे लिस्ट से बाहर निकाला जाए या ब्लैक लिस्ट में डाल दियाजाए। इसी पर पाकिस्तान को विश्व बैंक और एशियाई बैंक आदि से मिलने वाली वित्तीय सहायता टिकी है। 

एफएटीएफ की पिछली वर्चुअल बैठक 21 फरवरी से 26  फरवरी, 2021 तक हुई थी और पाकिस्तान को ब्लैक लिस्ट में शामिल नहीं किया गया था, जबकि वहां के सुप्रीम कोर्ट ने 2002 में अमेरिकी पत्रकार डेनियल पर्ल की हत्या के आरोपी उमर सईद शेख को बरी कर दिया, जिससे नाराज बाइडन प्रशासन ने इसे गंभीरता से लिया था। पाकिस्तान को हाल ही में तब एक बड़ा झटका लगा, जब ब्रिटेन ने पाकिस्तान द्वारा आतंकवाद एवं उसके वित्तपोषण विरोधी उपायों पर सवाल उठाया और उसे उच्च जोखिम वाले 21 देशों की सूची में शामिल किया, हालांकि पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने इसका खंडन करते हुए कहा कि ब्रिटेन का आकलन तथ्यों पर आधारित नहीं था। 

एफएटीएफ की आगे की सख्त कार्रवाई से बचने के लिए इमरान खान सरकार ने फरवरी, अक्तूबर, 2020 और फरवरी, 2020 में फॉलोअप रिपोर्ट पेश की थी। विशेषज्ञों का कहना है कि एपीजी द्वारा केवल एक रिपोर्ट को स्वीकार किया गया था, जिसमें पाकिस्तान को 'आंशिक रूप से अनुपालन' से 'अनुपालन' के लिए सिफारिश संख्या 29 (वित्तीय खुफिया इकाई) में फिर से मूल्यांकित किया गया था। शेष दो फॉलोअप रिपोर्ट में पाकिस्तान ने 27 सिफारिशों में पुन: मूल्यांकन के लिए अनुरोध किया था, जिसकी समीक्षा समूहों द्वारा की जाएगी।  एफएटीएफ की सिफारिशों के अनुपालन का पाकिस्तान का दावा पूरी तरह सही नहीं  पाया गया, जिसे पहले 'आंशिक रूप से अनुपालन' और 'गैर-अनुपालन' का दर्जा दिया गया था। एफएटीएफ के शेष मानक हासिल करने के लिए हताश होकर पाकिस्तान सरकार ने हाल ही में एंटी-मनी लॉन्ड्रिंग (एएमएल) मामलों से संबंधित संपत्तियों की जब्ती, प्रबंधन और नीलामी तथा एएमएल की जांच पुलिस से लेकर प्रांतीय भ्रष्टाचार विरोधी प्रतिष्ठानों और अन्य समान एजेंसियों व विशेष एजेंसियों को हस्तांतरित करने के लिए नए नियमों को मंजूरी दी है। एंटी-मनी लॉन्ड्रिंग ऐक्ट, 2010 की मौजूदा अनुसूची में कुछ बदलावों के लिए ये नियम और संबंधित अधिसूचनाएं तुरंत लागू हो जाएंगी और कार्यान्वयन के लिए प्रशासकों और विशेष लोक अभियोजकों की नियुक्ति की जाएगी। 

विशेषज्ञों का मानना है कि एफएटीएफ से उम्मीद है कि वह निष्पक्ष रूप से जून की समय सीमा से पहले ऐसे उपाय करने के पाकिस्तान के इरादों और मकसद का आकलन करे, जो 27 में से तीन बकाया मानकों का अनुपालन चाहता था। अमेरिकी विदेश विभाग द्वारा  जारी 2019 की कंट्री रिपोर्ट के कारण भी पाकिस्तान मुश्किल में पड़ सकता  है, जिसने यह निष्कर्ष निकाला था कि पाकिस्तान अब भी अन्य क्षेत्रीय  आतंकवादी समूहों के लिए सुरक्षित पनाहगाह बना हुआ है। इसमें कहा गया है कि पाकिस्तान ने अफगानिस्तान को लक्षित करने वाले समूहों को अपने क्षेत्र से आतंकी गतिविधियां संचालित करने की अनुमति दी, जिसमें अफगान तालिबान और संबद्ध हक्कानी समूह, भारत पर निशाना साधने वाले समूह, जिनमें लश्कर और उससे संबद्ध संगठन और जैश-ए-मोहम्मद शामिल हैं। 

गेटवे हाउस में अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा अध्ययन के फेलो समीर पाटिल ने कहा कि पाकिस्तान आतंकवादी समूहों पर कार्रवाई का एक दिखावा कर रहा है, जो सच्चाई के विपरीत है, क्योंकि इसने एफएटीएफ की पूर्ण बैठक से हफ्तों पहले इन उपायों की शुरुआत की थी, जिसने एफएटीएफ को धोखा देने के इसके इरादे को साबित कर दिया था, ताकि यह विश्वास हो जाए कि यह कार्य योजना के शेष मुद्दों पर कार्य कर रहा है। ग्रीक सिटी टाइम्स ने बताया है कि पाकिस्तान को अब भी एफएटीएफ की ब्लैक
लिस्ट का खतरा है, क्योंकि वह आतंकवाद को वित्तपोषित करना जारी रखे हुए है।

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