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लड़नी पड़ेगी ये लड़ाई भी

Sun, 21 Sep 2014 07:28 PM IST
Updated Sun, 21 Sep 2014 07:28 PM IST
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hindi poem ladni padegi ye ladai.

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गरज होगी जिन्हें वो तख्ते-सुलतानी बचायेंगे!
हमारी फिक्र है कुछ और, हम पानी बचायेंगे!
सहूलत के लिए अपनी नई नस्लों के, मर-मर के
कई-चीजें-बहुत से लोग-बेमानी बचायेंगे!

लुभाती है जिन्हें हर वक्त इंटरनेट की दुनिया
भला कब तक वो बच्चे अपनी नादानी बचायेंगे!
हमें ही, साथियों, लड़नी पड़ेगी ये लड़ाई भी
गलतफहमी है कि नदियों को 'अम्बानी' बचायेंगे!
शहर चाहे उन्हें कुछ दे, न दे इसके इवज लेकिन
शहरवालों की खातिर गांव गुड़धानी बचायेंगे!
बचाकर ढेर-सारी दौलतें भी क्या करेंगे हम
बचानी है तो कोई चीज लाफानी बचायेंगे!
-शशि प्रेमदेव



कदमों को ध्यान से सुनना
खुश्क मौसम के बयानों को ध्यान से सुनना,
जर्द पत्तों के तरानों को ध्यान से सुनना।
घर की चीजों को जवानी में बांटने वालों,
घर के बूढ़ों की कराहों को ध्यान से सुनना।
वक्त के साथ न बदले तो कहां जाओगे,
वक्त के मूक तकाजों को ध्यान से सुनना।
जिंदगी-मौत का संगीत यहां पाओगे,
उठती-गिरती हुई मौजों को ध्यान से सुनना।
लोग ठहरे हैं, सरे-राह कुछ हुआ होगा,
राह चलते हुए कदमों को ध्यान से सुनना।
कैसे सूरज हरेक को दिखा रहा आंखंे,
उसकी आंखों के इरादों को ध्यान से सुनना।

-राकेश भ्रमर
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