{"_id":"5bf55d97bdec22696c1d2e8f","slug":"high-aim-of-business-facilitation","type":"story","status":"publish","title_hn":"कारोबार सुगमता का ऊंचा लक्ष्य","category":{"title":"Opinion","title_hn":"नज़रिया","slug":"opinion"}}
कारोबार सुगमता का ऊंचा लक्ष्य
जयंतीलाल भंडारी
Updated Wed, 21 Nov 2018 06:58 PM IST
विज्ञापन
निरंतर एक्सेस के लिए सब्सक्राइब करें
जयंतीलाल भंडारी
विगत 19 नवंबर को प्रमुख उद्योगपतियों और नीति निर्माताओं के साथ अहम बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वैश्विक कारोबार सुगमता रैंकिंग में शीर्ष 50 देशों में स्थान पाने का अत्यधिक चुनौतीपूर्ण लक्ष्य सुनिश्चित किया है। इस ऊंचे लक्ष्य को पाने के लिए कारोबार के कई मापदंडों पर आगे बढ़ना होगा। वर्ष 2018 में कारोबारी सुगमता की वैश्विक रैंकिंग में 190 देशों की सूची में भारत 77वें स्थान पर आ गया है। जबकि पिछले साल भारत 100वें स्थान पर था। पिछले चार साल में भारत की रैंकिंग में 65 पायदान का सुधार हुआ है।
विश्व बैंक द्वारा कारोबार सुगमता के मूल्यांकन के लिए निर्धारित 10 पैमानों में से छह-परमिट, सीमापार व्यापार, कारोबार की सरल शुरुआत, ऋण तक सरल पहुंच, बिजली की उपलब्धता तथा कर एवं दिवालिया संहिता-में सुधार होने के कारण भारत ने कारोबारी सुगमता में लंबी छलांग लगाई है। दूसरे पैमाने पर आगे बढ़ना अब जरूरी है। इसके लिए देश की अर्थव्यवस्था को अधिक प्रतिस्पर्धी बनाना होगा और कई आर्थिक बाधाएं पार करनी होंगी।
मैन्यूफैक्चरिंग सेक्टर की अहम भूमिका बनानी होगी, मेक इन इंडिया योजना को गतिशील करना होगा और ढांचागत सुधारों पर भी जोर देना होगा, ताकि निर्यातोन्मुखी विनिर्माण क्षेत्र को गति मिल सके। इससे देश में आर्थिक एवं कारोबारी विकास की नई संभावनाएं आकार ग्रहण कर सकती हैं। मेक इन इंडिया की सफलता के लिए प्रशिक्षित युवाओं की कमी तो पूरी करनी ही होगी, विश्व बाजार में भारत के कौशल प्रशिक्षित युवाओं की मांग पूरी करने के लिए भी कौशल प्रशिक्षण के रणनीतिक प्रयास जरूरी होंगे।
कारोबारी सुगमता के लिए सरकारी क्षमताओं का अधिक उपयोग करना होगा तथा उद्योग-कारोबार के सामने आ रही जीएसटी संबंधी उलझनें दूर करनी होंगी। वित्तीय और औद्योगिक संस्थाओं को मजबूती देने, वित्तीय प्रणाली को सरल बनाने औरे उद्योग-व्यापार में नवाचार को प्रोत्साहन देने की आवश्यकता है। अर्थव्यवस्था में नौकरशाही का हस्तक्षेप भी कम करना चाहिए।
विश्व बैंक की कारोबार सुगमता रैंकिंग के लिए चूंकि कुछ बड़े कारोबारी शहरों को चुनकर निष्कर्ष तैयार किए जाते हैं, ऐसे में, छोटे शहरों में कारोबार की बाधाएं दूर करने के लिए राज्य सरकारों को पहल करनी पड़ेगी।
देश और दुनिया के विशेषज्ञों का कहना है कि कारोबार सुगमता में आगे बढ़ने के लिए भारत को निवेश रेटिंग में सुधार करने के लिए भी जोरदार प्रयास करने होंगे। वैश्विक रेटिंग एजेंसी फिच ने वृहद आर्थिक मोर्चे पर जोखिमों को देखते हुए विगत 15 नवंबर को भारत की रेटिंग बीबीबी ऋणात्मक ही बनाए रखी है। यह निवेश की श्रेणी में सबसे नीचे की रेटिंग है।
भूमि रिकॉर्ड के डिजिटलीकरण और देश भर के लिए एक समान भूमि कानून लाए जाने से भूमि अधिग्रहण में सहूलियत होगी और उससे कारोबार सुगमता को गति मिलेगी। ठेका व्यवस्था लागू करना एक और क्षेत्र है, जहां कारोबार सुगमता के मद्देनजर भारत और सुधार कर सकता है। देश भर में वाणिज्यिक न्यायालय की स्थापना से संबंधित बड़ा सुधार भी कारोबार सुगमता के लिए लाभप्रद होगा। वस्तु एवं सेवा कर व्यवस्था के तहत निर्यात रिफंड समय पर दिए जाने से कारोबार सुगमता बढ़ेगी। ये तमाम कदम अविलंब उठाए जाएं, तभी भारत कारोबार सुगमता में शीर्ष 50 देशों की सूची में आ सकेगा।
आगे पढ़ने के लिए लॉगिन या रजिस्टर करें
अमर उजाला प्रीमियम लेख सिर्फ रजिस्टर्ड पाठकों के लिए ही उपलब्ध हैं
अमर उजाला प्रीमियम लेख सिर्फ सब्सक्राइब्ड पाठकों के लिए ही उपलब्ध हैं
फ्री ई-पेपर
सभी विशेष आलेख
सीमित विज्ञापन
सब्सक्राइब करें
विश्व बैंक द्वारा कारोबार सुगमता के मूल्यांकन के लिए निर्धारित 10 पैमानों में से छह-परमिट, सीमापार व्यापार, कारोबार की सरल शुरुआत, ऋण तक सरल पहुंच, बिजली की उपलब्धता तथा कर एवं दिवालिया संहिता-में सुधार होने के कारण भारत ने कारोबारी सुगमता में लंबी छलांग लगाई है। दूसरे पैमाने पर आगे बढ़ना अब जरूरी है। इसके लिए देश की अर्थव्यवस्था को अधिक प्रतिस्पर्धी बनाना होगा और कई आर्थिक बाधाएं पार करनी होंगी।
मैन्यूफैक्चरिंग सेक्टर की अहम भूमिका बनानी होगी, मेक इन इंडिया योजना को गतिशील करना होगा और ढांचागत सुधारों पर भी जोर देना होगा, ताकि निर्यातोन्मुखी विनिर्माण क्षेत्र को गति मिल सके। इससे देश में आर्थिक एवं कारोबारी विकास की नई संभावनाएं आकार ग्रहण कर सकती हैं। मेक इन इंडिया की सफलता के लिए प्रशिक्षित युवाओं की कमी तो पूरी करनी ही होगी, विश्व बाजार में भारत के कौशल प्रशिक्षित युवाओं की मांग पूरी करने के लिए भी कौशल प्रशिक्षण के रणनीतिक प्रयास जरूरी होंगे।
कारोबारी सुगमता के लिए सरकारी क्षमताओं का अधिक उपयोग करना होगा तथा उद्योग-कारोबार के सामने आ रही जीएसटी संबंधी उलझनें दूर करनी होंगी। वित्तीय और औद्योगिक संस्थाओं को मजबूती देने, वित्तीय प्रणाली को सरल बनाने औरे उद्योग-व्यापार में नवाचार को प्रोत्साहन देने की आवश्यकता है। अर्थव्यवस्था में नौकरशाही का हस्तक्षेप भी कम करना चाहिए।
विश्व बैंक की कारोबार सुगमता रैंकिंग के लिए चूंकि कुछ बड़े कारोबारी शहरों को चुनकर निष्कर्ष तैयार किए जाते हैं, ऐसे में, छोटे शहरों में कारोबार की बाधाएं दूर करने के लिए राज्य सरकारों को पहल करनी पड़ेगी।
देश और दुनिया के विशेषज्ञों का कहना है कि कारोबार सुगमता में आगे बढ़ने के लिए भारत को निवेश रेटिंग में सुधार करने के लिए भी जोरदार प्रयास करने होंगे। वैश्विक रेटिंग एजेंसी फिच ने वृहद आर्थिक मोर्चे पर जोखिमों को देखते हुए विगत 15 नवंबर को भारत की रेटिंग बीबीबी ऋणात्मक ही बनाए रखी है। यह निवेश की श्रेणी में सबसे नीचे की रेटिंग है।
भूमि रिकॉर्ड के डिजिटलीकरण और देश भर के लिए एक समान भूमि कानून लाए जाने से भूमि अधिग्रहण में सहूलियत होगी और उससे कारोबार सुगमता को गति मिलेगी। ठेका व्यवस्था लागू करना एक और क्षेत्र है, जहां कारोबार सुगमता के मद्देनजर भारत और सुधार कर सकता है। देश भर में वाणिज्यिक न्यायालय की स्थापना से संबंधित बड़ा सुधार भी कारोबार सुगमता के लिए लाभप्रद होगा। वस्तु एवं सेवा कर व्यवस्था के तहत निर्यात रिफंड समय पर दिए जाने से कारोबार सुगमता बढ़ेगी। ये तमाम कदम अविलंब उठाए जाएं, तभी भारत कारोबार सुगमता में शीर्ष 50 देशों की सूची में आ सकेगा।