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सो चुके हैं उसके ख्वाब
ममता बनर्जी
Updated Sat, 13 Apr 2013 10:28 PM IST
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राजनीति से वक्त चुराकर कभी कविता तो कभी पेंटिंग करने वाली ममता बनर्जी का यह एक नया चेहरा है, जो ‘अर्थसॉन्ग’ के रूप में सामने आया है। रोली बुक्स से आई इस किताब में उनकी 57 कविताएं और चित्र शरीक हैं। ये शब्द और रंग शायद लोगों से चाहते हैं कि इन्हें राजनीति से परे रखकर पढ़ा और परखा जाए। किताब से ही एक कविता ‘गुलाब’ का अंग्रेजी से हिंदी में अनुवाद किया है
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हिमानी दीवान ने।
गुलाब को देखो
कांटों के बीच मुस्कुराता हुआ
सुबह और शाम को
अपनी महक से सराबोर करता हुआ
बेहद मग्न होकर खिलता है
तुम्हें क्या लगता है वह जानता होगा
अपने बारे में ये सब?
वह नहीं जानता और हम भी नहीं।
हमारे लिए जिंदगी क्या है
दुख, पीड़ा और खुशी
से गूंथा हुआ आज और कल
लेकिन गुलाब के लिए
ऐसा नहीं है
कोई आंसू नहीं है
क्या लगता है वह जानता होगा यह सब?
वह नहीं जानता और हम भी नहीं।
वह कांटों से घिरा रहता है
उसके ख्वाब सो चुके हैं
उसे तोड़ा जाता है
जड़ से उखाड़ा भी जाता है
मगर वह और भी भीतर तक
गहराई से भरा दिखाई देता है।
कोंपल खिलती हैं
पंखुड़ियां खुलती हैं
गहराई तक समाई उसकी खूबसूरती
सामने आती है
हम आश्चर्य से भरकर इस खूबसूरती की
तरह-तरह से तारीफ करते हैं
और तब हम भूल जाते हैं कांटों को
लेकिन गुलाब नहीं भूलता।