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इस जज्बे को सलाम

Thu, 23 Feb 2017 07:27 PM IST
मरिआना बाबर
मरिआना बाबर Updated Thu, 23 Feb 2017 07:27 PM IST
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Hats off to the spirit
मरिआना बाबर

ओ लाल मेरी पत रखियो बला झूले लालन/ सिंदरी दा शेहवान दा, सखी शहबाज कलंदर/ दमादम मस्त कलंदर/ अली दम दम दे अंदर/ चार चराग तेरे बालन हमेशा/ पंजवा मैं बालन आई बला झूले लालन।

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(ओ झूलेलाल, मेरे सम्मान की रक्षा करो, ओ सिंधियों और शहवानों के दोस्त, ओ मदहोश कलंदर, तुम्हारी हर सांस में नशा है, हर सांस में खुदा है, चार चिराग तो तुम्हारी दरगाह पर हमेशा जलते रहते हैं, मैं पांचवां चिराग जलाने आई हूं, ओ झूलेलाल।)
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शहवान शरीफ में शहबाज कलंदर की दरगाह की सफेद संगमरमर वाली फर्श अब भी कुछ दिनों पहले हुए भयावह आतंकी हमले के कारण खून के दाग से रंगी हुई है। लेकिन यह हमला शीमा करमानी को केसरिया रंग के कुर्ते के साथ सिंधी अजरक लहंगा पहनकर दरगाह के परिसर में नाचने से नहीं रोक सका। यही नहीं, इस इलाके के क्षेत्रीय लोकगायक भी ढोल बजाते हुए शहबाज कलंदर की स्तुति कर रहे थे।
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शीमा करमानी विश्वप्रसिद्ध शास्त्रीय नृत्यांगना हैं। दुनिया ने देखा कि कैसे एक पाकिस्तानी औरत ने आतंकियों को संदेश दिया कि तुम सिर्फ हत्या कर सकते हो, पर हम हमेशा 'धमाल' में नाचते रहेंगे और कोई भी ताकत हमें रोक नहीं सकती।

जमातुल अहरार आतंकी संगठन तहरीक-ए तालिबान से अलग हुआ एक गुट है, हालांकि दोनों आतंकी संगठन अफगानिस्तान में पनाह लिए हुए हैं। जब पाकिस्तानी सेना ने दक्षिण एवं उत्तर वजीरिस्तान में अपना ऑपरेशन चलाया, तो ये आतंकी भागकर अफगानिस्तान चले गए। अब वे दोनों एक साथ मिल गए हैं और पाकिस्तान के भीतर के अपने सुषुप्त पड़े गुटों की मदद से एक बार फिर आतंकी हमले शुरू कर चुके हैं।

रणनीतिक विश्लेषक जाहिद हुसैन बताते हैं, 'ताजा हमले के लिए जिम्मेदार जमातुल अहरार पाकिस्तान का सबसे बड़ा और घातक आतंकी संगठन है। यह अभी अफगान सीमा से अपनी गतिविधियों को अंजाम दे रहा है। इस्लामिक स्टेट के प्रति निष्ठा जताकर इस आतंकी समूह ने हालात को और खतरनाक बना दिया है।'

धमाल एक उन्मादपूर्ण आध्यात्मिक नृत्य है, जिसका प्रदर्शन शहबाज कलंदर अपने जीवन में करते थे। धमाल नगाड़े की थाप पर मगरीब की नमाज (सूर्यास्त के तुरंत बाद का नमाज) के बाद किया जाता है। करमानी, जो अपने नृत्य का इस्तेमाल एक्टिविज्म के रूप में करती हंै, बताती हैं कि उन्होंने दरगाह में जो प्रदर्शन किया, वह सहिष्णुता और बहुलता को बढ़ावा देने की एक कोशिश थी।
हर पाकिस्तानी ने उनके साहस और उन्होंने अपने घूंघरू और खुले बालों के जरिये जो संदेश देना चाहा, उनकी प्रशंसा की। वह अपने प्रदर्शन पर टिप्पणी करने वाले सभी दोस्तों का प्रशंसा और समर्थन के लिए शुक्रिया करते हुए कहती हैं कि 'शहवान में सिर्फ मैंने धमाल नहीं किया, बल्कि यह हम सबने किया, जो प्रेम, मानवता, बहुलता, सद्भाव और सहिष्णुता में यकीन करते हैं। हम मानते हैं कि नृत्य, संगीत और कला हमें बेहतर इंसान बनाती है, लोगों के बीच प्रेम बढ़ाती है और यही हमें महान सूफी संतों ने सिखाया है।'

सभी अखबारों ने उनकी तस्वीर मुख्यपृष्ठ पर छापी। नेताओं की तरह लंबे भाषण देने के बजाय शीमा ने एक मुखर और स्पष्ट संदेश दिया। हमले के अगले दिन मगरीब की नमाज के बाद लोगों की भारी भीड़ धमाल के लिए वहां पहुंची और लोगों ने आतंकवादियों के आगे झुकने से मना कर दिया।

पाकिस्तानी आतंकवाद से कैसे लड़ रहे हैं, इसे इस तरह भी देखा जा सकता है कि पाकिस्तानियों और विदेशियों ने एक बार फिर स्वात के मालम जब्बा में स्की करना शुरू कर दिया है। कुछ वर्ष पहले स्वात घाटी तालिबान के नियंत्रण में थी और उन्होंने पाकिस्तानी स्विट्जरलैंड के बर्फ पर स्की करने पर प्रतिबंध लगा दिया था, क्योंकि वे इसे 'गैर-इस्लामिक' मानते हैं। लेकिन 2017 की सर्दियों में हिंदूकुश शृंखला के इस पहाड़ी स्थल पर स्की करने वालों को स्की करते हुए देखा गया, इससे पर्यटन को भी बढ़ावा मिल रहा है।

जब पाकिस्तान की जनता आतंकवाद से लड़ रही है, तो मुल्क के सैन्य व असैन्य नेतृत्व की भी जिम्मेदारी बनती है कि वे पाकिस्तान और अफगानिस्तान के आतंकी पनाहगाहों को खत्म करने के लिए रास्ते और साधन की तलाश करंे। यदि पाकिस्तान यह शिकायत करता है कि आतंकवादी उसके खिलाफ हमला करने के लिए अफगानिस्तान की धरती का इस्तेमाल करते हैं, तो अफगानियों की भी वैध शिकायत है कि पाकिस्तान से संचालित हक्कानी गुट जैसे आतंकवादी सीमापार बेगुनाह लोगों की जान लेते हैं।

जाहिद हुसैन कहते हैं कि 'दोनों मुल्कों को तनाव के मुख्य कारणों को खत्म करना चाहिए और आतंकवाद की चुनौती का सामना करने के लिए संयुक्त रणनीति तैयार करनी चाहिए। उग्रवाद को सीमा पार पनाह मिलती है और विभिन्न नेटवर्क सहयोग करते हैं और यह मेजबान मुल्कों की संप्रभुता को भी कमजोर करते हैं।'

दूसरी समस्या यह है कि जहां पाकिस्तान के सभी इलाके सरकार के नियंत्रण में है, वहीं अफगानिस्तान के एक बड़े इलाके पर वहां की सरकार का नहीं, अफगान तालिबान का नियंत्रण है। ये वे इलाके हैं, जिन्हें नाटो ने खाली कर दिया है और अफगान तालिबान ने कब्जा कर लिया है।


जाहिद हुसैन बताते हैं कि आतंकवाद विरोधी संयुक्त नीति न सिर्फ इन दोनों मुल्कों के लिए अहम है, बल्कि आतंकी खतरे के विरुद्ध क्षेत्रीय व वैश्विक लड़ाई के लिए भी महत्वपूर्ण है। गंभीर सुरक्षा हालात को देखते हुए अपनी सीमा की रक्षा और अवैध सीमापार गतिविधि पर प्रतिबंध लगाने की पाकिस्तान की रणनीति समझने योग्य है। पर अफगानिस्तान के साथ मौजूदा तनाव को कम करने में उसके प्रयास सफल नहीं हो सकते। इसके लिए दोनों मुल्कों के लोगों के बीच विश्वास का माहौल बनाना भी जरूरी है, क्योंकि उनकी नियति एक दूसरे से जुड़ी है और उन्हें एक-दूसरे के खिलाफ आतंकियों को पनाह देने की विनाशकारी होड़ को खत्म करना चाहिए।

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