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बिजली है नहीं, वायदा मुफ्त देने का

Mon, 23 Feb 2015 08:20 PM IST
सुधीर विद्यार्थी
सुधीर विद्यार्थी Updated Mon, 23 Feb 2015 08:20 PM IST
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साधो, प्रधानमंत्री ने पिछले दिनों कहा-बिजली है नहीं, वायदे मुफ्त देने के। वह इसे यों भी कह सकते थे कि घर में नहीं दाने, अम्मा चलीं भुनाने। पर उन्होंने पुराने मुहावरे का इस्तेमाल नहीं किया। मोदी नए जमाने के हैं। वह फिल्मी तर्ज पर केजरीवाल से पूछ रहे हैं, मेरे पास बिजली है, तुम्हारे पास क्या है। केजरीवाल उसी तर्ज में जवाब देते हैं, मेरे पास भगवान है।

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जब किसी के पास भगवान है, तो उसे दूसरी किसी चीज की जरूरत नहीं। भगवान से दुनिया रोशन है। बिजली का क्या, अभी आई अभी चली गई। ईश्वर कण-कण में विद्यमान हैं। केजरीवाल वैसे भी ऊपर वाले को बहुत याद करते हैं। मैंने एक भाजपाई से पूछा, अगर दिल्ली में आपके तीन तिलंगे बीमार पड़ गए, तब विधानसभा का क्या होगा। वह बोले, सवा लाख से तीन लड़ाऊं, तब भाजपाई नाम कहाऊं। तीन तिलंगे हर हर गंगे। ये तिलंगे नहीं, ब्रह्मा-विष्णु-महेश हैं। फिर अचानक तुनक कर बोले, हमारे पास तो फिर भी तीन हैं, कांग्रेस के पास क्या है?
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इधर संघ वाले भाजपा को चेतावनी दे रहे हैं, सुधर जाओ, नहीं तो पछताना पड़ेगा। कहीं इस चेतावनी को कांग्रेसी अपने दिल पर न ले लें। बुरी खबर है कि स्विस बैंक खाते 2018 तक पता चलेंगे। इतना सब्र कैसे करें? तीन साल तक हम घुइयां नहीं छीलेंगे। काले धन पर रामदेव नहीं बोलते। उन्हें सब कुछ हरा-हरा दिखाई पड़ने लगा है। दिल्ली नतीजों के बाद साध्वी और साक्षी चुप हैं। बदनसीबों को लाने के बाद भी पेट्रोल सस्ता हो रहा है। दिल्ली पुलिस का घोड़ा केंद्र के कब्जे में है। मालिक वही, जिसके हाथ में लगाम हो।
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मैंने राजधानी में एक पुलिस वाले से पूछा, आप लोग कब सुधरेंगे? वह बोला, घोड़ा घास से यारी करेगा, तो खाएगा क्या? केजरीवाल तो बिना विभाग के मुख्यमंत्री हैं। आप सरकार से अभी नतीजों की उम्मीद न करें। इन दिनों वह गर्भ से है। बिजली कंपनियों के खातों की जांच की जा रही है। लेकिन पहाड़ खोदने पर चुहिया निकली, तब क्या होगा। खेत बिसुआ भर नहीं, बयाना नौ बीघे का। अभी तो इब्तदाए इश्क है, आगे-आगे देखिए होता है क्या।

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