विज्ञापन

गांधी के बाद महानतम भारतीय

उदित राज Updated Mon, 13 Apr 2015 08:35 PM IST
Greatest Indian after Gandhi
ख़बर सुनें
कुछ लोग अपने जीवन में प्रसिद्धि प्राप्त कर लेते हैं, तो कुछ लोग मरणोपरांत। डॉ. भीमराव अंबेडकर अपने जीवन में बहुत ज्यादा प्रसिद्ध नहीं हो पाए, पर धीरे-धीरे उनका कद बढ़ता ही चला गया है। विगत दौर में महापुरुषों के अमर होने की अवधि भले बहुत लंबी रही हो, पर भविष्य में मूल्यांकन काम और विचार के आधार पर ही होने वाला है। संचार की दुनिया में क्रांति आने के बाद किसी को भ्रम नहीं होना चाहिए कि वह अपने प्रचार तंत्र के बल पर आगे भी कामयाब होते रहेंगे।
विज्ञापन
विज्ञापन
आउटलुक पत्रिका, सीएनएन-आईबीएन एवं नेल्सन ने अगस्त-सितंबर, 2012 में सर्वेक्षण कराया कि गांधी के बाद कौन महानतम भारतीय है। महानतम भारतीय की फाइनल रैंकिंग में डॉ. अंबेडकर प्रथम स्थान पर रहे। यही उनकी लोकप्रियता और योगदान बताने के लिए काफी है। हालांकि उनके योगदान के बारे में भी काफी भ्रम है। ज्यादातर लोग इतना ही मानते हैं कि देश का संविधान लिखना उनका सबसे बड़ा योगदान है, जबकि यह सच नहीं है। डॉ. अंबेडकर का सबसे बड़ा योगदान दलितों को गुलामी से आजाद कराना एवं समतामूलक समाज का संघर्ष रहा है।

सच तो यह है कि अब भी उनका सटीक मूल्यांकन नहीं हो पाया है। अधिकतर गैरदलित सोचते हैं कि अंबेडकर ने मूल रूप से अछूतों के लिए ही संघर्ष किया, जबकि ऐसा नहीं है। 1951 में कानून मंत्री के पद से त्यागपत्र उन्होंने दलितों के सवाल पर नहीं, महिलाओं को संपत्ति में बराबरी का अधिकार देने के मुद्दे पर दिया था। दरअसल नेहरू जी से मशविरा करके उन्होंने हिंदू कोड बिल पेश किया था, जिसमें संपत्ति में महिला और पुरुष, दोनों के बराबर अधिकार का प्रावधान था। तमाम सांसदों ने जब इसका विरोध किया, तो नेहरू जी ने बिल वापस ले लिया। वैसी स्थिति में बिल पास होने का मतलब ही नहीं था। बिल पास न होने पर अंबेडकर बहुत आहत हुए और उन्होंने कानून मंत्री के पद से त्यागपत्र दे दिया। क्या महिला अधिकारों की वकालत करने वालों ने अंबेडकर के साथ न्याय किया? हकीकत यह है कि लैंगिक समानता की बात करने वाले कभी इसकी चर्चा भी नहीं करते। दलित महिलाओं को तो इस मामले में कुछ पता भी है, पर उच्च तबके की महिलाएं शायद ही इस बारे में जानती हों। यहीं पर लगता है कि इतने वर्षों बाद भी अंबेडकर के साथ न्याय नहीं हो पाया है।

लेकिन यह सच बहुत दिनों तक छिपने वाला नहीं है। रामलीला मैदान में अन्ना हजारे ने भ्रष्टाचार के खिलाफ आंदोलन चलाया, तो सर्वाधिक नारा भारत माता की जय वहीं से गूंजा। ऐसा नहीं है कि पहले यह नारा नहीं लगता था। दलित सभाओं में भारत माता की जय के नारे नहीं लगते हैं, तो मैं सोचने लगा कि कहीं कोई गलती तो नहीं हो रही है? अगर ऐसा है, तो इसे ठीक किया जा सकता है। कुछ और लोग भी सोचते होगें कि दलित ‘जय भीम’, ‘जय भारत’ का नारा तो लगाते हैं, पर ‘भारत माता की जय', क्यों नहीं बोलते। वास्तव में चाहे ‘जय भारत’ हो या ‘भारत माता की जय’, दोनों का भावार्थ एक ही है। सामाजिक न्याय की ताकतें अपने अधिकार की बात करती हैं, तो वह शुद्ध राष्ट्रवाद है। इससे देश की एकता और अखंडता कहीं ज्यादा सुदृढ़ होती है। जनतंत्र और आरक्षण की वजह से महिलाओं और लगभग सभी जातियों की कम या ज्यादा भागीदारी शासन-प्रशासन में सुनिश्चित हुई। वस्तुतः अंबेडकरवाद सामाजिक न्याय, सम्मान एवं भागीदारी है और वह राष्ट्रीय एकता और अखंडता का ही पर्याय है।

-लेखक भाजपा सांसद हैं

Recommended

सर्दी में ज्यादा खाएं देसी घी, जानें क्यों कहते हैं इसे ब्रेन फूड और क्या-क्या हैं इसके फायदे
ADVERTORIAL

सर्दी में ज्यादा खाएं देसी घी, जानें क्यों कहते हैं इसे ब्रेन फूड और क्या-क्या हैं इसके फायदे

विज्ञापन
विज्ञापन
अमर उजाला की खबरों को फेसबुक पर पाने के लिए लाइक करें
विज्ञापन

Spotlight

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

Most Read

Opinion

नायाब है भारतीय सेना

लगभग हर तरह की रण भूमि के माहौल से वाकिफ और रासायनिक और परमाणु खतरों के दौर में भारतीय सेना आसमान से लेकर समुद्र तक सभी क्षेत्रों में किसी भी मिशन के लिए पूरी तरह तैयार है।

15 जनवरी 2019

विज्ञापन

क्रिकेट में इसे माना गया बेईमानी, क्या आपको है याद?

क्रिकेट में किसी तरह की बेईमानी न हो इसलिए अंपायर होते हैं। अगर अंपायर की नजर से कुछ चूके तो खिलाड़ियों की जिम्मेदारी होती है कि वो नैतिकता का परिचय दें। लेकिन कभी-कभी ये खिलाड़ी भी नैतिकता के मामले में चूक जाते हैं...

16 जनवरी 2019

आज का मुद्दा
View more polls
Niine

Disclaimer

अपनी वेबसाइट पर हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर अनुभव प्रदान कर सकें, वेबसाइट के ट्रैफिक का विश्लेषण कर सकें, कॉन्टेंट व्यक्तिगत तरीके से पेश कर सकें और हमारे पार्टनर्स, जैसे की Google, और सोशल मीडिया साइट्स, जैसे की Facebook, के साथ लक्षित विज्ञापन पेश करने के लिए उपयोग कर सकें। साथ ही, अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें।

Agree