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पड़ोस : पाकिस्तान में कुछ भी संभव है, क्योंकि सेना की मर्जी पर आई और गई है हर सरकार
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पाकिस्तान में सत्ता का गणित
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अमर उजाला
विस्तार
विगत आठ फरवरी को पाकिस्तान में आम चुनाव हुए और उसी दिन आधी रात तक अफरा-तफरी मच गई, क्योंकि पाकिस्तान मुस्लिम लीग (नवाज) के सबसे कद्दावर नेता एवं पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने अपनी हार की गिनती शुरू कर दी। हालांकि पीएमएल-एन प्रमुख नवाज शरीफ को चौथी बार मुल्क का प्रधानमंत्री बनाने के लिए सुरक्षा प्रतिष्ठान ने उनकी राह की सभी कानूनी बाधाओं को हटा दिया था, लेकिन वह खैबर पख्तुनख्वा प्रांत के मनसेरा एबोटाबाद की अपनी सुरक्षित सीट भी इमरान खान की पीटीआई समर्थित एक निर्दलीय उम्मीदवार के हाथों हार बैठे। नवाज शरीफ इस सदमे से अब तक उबर नहीं पाए हैं और सार्वजनिक नजरों से बचते फिर रहे हैं।
वास्तव में सुरक्षा प्रतिष्ठान, जिसने विजेताओं की सूची से पीटीआई को बाहर रखने के लिए गैरकानूनी तरीके से हर तरह की कोशिश की, को भारी झटका लगा, क्योंकि कैदी नंबर 804 (जेल में इमरान खान की कैदी संख्या) से जुड़े निर्दलीय उम्मीदवारों ने चुनाव में जीत हासिल की। लेकिन इमरान समर्थित निर्दलीय उम्मीदवारों के पास बहुमत का वह जादुई आंकड़ा नहीं है कि वे केंद्र में सरकार बना सकें। नतीजे घोषित होने के लगभग दो हफ्ते तक पूरा मुल्क और दुनिया भर में हर कोई इंतजार करता रहा, लेकिन राजनेता न तो गठबंधन सरकार बनाने पर कोई फैसला कर पाए और न ही सहमत हो पाए।
कराची शेयर बाजार गिरने लगा और कार्यवाहक सरकार के मुताबिक बजट घाटा बढ़कर 85.4 खरब डॉलर तक पहुंच गया। सुधारों और महत्वपूर्ण विदेशी फंडिंग में देरी के कारण बने गतिरोध ने अंतरराष्ट्रीय बॉन्ड की बिकवाली को बढ़ावा दिया और मुल्क में आर्थिक संकट के और अधिक बढ़ने की विश्लेषकों की आशंका को बल मिला। घटती विदेशी मुद्रा के साथ पाकिस्तान आर्थिक संकट में था, अगले दो महीनों में एक अरब बॉन्ड भुगतान के कारण उस पर और दबाव बढ़ेगा, अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के साथ उसका तीन अरब डॉलर का फंडिंग कार्यक्रम 12 अप्रैल को समाप्त हो रहा है। वित्त मंत्रालय के पूर्व सलाहकार और सस्टेनेबल डेवलपमेंट पॉलिसी इंस्टीट्यूट के साजिद अमीन ने कहा कि 'यदि कोई भी पार्टी सामान्य बहुमत नहीं जुटा पाती है, तो पाकिस्तान गंभीर राजनीतिक और आर्थिक संकट के दौर में प्रवेश कर जाएगा।' यह संकट इतना गहरा गया कि आर्थिक पतन से चिंतित सुरक्षा प्रतिष्ठान ने पीपीपी और पीएमएल-एन को एक सख्त संदेश भेजा कि बस बहुत हो चुका, अगर छह दौर की वार्ता के बाद भी वे सरकार की घोषणा नहीं कर पाए, तो वे उनके लिए फैसले लेंगे।
रिपोर्टों में यह भी कहा गया है कि सुरक्षा प्रतिष्ठान ने जेल में इमरान खान से बात करने के लिए भी एक मध्यस्थ भेजा कि वह नौ मई, 2023 की तबाही और फौजी प्रतिष्ठानों पर हमले में अपनी भूमिका कबूल कर लें, तो अपने निर्दलीय उम्मीदवारों को सत्ता में शामिल कर सकेंगे और उन्हें इस्लामाबाद स्थित उनके आवास बनिगाला ले जाया जाएगा, जिसे फिलहाल एक उप-जेल में तब्दील कर दिया गया है और जहां उनकी पत्नी बुशरा बीबी को रखा गया है। लेकिन इमरान खान ने अपने प्रसिद्ध दो शब्दों में जवाब दिया-बिल्कुल नहीं। जाहिर है कि पाकिस्तान के इतिहास में सबसे विवादास्पद चुनाव में धांधली करने वाला सुरक्षा प्रतिष्ठान अब हाथ मल रहा है।
सुरक्षा प्रतिष्ठान के करीबी माने जाने वाले सीनेटर मुशाहिद हुसैन (पीएमएल-एन) ने मानो सेना के संकेत पर सीनेट में बिल्कुल सटीक कहा कि यदि पीएमएल-एन, पीपीपी और पीटीआई मिलकर कोई फैसला नहीं लेते हैं, तो सैन्य मुख्यालय फैसला करेगा। उन्होंने यह भी कहा कि मौजूदा स्थिति में सबसे बड़ी जिम्मेदारी नवाज शरीफ की है। पीपीपी के आसिफ अली जरदारी और पीएमएल-एन के शहबाज शरीफ को जैसे ही सेना का संदेश मिला, आधी रात में जल्दबाजी में उन्होंने प्रेस कांफ्रेंस करके घोषणा की कि अब उनके पास बहुमत साबित करने के लिए जादुई आंकड़ा है और वे गठबंधन सरकार बनाएंगे। शहबाज शरीफ सदन के भावी नेता होंगे, जबकि आसिफ अली जरदारी राष्ट्रपति होंगे। जरदारी यह पद पीपीपी सरकार के दौरान पहले भी संभाल चुके हैं। गठबंधन सरकार की घोषणा के बाद बुधवार सुबह में शेयर बाजार में 1,000 से ज्यादा अंकों की बढ़ोतरी हुई। विश्लेषकों ने इस बढ़त का श्रेय सरकार गठन पर आम सहमति को दिया। नई गठबंधन सरकार का नाम पीडीएम-2.0 रखा गया है। यह वही पाकिस्तान डेमोक्रेटिक मूवमेंट सरकार है, जिसने अविश्वास प्रस्ताव से इमरान के हटने के बाद करीब एक साल तक शासन किया और जिसे आम नागरिकों के लिए सबसे खराब सरकार के रूप में याद किया जाता है। नवाज शरीफ के लिए परेशानी की बात यह है कि पीपीपी ने केंद्रीय मंत्रिमंडल का हिस्सा बनने से इन्कार कर दिया है, पर पंजाब में राज्यपाल एवं मंत्री पद की मांग की है।
पीपीपी का कहना है कि वह सदन के नेता के रूप में शाहबाज शरीफ के लिए वोट करेगी और नेशनल असेंबली में मुद्दे के आधार पर समर्थन भी करेगी, लेकिन संघीय सरकार की कोई जिम्मेदारी नहीं लेगी। पंजाब में पीएमएल-एन ने निर्दलीय और पीपीपी की मदद से बहुमत जुटा लिया है और नवाज शरीफ ने घोषणा की है कि उनकी बेटी और राजनीतिक उत्तराधिकारी पंजाब की मुख्यमंत्री होंगी। इस तरह पंजाब के इतिहास में पहली बार कोई महिला मुख्यमंत्री होंगी। इस बीच पीटीआई ने उदारवादी इस्लामी पार्टी पाकिस्तान सुन्नी तहरीक के साथ गठबंधन करने का फैसला किया है, क्योंकि सुरक्षा प्रतिष्ठान ने पीटीआई को अपने चुनाव चिह्न ‘बल्ले’ का उपयोग करने से वंचित कर दिया था, इसलिए उसके उम्मीदवारों को निर्दलीय चुनाव लड़ना पड़ा। वे निचले सदन में पीपीपी के साथ विपक्ष की सीट पर बैठेंगे, जिससे यह संसदीय इतिहास में सबसे मजबूत विपक्ष बन जाएगा, जो सरकार के हर कदम को रोकने की ताकत भी रखेगा। राजनीति संभावनाओं की कला है और कौन जानता है कि सुरक्षा प्रतिष्ठान के एक इशारे पर कल क्या होगा, क्योंकि संयुक्त विपक्ष के पास कमजोर शहबाज सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने के लिए पर्याप्त संख्या है। ब्रिटिश इंडिया से आजाद होने के बाद 1970 में पहली बार पाकिस्तान में प्रत्यक्ष आम चुनाव हुए थे। लेकिन 2024 के आम चुनाव ने दिखा दिया कि इसका सबसे बड़ा शिकार जम्हूरियत है।