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Gold Smuggling: कैसे रुकेगी सोने की तस्करी, आयातित आभूषण पर सीमा शुल्क बढ़ने से तस्करों की चांदी
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सोना (सांकेतिक तस्वीर)
- फोटो :
सोशल मीडिया
विस्तार
देश के स्वर्णकारों और स्वर्णाभूषण उद्योग को उम्मीद थी कि बजट में वित्तमंत्री सोने पर लगा भारी-भरकम सीमा शुल्क घटाएंगी। सोने पर 12.5 आयात शुल्क और ढाई प्रतिशत कृषि उपकर- यानी 15 फीसदी का टैक्स भार है। पिछले साल बजट में ही यह शुल्क 12.75 फीसदी से बढ़ाकर 15 फीसदी कर दिया गया था। तब सोने के कारोबारियों और आभूषण उद्योग ने कहा था कि इससे देश में सोने की तस्करी और बढ़ेगी। लेकिन सरकार का तर्क था कि इससे सोने का आयात घटेगा जो तब 1,000 टन प्रतिवर्ष से भी ज्यादा था। सोने के दाम बढ़ने से इसके आयात पर तो अंकुश लगा, लेकिन तस्करी और बढ़ गई।
भारत दशकों तक सोने का सबसे बड़ा आयातक देश रहा, लेकिन बाद में चीन पहले स्थान पर आ गया। पिछले साल भारत ने 706 टन सोना आयात किया, लेकिन कहा जा रहा है कि करीब 200 टन सोना तस्करी के जरिये देश में आया। जेम्स एंड ज्वेलरी प्रमोशन काउंसिल ने सोना-चांदी और प्लैटिनम पर आयात शुल्क चार फीसदी किए जाने की मांग की है। ज्वेलर्स का कहना है कि कोरोना के बाद संगठित ज्वेलर्स का कारोबार 36 फीसदी बढ़ा है, जबकि छोटे कारोबारियों की दुकानें बंद हो गई हैं। सोने पर इतने ज्यादा शुल्क से तस्करों की चांदी हो गई है। अपने यहां और विदेशों में सोने के दाम में बहुत फर्क है। फिलहाल देश में 24 कैरेट सोना 57,000 रुपये प्रति 10 ग्राम से ऊपर है, तो दुबई में, जो इस क्षेत्र में सोने का सबसे बड़ा बाजार है, यह 51,000 रुपये प्रति 10 ग्राम से भी कम है।इसलिए धड़ल्ले से इसकी तस्करी हो रही है।
आभूषण उद्योग ने इसी कारण सोने पर सीमा शुल्क में कटौती करने का आग्रह किया था। पर सरकार हर बजट में इसकी उपेक्षा करती है। पिछले बजट में उसने इसमें वृद्धि कर दी और इस बार आयातित आभूषण पर शुल्क बढ़ाकर 20 प्रतिशत कर दिया। द बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन के चेयरमैन योगेश सिंघल कहते हैं कि इससे आभूषण उद्योग को बढ़ावा मिलेगा, कारीगरों को काम भी मिलेगा, और 'मेक इन इंडिया' की दिशा में यह अच्छा कदम है। पर उनका कहना है कि इससे सोने की तस्करी बढ़ सकती है।
सरकार द्वारा सीमा शुल्क बढ़ाते जाने से सोने की तस्करी के नए पॉइंट भी बनते जा रहे रहे हैं। पहले सिर्फ दुबई और थाईलैंड से सोना आता था, पर पिछले कुछ वर्षों से नेपाल, बांग्लादेश, म्यांमार, यहां तक कि श्रीलंका भी इस सूची में शामिल हो गए हैं। पहले तीन देशों की सीमाएं सटी हुई हैं और हजारों किलोमीटर का जमीनी इलाका है, जहां से तस्करी आसानी से हो सकती है। म्यांमार एक नया केंद्र बना है। उसकी सीमाएं दुर्गम हैं, जहां सेना की टुकड़ियां भी बमुश्किल पहुंच पाती हैं। वहां के उग्रवादी धन इकट्ठा करने के लिए तस्करों को मदद पहुंचाते हैं और दुर्गम रास्तों से उन्हें निकलवा देते हैं। बांग्लादेश और नेपाल की सीमाओं पर भले ही कस्टम वगैरह की चौकियां हैं, पर सीमा बहुत लंबी होने के कारण धड़ल्ले से तस्करी हो रही है। पिछले साल भारत में तस्करी से आया जितना सोना पकड़ा गया, उसका 73 फीसदी बांग्लादेश और म्यांमार से आया था।
हालांकि इसका मतलब यह नहीं कि तस्करी का सबसे पुराना रूट दुबई-मुंबई बंद हो गया। यह अब भी धड़ल्ले से जारी है। पिछले ही साल नवंबर में मुंबई हवाई अड्डे पर एक दिन में 32 करोड़ रुपये का 61 किलो सोना पकड़ा गया था। हालांकि हवाई अड्डे पर काफी सख्ती है और टेक्निकल सर्विलांस भी बहुत है, इसीलिए अब दूसरे रास्तों पर ज्यादा जोर है। पिछले कुछ वर्षों से चेन्नई हवाई अड्डे से भी दुबई से तस्करी के जरिये सोना लाने की खबरें आ रही हैं। वहां पिछले साल कस्टम विभाग ने काफी माल पकड़ा था। लेकिन यह तस्करी जारी है, क्योंकि भारत में सोने के प्रति आकर्षण दुनिया में सबसे ज्यादा है। हर कोई इसके आकर्षण पाश में बंधा हुआ है। देश की नारियों के लिए तो यह अपना सौंदर्य बढ़ाने का सर्वोत्तम माध्यम है और वे तरह-तरह के स्वर्णाभूषण बनवाती हैं। देश भर में हजारों डिजाइनर और लाखों कारीगर इस काम में लगे हुए हैं। ऐसे में, इसकी मांग कैसे घटेगी?