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G-20: 2023 का शिखर सम्मेलन जम्मू-कश्मीर में, चीन-पाकिस्तान की बौखलाहट बढ़ी

Mon, 11 Jul 2022 04:19 AM IST
Shivdan Singh शिवदान सिंह
Updated Mon, 11 Jul 2022 04:19 AM IST
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सार
अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत का रुतबा बढ़ता ही जा रहा है। जी-20 जैसे आर्थिक रूप से विकसित देशों के संगठन की अध्यक्षता दिसंबर, 2022 से भारत संभालने जा रहा है!
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G-20: 2023 summit in Jammu and Kashmir, China-Pakistan fury escalates
China Pakistan - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

दुनिया की 20 बड़ी अर्थव्यवस्था वाले देशों के संगठन जी-20 का 2023 का शिखर सम्मेलन जम्मू-कश्मीर में करने की तैयारी को देखते हुए पाकिस्तान और चीन बौखला उठा है। केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर की सरकार ने बीते 23 जून को शिखर सम्मेलन के आयोजन को लेकर पांच सदस्यीय समिति का गठन किया है। पाकिस्तान और चीन का कहना है कि जम्मू-कश्मीर एक विवादित क्षेत्र है, इसलिए भारत को वहां जी-20 जैसा अंतरराष्ट्रीय आयोजन करने का अधिकार नहीं है। चूंकि इन दोनों देशों का नजरिया भारत के प्रति शत्रुतापूर्ण रहा है, इसलिए ऐसी प्रतिक्रियाएं नई नहीं हैं। नई बात यह है कि इस बार भारत सरकार का रुख रक्षात्मक नहीं, बल्कि आक्रामक है। इस बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दलाई लामा को, जिन्हें चीन अपना शत्रु मानता है, जन्मदिन पर फोन करके बधाई दी। जाहिर है, प्रधानमंत्री के इस रुख से चीन चिढ़ गया और उसने तुरंत प्रतिक्रिया दी कि भारत को दलाई लामा के चीन-विरोधी अलगाववादी स्वभाव को पहचानना चाहिए।


 
अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत का रुतबा बढ़ता ही जा रहा है। जी-20 जैसे आर्थिक रूप से विकसित देशों के संगठन की अध्यक्षता दिसंबर, 2022 से भारत संभालने जा रहा है! चीन की बौखलाहट इसलिए भी है कि वह अभी तक भारत को कमजोर पड़ोसी मानता था, जिसकी 38 हजार वर्ग किलोमीटर भूमि पर आक्साइ चिन क्षेत्र में उसने कब्जा किया हुआ है! वर्ष 2017 में वह भारत के सिलीगुड़ी गलियारे पर कब्जा करने के सपने देख रहा था, ताकि हमारे उत्तर पूर्वी राज्यों को देश की मुख्य भूमि से काटकर उन पर तिब्बत की तरह कब्जा कर सके! परंतु भारत ने उसके इरादों और सपनों पर पानी फेर दिया है! वह अरुणाचल प्रदेश और पूर्वी लद्दाख के क्षेत्रों पर भी दावा करता है और समय-समय पर घुसपैठ एवं झड़प को अंजाम देता है। 


सिलीगुड़ी गलियारे पर कब्जा करने की उसकी चाल को विफल कर भारतीय सेना ने उसे करारा जवाब दिया है। वर्ष 2019 में मोदी सरकार ने अनुच्छेद 370 को निरस्त कर दिया, जिससे पूरी दुनिया में यह संदेश गया कि जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न हिस्सा है, और विवादित क्षेत्र केवल वह है, जिन पर पाकिस्तान और चीन का अवैध कब्जा है! पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति काफी बदहाल है। ऐसे में भारत के साथ वह एक दिन भी युद्ध करने की स्थिति में नहीं है। उसे चीन पर भरोसा है। इसी कारण चीन ने 2019 में भारत द्वारा जम्मू-कश्मीर में सांविधानिक सुधारों के लागू होने के तुरंत बाद पाकिस्तान की शह पर पूर्वी लद्दाख के गलवान क्षेत्र में अचानक हमला कर दिया, जिसका भारत ने करारा जवाब दिया और उसे पीछे हटने के लिए मजबूर कर दिया। 

चीन अपने पड़ोस में आक्रामक विस्तारवाद को अंजाम देता आया है, और अब वह आर्थिक विस्तारवाद की नीति को अपना रहा है। आर्थिक सहायता और ऋण के नाम पर वह छोटे-छोटे देशों में प्रवेश करता है तथा धीरे-धीरे उनकी अर्थव्यवस्था पर कब्जा कर लेता है! इसका ताजा उदाहरण है श्रीलंका और हिंद महासागर व अफ्रीका स्थित देश! पाकिस्तान भी चीन के इस कर्ज जाल में फंस चुका है, जिसका वहां विरोध भी हो रहा है। भारत ने वास्तविक नियंत्रण रेखा पर आधारभूत ढांचे का निर्माण करने के अलावा सीमा पर पर्याप्त सैनिकों व लड़ाकू विमानों की तैनाती की है, जिनका प्रदर्शन दोकलाम और लद्दाख की गलवान घाटी में दुनिया ने देखा है। भारत की सैन्य शक्ति में आधुनिक मिसाइलों और लड़ाकू विमानों के आ जाने से चीन अच्छी तरह से समझ गया है कि इस क्षेत्र में  उसने सैनिक संघर्ष शुरू किया, तो भारत उसकी सी पैक या बेल्ट ऐंड रोड इनीशिएटिव के लिए तैयार आधारभूत ढांचे को अपनी मिसाइलों से बर्बाद कर देगा! उसे समझ में आ गया है कि भारत अब 1962 वाला भारत नहीं रहा, बल्कि शक्तिशाली देश बन गया है। वस्तुतः भारत ने वह कहावत सिद्ध कर दी है कि युद्ध की तैयारी से ही शांति की गारंटी हो सकती है!
 

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