दोस्ती अमीरात से, संदेश दुनिया को
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
फारस की खाड़ी क्षेत्र के साथ भारत के रिश्ते प्राचीन काल से ही हैं, लेकिन आधुनिक काल में इस रिश्ते को आगे बढ़ाने की दिशा में सबसे बड़ा कदम तब उठाया गया, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संयुक्त अरब अमीरात की यात्रा की। इंदिरा गांधी के बाद 34 वर्षों में वह वहां जाने वाले पहले प्रधानमंत्री हैं। इस यात्रा ने अमीरात और भारत के बीच व्यापक सामरिक भागीदारी बढ़ाने का काम किया। आर्थिक संबंधों और सामरिक महत्व के लिहाज से अमीरात के साथ भारत का रिश्ता महत्वपूर्ण है। हवाई उड़ान संपर्क (प्रति दिन सौ से ज्यादा उड़ान), व्यापारिक रिश्ते और स्थानीय लोगों को पीछे छोड़ते प्रवासी भारतीयों की संख्या संयुक्त अरब अमीरात को भारत का पड़ोसी बनाती है। ठेठ मोदी अंदाज के कारण उनकी यह यात्रा भी घरेलू एजेंडे में फिट बैठती थी। 'महरबा नमो' सम्मेलन के जरिये भारतीय समुदायों के साथ उनका सीधा संवाद जितना उत्सव की तरह था, उतना ही राजनीतिक रैली के रूप में। दुबई में बात करते हुए मोदी अपने घरेलू दर्शकों को भी संबोधित कर रहे थे। उन्होंने भारत में हुए सुधारों और बदलावों के साथ-साथ आतंकवाद पर बात की।
पाकिस्तान का नाम लिए बगैर उन्होंने आतंकवाद के खिलाफ एक निर्णायक जंग छेड़ने का ऐलान किया, पर आगामी राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) स्तर की वार्ता के मद्देनजर उन्होंने रेखांकित किया कि, 'मैं अपने सभी पड़ोसी देशों से कहता हूं कि जिन लोगों ने हिंसा का रास्ता चुना है, उन्हें कभी न कभी वार्ता की मेज पर आना होगा।' हालांकि अच्छे और बुरे तालिबान के बीच फर्क करने वालों पर हमला बोलते हुए मोदी ने संभवतः मेजबान देश के लिए थोड़ी असहज स्थिति पैदा कर दी, जो उन तीन में से एक देश (पाकिस्तान और सऊदी अरब के साथ) है, जिसने तालिबान सरकार को मान्यता दी थी। इसके बाद दोनों देशों ने एक संयुक्त बयान पर हस्ताक्षर किया, जिसमें दो टूक कहा गया कि वे 'आतंकवाद का सभी रूपों और अभिव्यक्तियों में विरोध' करते हैं।
संयुक्त अरब अमीरात ने 2013 और 2014 में इंडियन मुजाहिदीन के दो संदिग्धों अब्दुल सत्तार और फैजान अहमद को प्रत्यर्पित किया, मगर पाकिस्तान के मामले में उसका रुख सहयोगात्मक नहीं रहा है। अमीरात के साथ पाकिस्तान का गहरा नाता है, क्योंकि वहां के अभिजात वर्ग के कई लोग दुबई को अपना दूसरा घर मानते हैं और संभवतः उनके बैंक खाते भी दुबई में हैं। भारत और पाकिस्तान के साथ आसान संपर्क के कारण अमीरात पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई के लिए ऐसा खुशगवार शिकार-स्थल है, जहां से वह भारतीयों को भर्ती करने के साथ-साथ भारत के खिलाफ खुफिया ऑपरेशन चलाना चाहता है। प्रधानमंत्री की इस यात्रा से स्थिति में बदलाव आएगा या नहीं, यह देखना अभी बाकी है। नए सहयोगी के रूप में भारत और संयुक्त अरब अमीरात अब कट्टरता और धर्म के दुरुपयोग का मिलकर मुकाबला करेंगे।
हालांकि आतंकवाद पर भारत-संयुक्त अरब अमीरात का नया रुख सुर्खियों में है, लेकिन अमीरात के साथ हमारे रिश्ते का महत्वपूर्ण पहलू आर्थिक है। चीन और अमेरिका के बाद अमीरात भारत का तीसरा सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार है, जिसके साथ 60 अरब डॉलर का वार्षिक कारोबार होता है। साथ ही यह हमारी वस्तुओं का दूसरा सबसे बड़ा आयातक देश है, जहां हम 33 अरब डॉलर का निर्यात करते हैं। भारत के लिए कच्चे तेल का यह छठा सबसे बड़ा स्रोत है।
इसकी अकूत संपत्ति, तेल एवं गैस संपदा को देखते हुए यह भारत के लिए प्रत्यक्ष विदेशी निवेश का भी एक बड़ा संभावित स्रोत है। अभी संयुक्त अरब अमीरात से भारत में कुल मिलाकर मात्र तीन अरब डॉलर का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश हुआ है। हालांकि अमीरात में कुछ ऐसे संप्रभु सरकारी कोष हैं, जिनकी संपत्ति दस खरब डॉलर से ज्यादा है। मोदी ने इन्फ्रास्ट्रक्चर और कृषि क्षेत्र में अमीरात से दस खरब डॉलर निवेश की इच्छा जताई है। अगर इनमें से एक छोटे से अंश का भी निवेश आना शुरू होता है, तो यह बड़ी उपलब्धि होगी।
संयुक्त अरब अमीरात में भारतीय समुदाय के 26 लाख लोग रहते हैं, जो वहां रहने वाले प्रवासियों का सबसे बड़ा समूह है। उनमें डॉक्टर, इंजीनियर, दुकानदार, एकाउंटेंट आदि भी हैं, जो प्रति वर्ष 15 अरब डॉलर देश (भारत) में भेजते हैं। महात्वाकांक्षी अमीरात, जो पहले से ही तेल से अलग अर्थव्यवस्था में निवेश की योजना बना रहा है और उत्तम क्वालिटी के विनिर्माण का जोखिम उठा रहा है, भारतीय निवेशकों और पेशेवरों के लिए महत्वपूर्ण गंतव्य है। इसके आकार को देखते हुए यह स्पष्ट है कि यह भारतीय वस्तुओं के गंतव्य की तुलना में संग्रह स्थल ज्यादा है। एक वैश्विक उड्डयन और व्यावसायिक केंद्र के रूप में उभरा यह देश न केवल हमारे द्विपक्षीय संबंधों में अहम भूमिका निभाता है, बल्कि फारस की खाड़ी क्षेत्र के बाकी देशों से भी हमें जोड़ता है।
अब तक भारत अमीरात के निवेश को आकर्षित करने में बहुत सफल नहीं रहा है। यही वजह थी कि मोदी ने निवेशकों को आकर्षित करने के लिए मसदर शहर में एक बैठक की। हालांकि वहां के निवेशक भी अन्य देशों के निवेशकों की तरह इससे असहमत थे कि भारत भारी निवेश का स्वागत करने के लिए नीतियों और प्रदर्शन के मामले में पूरी तरह तैयार है। खास तौर पर खाड़ी के निवेशकों को कर एवं नीति संबंधी मुद्दों पर अतीत में समस्याएं रही हैं। टू जी घोटाले की वजह से एतिसलात मोबाइल कंपनी की विफल निवेश की छाया अब भी बनी हुई है।
हमें नहीं भूलना चाहिए कि आतंकवाद से अलग भी हमारी सुरक्षा में अमीरात की महत्वपूर्ण भूमिका है। इसका संबंध मनी लॉन्डरिंग, संगठित अपराध और तस्करी जैसे बड़े सवालों से भी है। सामरिक महत्व के होर्मुज जलडमरूमध्य में स्थित होने के कारण यह हमारे समुद्री तेल गलियारे के लिए भी खास है, जहां से होकर हमारी आपूर्ति का 70 फीसदी तेल आता है।
-ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन के प्रतिष्ठित फेलो