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फ्रेडरिक विल्सन: तब पहाड़ी इलाकों में उस फिरंगी के सिक्के चलते थे, धन के लालच में समृद्ध जंगलों को नष्ट किया
Tue, 17 Dec 2024 05:49 AM IST
दीपक कुमार शर्मा
विनोद पुरोहित
विनोद पुरोहित
Published by: दीपक कुमार शर्मा
Updated Tue, 17 Dec 2024 05:49 AM IST
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फ्रेडरिक विल्सन और विनोद पुरोहित
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अमर उजाला
विस्तार
यह पहाड़ की कहानी है...जहां शिखर पर पहुंचने के लिए जी-तोड़ मेहनत करनी पड़ती है। राह में आते-जाते लोगों की सलाह सुन तो ली जाती है, पर भरोसा खुद पर ही करना होता है। एक भी गलत कदम खाई में गिरा देता है और वर्षों में बनाया वजूद पल भर में नेस्तनाबूद हो जाता है। ऐसा ही वर्षों पहले सुदूर उत्तराखंड में फ्रेडरिक विल्सन के साथ हुआ। वह अपने संघर्ष और पराक्रम से टिहरी के दुर्गम पर्वतीय इलाकों में उत्कर्ष पर पहुंचा और सबकी आंखों का तारा बन गया। एक ऐसा वक्त भी आया, जब 1857 के दौरान उसने इतनी अकूत संपत्ति कमाई कि उसे फिरंगी राजा का तमगा तक मिल गया। उसके नाम के सिक्के चल गए थे। टिहरी गढ़वाल खासकर हर्षिल और आसपास के इलाकों में आज भी उस फिरंगी के किस्से आम हैं।
फ्रेडरिक विल्सन नामक व्यक्ति मूल रूप से यॉर्कशायर, इंग्लैंड का था। ईस्ट इंडिया कंपनी की फौज में अफसरी हासिल कर हिंदुस्तान आया था। हालात कुछ ऐसे बने कि अपने ही उच्च अधिकारी की हत्या कर दी। छिपते-छिपाते वह टिहरी के दुर्गम और अनजाने इलाकों में जा पहुंचा, लेकिन उसे इंग्लैंड वापस जाना पड़ा। हालांकि, उसके जुनून ने हिलोर मारी और वह जल्द ही लौट आया। यहां उसने नए सहयोगी तलाशे। माइकल जॉन के नाम से एक बुजुर्ग के घर में शरण ली। बाद में उसकी बेटी राईमत्ता से शादी कर ली। राईमत्ता के निधन के बाद विल्सन ने उसकी ही रिश्तेदार गुलाबो से ब्याह रचाया। उसने वन्यजीवों के शिकार और उनकी खाल का व्यापार शुरू किया। इसके बाद गंग नहर और रेलवे की परियोजनाओं के लिए देवदार की लकड़ी के ठेके लिए।
इतिहास के गुमनाम किरदारों के ख्यात लेखक राजगोपाल सिंह वर्मा ने अपनी किताब फिरंगी राजा में इस अंग्रेज की रोचक दास्तान प्रस्तुत की है। वक्त के साथ विल्सन की सफलता तो दर्ज हो रही थी, उसकी विफलता की इबारत भी लिखी जा रही थी। उसने धन के लालच में टिहरी के समृद्ध जंगलों को नष्ट कर दिया। वहां का प्राकृतिक संतुलन तहस-नहस कर दिया। सबसे अमीर आदमी बनने की राह में आने वालों को तबाह कर दिया। अपने मनमाने व्यवहार की वजह से आज लोग उसे शापित इन्सान के रूप में ज्यादा जानते हैं। तभी तो कहा जाता है कि पहाड़ पर एक गलत कदम इन्सान को गर्त में पहुंचा देता है। स्थानीय लोग कहते हैं- किंवदंतियों और किस्सों में हुलसन (विल्सन) आज भी जिंदा है, लेकिन देवदारों के हत्यारे के रूप में।