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घाटी की समृद्धि के लिए
तरुण विजय
Updated Wed, 29 Jul 2015 08:01 PM IST
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डॉ. अब्दुल कलाम एक सशक्त, समर्थ और सुरक्षित भारत चाहते थे। उनके जीवन का हर पल और हर क्षण भारत के लिए समर्पित था। उनका सपना था कि जम्मू-कश्मीर के युवा उच्च शिक्षा प्राप्त कर जिंदगी में तरक्की के नए मुकाम हासिल करें। सिर्फ यह कहना ही पर्याप्त नहीं है कि जम्मू-कश्मीर के लोग भी हमारे हैं।
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जब तक जम्मू-कश्मीर के नौजवानों को अच्छी शिक्षा और रोजगार का बेहतर अवसर नहीं मिलता, तब तक एकता की सारी बातें खोखली रहेंगी। भूखे पेट और खाली दिमाग गिलानी जैसे देशद्रोहियों के पत्थरबाज बनेंगे। कश्मीर केवल पर्यटन स्थल ही नहीं, भारत का भाल है, और उसके अधूरे विकास का अर्थ है कि भारत का विकास अधूरा है। आतंकवाद और अलगाववाद के समाधान के लिए केवल सैनिक कार्रवाई नहीं, बल्कि हृदय से उपजे विकास की आत्मीयता भी अनिवार्य है।
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सनसनाती गोलियों के बीच छाती तानकर जब हमारा जवान दुश्मन के छक्के छुड़ाता है, तो देश उनके प्रति सम्मान भी प्रकट करता है। मगर जब उसी जवान को सुविधा देने की बात उठती है, तो यही देश टालमटोल करता है। उन्हें यहां तक कह दिया जाता है कि जीवन बलिदान करने के लिए उन्हें वेतन तो मिलता ही है, अब और क्या चाहिए? एक समय था, जब फौज में भर्ती होना गौरव और अभिमान की बात मानी जाती थी।
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मगर अब इस माहौल में कमी आई है। जिला प्रशासन हो या उच्चतर स्तर के अधिकारी और नेता, सिर्फ युद्ध में जान देते हुए जवान ही उन्हें भाते हैं। शेष समय में उनकी समस्याओं या उनके भविष्य के प्रति हम संवेदनहीन बने रहते हैं। अमेरिका में मैंने स्वयं देखा है कि विमान में प्रवेश करने की पंक्ति भले ही कितनी लंबी हो, लेकिन विमान सेवा तथा हवाई अड्डे के कर्मचारी यदि वहां जवान तथा फौजी अधिकारी को देख लें, तो उन्हें पहले प्रवेश देते हैं। कोई शिकायत भी नहीं करता। जबकि हमारे यहां जवान मजबूरी में बिना आरक्षण के जब यात्रा करते हैं, तो अक्सर सीटों पर पसरे साहब लोग जवान को अपनी सीट पर तनिक सिकुड़कर बैठने के लिए भी नहीं कहते।
इन्हीं जवानों के लिए जम्मू-कश्मीर में विकास, सुरक्षा और समृद्धि का त्रियुगी अध्याय आरंभ हो, इसके लिए मैंने राज्यसभा में यह मुद्दा उठाया कि जो जवान व अधिकारी जम्मू-कश्मीर में तीन वर्ष काम कर चुके हों, उन्हें उनकी पसंद के शहर में जमीन अथवा एक बढ़िया अपार्टमेंट 99 साल की लीज पर दिया जाए।
इसके साथ ही मैंने प्रधानमंत्री कार्यालय में केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह को ज्ञापन सौंपकर कहा कि जम्मू-कश्मीर के विकास के लिए इच्छुक जवानों और सैन्य अधिकारियों को राज्य में बसने तथा वहां उद्योग और व्यापार प्रारंभ करने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए। जो जवान और अधिकारी ऐसा करें, उन्हें 25 वर्ष तक कर मुक्ति का विशेष उपहार देना चाहिए। गिलानी और श्रीनगर बार एसोसिएशन अगर इस पहल का विरोध कर रहे हैं, तो समझ लीजिए यह देशहित में है और इससे जम्मू-कश्मीर का भला ही होगा। जवानों के जम्मू-कश्मीर में बसने और उद्योग लगाने से सुरक्षा का ही वातावरण बनेगा, जिससे शेष देश में भी अच्छा संदेश जाएगा। लिहाजा इसमें देरी का औचित्य नहीं।
-लेखक भाजपा के राज्यसभा सदस्य हैं