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सब माया का चक्कर है

Mon, 21 Oct 2013 06:43 PM IST
श्याम सिंह चंदेल
श्याम सिंह चंदेल Updated Mon, 21 Oct 2013 06:43 PM IST
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For personal interest

ब्रेकिंग न्यूज- साधु ने सपना देखा और शुरू हो गई खजाने की खोज! कहां- जानने के लिए मिलते हैं, ब्रेक के बाद। हर चैनल पर कुछ ऐसे ही खबरें ‘ब्रेक’ हो रही हैं! डौंडिया खेड़ा में हो रही खजाने की तलाश में नेता से लेकर अफसर तक लगे हैं। मजदूर कच्छप गति से खुदाई कर दर्शकों की उत्तेजना बढ़ा रहे हैं. पर खजाना गर्भ में है या नहीं, इसका पता नहीं चल सका है।

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न सूत न कपास, जुलाहों में लट्ठमलट्ठा कुछ ऐसे ही हालात अभी दिख रहे हैं। खजाना मिला नहीं है, पर उसे उठाकर ले जाने के लिए हेलीकॉप्टर या ट्रक की व्यवस्था की जा रही है। प्रदेश सरकार के माननीय नेता फरमा रहे हैं कि सारा माल तो प्रदेश सरकार का होगा। केंद्र सरकार के नुमाइंदे कह रहे हैं, माल पर हमारा जन्मसिद्ध अधिकार है। धन वर्षा हुई नहीं है और राजा के परिजन भी किले की जमीन पर खुद को बसाने की गुहार लगाने लगे हैं।
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चैनलों पर खजाने की खबर से टीआरपी बढ़ रही है। कुछ चैनल खबर दिखा रहे हैं, तो कुछ खबरों में से खबर बना रहे हैं। क्या करें अपना-अपना धंधा है। सभी टीवी रिपोर्टरों की मुसीबत है, खजाना मिल नहीं रहा और बॉस नए खुलासे का इंतजार कर रहा है। संत के मुरीदों का विश्वास है-खजाना मिलेगा और सरकारी सर्वे वाले कह रहे हैं, कोई भरोसा नहीं। लेकिन उम्मीद का दामन छोड़ने को कोई तैयार नहीं है।
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साधु का एक स्वप्न तो अभी सपना ही है, पर उनके बताए दूसरे खजाने की खोज शुरू हो चुकी है। कई जगह ‘जुझारू’ लोग पुराने मंदिरों पर फावड़े चला रहे हैं। पुराने मकानों के साथ खंडहर वाली जगहों के दाम रातोंरात बढ़ गए हैं। खजाने की खोज का असर देश देख रहा है और विपक्ष को सत्ता पर हमला बोलने का मौका मिल गया है। सत्ता वाले चुप हैं क्योंकि उन्हें खजाने का इंतजार है। खजाना नहीं मिला, तो वे चुप ही रहेंगे और मिल गया, तो विपक्ष की बोलती बंद हो जाएगी!


सच है, जनता तो देखने के लिए होती है और वह तमाशा देख रही है। भीड़ देखकर कुछ लोग अपनी दुकानदारी चमका रहे हैं। कोई रसगुल्ला बेच रहा है, तो कोई समोसा। खजाना मिले या नहीं, ये लोग मेहनत कर माल बना रहे हैं। कुछ डौंडिया खेड़ा में भ्रमण कर रहे हैं और कुछ भ्रमण करा रहे हैं। पहरेदार बहुत हैं, तो कई चोर भी अपनी जुगत भिड़ा रहे हैं। क्या करें खजाने की माया से सब बंधे हुए हैं। कोई खजाना देखना चाहता है, तो कोई खजाना पाना, सब माया का चक्कर है!

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