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काशीराज और कौशल नरेश के बीच हुआ अजब से विवाद, पढ़ें रोचक कथा

Fri, 08 May 2015 09:12 AM IST
पैट्रिक लेवी
पैट्रिक लेवी Updated Fri, 08 May 2015 09:12 AM IST
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Evil can not ever measurement of goodness

एक बार कौशलराज अपने वाहन और दल-बल सहित काशीराज के वाहन और दल-बल के सामने एक संकरे मार्ग पर आ गए। वह मार्ग इतना संकरा था कि दोनों वाहन एक साथ नहीं निकल सकते थे। कौशलराज के चालक ने काशीराज के चालक से चिल्लाकर कहा, रास्ते से हट जाओ। तुम्हें पता नहीं, यह कौशलराज की सवारी है। यह सुनकर काशीराज का चालक भी चिल्लाया, मैं नहीं, तुम रास्ते से हट जाओ। मैं काशीराज को ले जा रहा हूं।

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आगे बढ़ने के लिए इस विवाद को सुलझाना जरूरी था, इसलिए काशीराज के चालक ने कौशलराज की आयु पूछी। मगर वे दोनों एक ही वर्ष में जन्मे थे। चालकों ने उनकी जाति और परिवार के आधार पर विवाद का समाधान करना चाहा, किंतु वे सम्मान और प्रतिष्ठा में भी बराबर थे। इतना ही नहीं, दोनों अपनी-अपनी प्रजा के प्रिय भी थे।
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आखिरकार काशीराज के चालक ने कौशलराज के चालक से पूछा, तुम्हारे स्वामी में कौन-कौन से नैतिक गुण हैं? कौशलराज के चालक ने जवाब दिया, वह अपराधियों के साथ कठोरता से पेश आते हैं, और विनम्रों के साथ सज्जनता का व्यवहार करते हैं। वह भले लोगों के प्रति दयालु हैं और बुरे लोगों के प्रति निर्दयी।
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यह सुनकर काशीराज के चालक ने कहा, अगर उनकी बुराइयां उनकी अच्छाइयों का पैमाना है, तो उनकी बुराइयां कितनी बड़ी होंगी? हमारे महाराज तो क्रोध को दयालुता से, बुराई को अच्छाई से, लोभ को उदारता से जीतते हैं। वह झूठ का जवाब भी सिर्फ सत्य से देते हैं।

कौशलराज ने जब यह सुना, तो वह तत्काल अपने वाहन से उतर आए और अपने दल-बल को आज्ञा दी कि वे तुरंत काशीराज के लिए मार्ग छोड़ दें।

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