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हरियाणा में सब कुछ हरा नहीं है, आखिर गुम हो रहे चुनावी मुद्दे

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Everything is not green in Haryana
हरियाणा का संग्राम - फोटो : अमर उजाला

हरियाणा में विधानसभा चुनाव ऐसे समय हो रहे हैं, जब राम रहीम परिदृश्य से गायब हैं। सिरसा में 'बाबा' के डेरे के आगे सन्नाटा पसरा है। राम रहीम करीब दो साल से जेल में बंद हैं। उन्हें डेरे की दो युवतियों से बलात्कार करने के जुर्म में कुल मिलाकर बीस साल कैद की सजा पंचकुला की सीबीआई अदालत ने सुनाई थी। तब पंचकुला से लेकर सिरसा तक व्यापक हिंसा हुई थी। कहा जाता है कि राम रहीम का 90 में से दो दर्जन सीटों पर असर था। नेता चुनाव से पहले उनका आशीर्वाद लेने पहुंचते थे और चुनाव जीतने के बाद शुक्रिया अदा करने। सिरसा में लोग कहते हैं कि नेता 'बाबा' से मिलने का टाइम मांगा करते थे, लेकिन आज नेताओं के पास 'बाबा' से मिलने का वक्त नहीं है और न ही जरूरत है।


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वैसे सिरसा में 'चिट्टा' (नशा) इस बार एक बड़ा चुनावी मुददा है। बेरोजगारी इसकी मुख्य वजह बताई जा रही है। हरियाणा में बेरोजगारी की दर देश में सबसे ज्यादा 28 फीसद है, जबकि राष्ट्रीय औसत 8.5 फीसद ही है। सिरसा से सटा जिला है हिसार। हिसार शहर में एशिया का गाड़ियों के स्पेयर पार्ट का सबसे बड़ा बाजार है। यहां कुछ दुकानदारों से बात हुई, तो वे कहने लगे कि खट्टर सरकार के विकास की गाड़ी दौड़ी तो सही, लेकिन रफ्तार कम ही रही। यहां भी लोग कुल मिलाकर भाजपा की वापसी की बात करते नजर आते हैं। लेकिन गुरुग्राम और मानेसर में ऐसा नहीं है। सड़क के दोनों तरफ बड़ी-बड़ी भव्य इमारतों, शापिंग मॉल्स और मल्टीनेशनल कंपनियों के दफ्तर के बीच फुटपाथ पर ई-रिक्शा का इंतजार करते नवयुवकों से बात करो, तो सारा विकास धरा पर आ जाता है। नौजवानों का दर्द है कि आर्थिक मंदी की मार झेल रहे हैं और सात-आठ हजार की नौकरी के लिए धक्के खा रहे हैं। हरियाणा में प्रति व्यक्ति आय 2,26,644 रुपये सालाना है, जो देश की औसत आय 1,26,466 से एक लाख ज्यादा है। विकास दर 8.7 फीसद है, जो ठीक कही जा सकती है, लेकिन सड़क पर मिले नौजवान हाशिये पर ही हैं।  रोहतक से जींद जाते समय जुलाना के आगे किसान धरने पर बैठे नजर आते हैं। ये किसान भूमि के मुआवजे की मांग कर रहे हैं। वे कहने लगे कि सात साल पहले पास के गांव में सड़क के लिए जमीन का अधिग्रहण हुआ, तो 39 लाख रुपये प्रति एकड़ के हिसाब से मुआवाजा मिला। लेकिन भूमि अधिग्रहण कानून लागू होने के बाद आज उन्हें हरियाणा सरकार 28 लाख रुपये ही दे रही है। किसानों की मांग दो करोड़ रुपये प्रति एकड़ की है। इनका दुख है कि चुनाव के समय कांग्रेस भी उनकी तरफ ध्यान नहीं दे रही है। हरियाणा में प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के तहत 13 लाख 37 हजार किसान रजिस्टर्ड है। इन्हें साल में छह हजार रुपये तीन किस्तों में दिया जाना तय किया गया है। सरकारी आकंड़े बताते हैं कि 72 हजार 316 किसानों को पहली किस्त का ही इंतजार है।

हरियाणा की 90 विधानसभा सीटों में से आधी से ज्यादा ग्रामीण हैं। यहां राज्य की जीडीपी में कृषि का हिस्सा 17 फीसद है, लेकिन जींद में एक खेत में कपास की चुनाई करते हुए एक महिला मिली। नाम, भागमती। कहने लगी कि जिंदगी कपास जैसी नरम बिल्कुल नहीं है। केदारनाथजी की कविता याद आ गई। मैंने एक औरत के हाथों को छुआ, मुझे लगा दुनिया को इसी तरह नरम और मुलायम होना चाहिए। कविता से कितनी अलग है भागमती की जिंदगी। इस सबके बावजूद हरियाणा में भाजपा फिर से जीतती नजर आती है। लोगों का कहना है कि चौटाला परिवार टूट-फूट चुका है। कांग्रेस में कलह है। ऐसे में कोई वोट खराब नहीं करना चाहता, तो कोई कहता है कि विकल्प नहीं है।

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