फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Columns ›   Opinion ›   environmental awareness campaign people involved need in tree plantation and care of saplings to save earth

पर्यावरण: रोपे गए पौधों की देखभाल कौन करेगा, लोगों को जिम्मेदार होने की दरकार

Tue, 18 Jul 2023 07:36 AM IST
Suresh Bhai सुरेश भाई
Updated Tue, 18 Jul 2023 07:36 AM IST
विज्ञापन
सार
जितनी तेजी से वनों का व्यावसायिक दोहन हो रहा है, उस गति से वृक्षारोपण नहीं हो पाता है और लगाए गए पौधों की देखभाल नहीं हो पाती है।
loader
environmental awareness campaign people involved need in tree plantation and care of saplings to save earth
पौधारोपण - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हर साल करोड़ों पौधे रोपे जा रहे हैं, लेकिन यदि पूछा जाए कि पिछले साल रोपे गए पौधों में से कितने बचे हैं, तो अधिकांश के पास इसका उत्तर नहीं होगा। इसका कारण है कि रोपे गए पौधे या तो जंगल की आग में जल गए या उनकी रक्षा की जिम्मेदारी किसी को नहीं सौंपी गई। इसलिए कहा जा रहा है कि पिछले एक दशक में दुनिया में जितने पेड़ काटे गए हैं, उसकी भरपाई के लिए आने वाले 10 वर्षों तक हर वर्ष चार अरब पेड़ लगाने पड़ेंगे।



तथ्य यह है कि 2015 से 2020 के बीच भारत ने औसतन 6,68,400 हेक्टेयर जंगल खो दिए हैं। वर्ष 2018 के बाद पर्यावरण मंत्रालय ने विकास के नाम पर 88,903 हेक्टेयर वन भूमि का उपयोग बदला है। जंगल पर आने वाले ऐसे खतरों से वनवासियों को सर्वाधिक नुकसान होता है। हजारों वृक्ष प्रजातियां लुप्त हो जाती हैं और वन्य जीवों की संख्या निरंतर घटती रहती है। हिमालय के ग्लेशियर सूखने लग जाते हैं। लेकिन इन आंकड़ों को देखकर उतना निराश होने की जरूरत नहीं है। हमारे चारों ओर अब भी ऐसे सैकड़ों लोग मौजूद हैं, जो हर साल जिम्मेदारी पूर्वक वृक्षारोपण के साथ-साथ उनकी देखभाल भी करते हैं। जो पौधे सूख जाते हैं, उनकी जगह पर फिर से नए पौधे लगाते हैं। ऐसा ही उदाहरण गंगोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग पर प्रताप पोखरियाल ने प्रस्तुत किया है। उन्होंने वरुणावत पर्वत के तले मिश्रित वन लगाया है। वह हर साल जिले के अधिकारियों, कर्मचारियों,  शिक्षकों को साथ लेकर वृक्षारोपण करते हैं।


भागीरथी घाटी में विज्ञान के प्रवक्ता शंभू प्रसाद नौटियाल अपने स्कूल और गांव की महिलाओं, युवकों, पंचायत प्रतिनिधियों के साथ वृक्षारोपण कार्य में सक्रिय रहते हैं। नौटियाल बच्चों को पढ़ाने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण के लिए पौधारोपण में सक्रिय दिखाई देते हैं।

पौड़ी जनपद के वीरेंद्रदत गोदियाल वर्षों से 'समलौण आंदोलन' चला रहे हैं, जिसका अर्थ है कि जीवन की हर घटना की याद में वृक्षारोपण करना। बिहार के समस्तीपुर के राजेश कुमार सुमन तो ऑक्सीजन मैन के नाम से ही जाने जाते हैं। इन्होंने डेढ़ लाख से अधिक पेड़ लगा दिए हैं। उन्होंने लगभग 75 हजार किलोमीटर की यात्रा की है, जिसमें उनका संदेश था-सांसें हो रही कम/आओ पेड़ लगाएं हम। यह संदेश शादी के कार्ड पर भी लिखे जा रहे हैं।

केदारनाथ हाईवे पर अगस्त्यमुनि के शिक्षक सत्येंद्र सिंह भंडारी ने अपने ही स्कूल में 20 हजार पौधों की नर्सरी बनाई है और पिछले पांच वर्षों से प्रत्येक छात्र-छात्रा के नाम पर पौधे लगाते आ रहे हैं। नैनीताल के चंदन नयाल ने शिक्षक की नौकरी छोड़कर 28 वर्ष की उम्र में ही 40 हजार पौधे लगा दिए हैं। इन्हें ग्रीन मैन की उपाधि दी गई है। देहरादून की 'धाद' नामक संस्था बड़े पैमाने पर जंगल लगा रही है। टिहरी के कला शिक्षक जयप्रकाश कृथवाल ने अपने स्कूल के बच्चों के साथ पढ़ाई के दौरान वृहद वृक्षारोपण कार्य के अलावा मिड डे मील में पहाड़ी खानपान को शामिल करवाया है। टिहरी के बाल गंगा घाटी में सागर सुनार स्थानीय बच्चों को पर्यावरण संरक्षण के लिए जागरूक कर रहे हैं और पेड़ों पर राखी भी बांधते हैं। सामाजिक कार्यकर्ता द्वारिका प्रसाद सेमवाल जापान की बीज बम तकनीकी फैला रहे हैं। ऐसे अनेक सामाजिक संगठन और कार्यकर्ता हर राज्य में मौजूद है।

इसके अलावा विभिन्न राज्य सरकारें भी वृक्षारोपण अभियान चला रही हैं। इतने प्रयासों के बावजूद पर्यावरण मानक के अनुसार कम से कम 33 प्रतिशत जंगल होने चाहिए। लेकिन हमारे देश में इससे कम 22 प्रतिशत क्षेत्र में ही जंगल है।

इसलिए जरूरी है कि पर्यावरण संरक्षण अभियान में जुटे लोगों को साथ लेकर ऐसी जगहों पर वृक्षारोपण किया जाए, जहां हर साल रोपे जाने वाले पौधों की जिम्मेदारी लोग ले सकें। यदि रोपे गए पौधों की देखभाल पर ध्यान नहीं दिया जाएगा, तो लाखों की संख्या में वृक्षारोपण के बाद भी पर्यावरण की सेहत सुधारना चुनौती ही बनी रहेगी।
-लेखक पर्यावरणविद और रक्षा सूत्र आंदोलन के प्रणेता हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

Next Article

Followed