पर्यावरण या विकास : 29 किलोमीटर लंबी यह सड़क बनते ही मुंबई की शक्ल बदल जाएगी
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मुंबई की जिस समुद्रतटीय सड़क यानी कोस्टल रोड की लोगों को बहुत अधिक जरूरत है, उसके निर्माण में अब समय लगेगा, क्योंकि मुंबई उच्च न्यायालय ने इसका निर्माण रोकने का आदेश दिया है। न्यायालय ने इस सड़क का निर्माण रोकने का आदेश पर्यावरण के कुछ पहरेदारों की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया है। गौरतलब है कि इस सड़क के निर्माण पर अभी तक करोड़ों रुपये खर्च हो चुके हैं।
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मुंबई की जिस समुद्रतटीय सड़क यानी कोस्टल रोड की लोगों को बहुत अधिक जरूरत है, उसके निर्माण में अब समय लगेगा, क्योंकि मुंबई उच्च न्यायालय ने इसका निर्माण रोकने का आदेश दिया है। न्यायालय ने इस सड़क का निर्माण रोकने का आदेश पर्यावरण के कुछ पहरेदारों की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया है। गौरतलब है कि इस सड़क के निर्माण पर अभी तक करोड़ों रुपये खर्च हो चुके हैं।
भविष्य में जब भी कभी 29 किलोमीटर लंबी यह सड़क पूरी होगी, तब मुंबई की शक्ल बदल जाएगी। वर्तमान स्थिति यह है कि इस महानगर में सांताक्रूज हवाई अड्डे से दक्षिण मुंबई आने के लिए सिर्फ एक ही सड़क है, जिस पर इतना जाम लगता है कि अनेक विदेशी निवेशक शहर में आने का प्रयास ही नहीं करते और हवाई अड्डे के आसपास किसी होटल से ही अपना काम करके वापस लौट जाते हैं। दशकों से विचार-विमर्श होने के बाद पिछले वर्ष ही इस सड़क के निर्माण की शुरुआत हुई। तब इस सड़क के निर्माण की लागत 14,000 करोड़ रुपये आंकी गई थी। लेकिन इसका निर्माण रोक दिए जाने के कारण संभव है कि अब इसकी लागत दोगुना हो जाए।
अपने देश के शहर और महानगर दुनिया भर में सबसे बेहाल माने जाते हैं, और इसका मुख्य कारण यही है कि विकास की हर योजना में ऐसे लोग रुकावट पैदा करते हैं, जो अपने आपको पर्यावरण के ठेकेदार मानते हैं, जबकि वास्तव में वे विकास के दुश्मन हैं। वे अड़ंगा भी तब जाकर लगाते हैं, जब निर्माण कार्य की किसी योजना की शुरुआत हो चुकी होती है। इससे निर्माण कार्य प्रभावित होता है।
मुंबईवासी होने के नाते मैं कह सकती हूं कि यहां जीना वास्तव में बहुत मुश्किल है। बरसात के मौसम मैं तो यहां रहना इतना कठिन हो जाता है कि हर दूसरे-तीसरे दिन जब बारिश ज्यादा होने लगती है, तब प्रशासन से सूचना मिलती है कि घर से बाहर सिर्फ उन लोगों को निकलना चाहिए, जिनको जरूरी काम हो। बरसात के दिनों में यहां स्कूल बंद हो जाते हैं और कई रिहायशी इलाके ऐसे हैं, जहां सड़कें पूरी तरह डूब जाती हैं। ऐसे हाल में क्या उन लोगों को दंडित नहीं करना चाहिए, जिनकी याचिकाओं के कारण इस महानगर का विकास बार-बार रोका गया है?
वैसे भी यहां नियम-कानून इतने अजीब हैं कि कानून के तहत समुद्र तटीय क्षेत्रों में निर्माण पर प्रतिबंध लगा हुआ है। जिस राजनेता ने यह कानून बनाया था, उसने शायद इस बात पर ध्यान ही नहीं दिया होगा कि न्यूयॉर्क जैसे महानगर में इस किस्म का प्रतिबंध अगर लगा होता, तो शायद उस महानगर का आधा हिस्सा भी न बन पाता। ऐसे में इस तरह के कानूनों को हटाने की बात सोचने का समय अब आ गया है। इस कानून के कारण मुंबई की आबादी का एक बड़ा हिस्सा झुग्गी-बस्तियों में रहने के लिए मजबूर हैं, क्योंकि वे बस्तियां बन ही नहीं पाई हैं, जहां किराये पर रहने के लिए मध्यवर्ग के लिए आवास हों।