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जी, बिजली फिर आ गई है
सहीराम
Updated Tue, 24 Jun 2014 11:22 AM IST
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जी, बिजली फिर आ गई है। वैसे नहीं आई है, जैसे हम और आप चाहते हैं। निरंतर, अबाधित। वह बल्ब जलाने या पंखा चलाने नहीं आई है। वह तो राजनीतिक मुद्दे की तरह आई है। बिजली जब तक आती रहती है, तब तक वह चर्चा में नहीं आती। वह तो सामान्य, आम बात हो जाती है। जब इधर आम लोग ही चर्चा में नहीं, तो आम चीजें चर्चा में कैसे आ सकती हैं। कभी कांग्रेस का स्लोगन था आम आदमी, हालांकि इस बार नहीं था।
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फिर आम आदमी पार्टी खूब चर्चा में रही। पर यह आम का सीजन है, हालांकि वह भी आम कहां है, मैंगो हो गया है। पर यह आम आदमी का सीजन नहीं है। यह तो खास का जमाना है। इस जमाने में बिजली भी खास हो गई है।
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अगर वह आती भी है, तो बस झलक दिखाकर चली जाती है। अब कोई झलक दिखला जा टाइप का टीवी शो तो पॉपुलर हो सकता है, पर बिजली की झलक पॉपुलरिटी नहीं पा सकती। हालांकि जब वह हमेशा रहती है, तब भी कहां पॉपुलर होती है? तब उसे हक की तरह मान लिया जाता है कि यह तो हमें मिलनी ही है। हमेशा रहनेवाली चीजों को देख-देखकर हम बोर हो जाते हैं। फिर चाहे वह सरकार हो या बिजली। पर जब वह नहीं रहती, तो खास हो जाती है।
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जैसे इधर बिजली नहीं है और सरकार के खिलाफ धरने-प्रदर्शन होने लगे हैं। बड़ी समस्या है नेताओं के सामने। बिजली हमेशा रहे, तो भी सरकार अनपॉपुलर, न रहे, तो भी अनपॉपुलर। तो जी, इधर बिजली फिर आई है, चर्चित राजनीतिक मुद्दे की तरह। जिनका दावा है कि वे हमेशा बिजली दे रहे थे, वे अब उन पर आरोप लगा रहे हैं, जिन्होंने बिजली का आंदोलन चलाकर चुनाव जीता था। बिजली चुनाव से पहले भी मुद्दा थी। इसलिए कि वह महंगी थी। बिजली आंदोलन आप का भी था। बिजली आंदोलन भाजपा का भी था। पर अब कांग्रेस का है। इस मायने में चुनाव के बाद भी बिजली मुद्दा है। पर अब इसलिए है कि बिजली क्यों नहीं है। तुनकमिजाज बिजली भी होती है। इतनी कि एक आंधी से उखड़ जाए, फिर हफ्तों तक न आए।