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हलचल: दुनिया की सबसे भयावह मौसमी करवट है अल नीनो, अतीत से आज तक...
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विस्तार
2022 के अंत में दुनिया के मौसम विभागों की सूचना से सुदूर दक्षिण अमेरिका में पेरु से ऑस्ट्रेलिया तक सनसनी दौड़ गई। एलान हुआ था कि उत्तरी गोलार्ध के मौसम और पर्यावरण में बना एक इतिहास खत्म होने जा रहा है। 2022 की सर्दिंयां ला नीना की आखिरी सर्दियां थीं। ला नीना यानी कि ठंडी हवाओं और गिरते समुद्री तापमान को लाने वाला मौसमी बदलाव, जो सर्दियों में सक्रिय होता है।
इतिहास यूं बदला कि शताब्दी में पहली बार ऐसा हुआ था जब लगातार तीन साल दुनिया ने ला नीना की मेजबानी की। यानी समुद्री मौसम ठंडा रहा। मगर इसका मतलब यह भी था कि ला निना गया, अब आ रहा है अल नीनो।
पसीना आ गया दुनिया को यह खबर सुनकर। अल नीनो मानसून को निगल कर सूखा बरसा देता है। भारत को अपने पिछले सूखे डराने लगे। ऑस्ट्रेलिया को फरवरी, 1983 का तीसरा बुधवार याद आया। यह एश वेडनसडे था, जब अल नीनो से उपजी गर्मी से विक्टोरिया के जंगल दहक उठे थे। इसी तरह तो बीते दिनों अमेरिका के माउ द्वीप के जंगल जल उठे। इसी जून में कनाडा के जंगलों में लगी आग का धुआं अमेरिका के न्यूयाॅर्क पर छा गया और उड़ानें रोकनी पड़ीं।
अल नीनो आया, तो दुनिया के एक हिस्से को भारी बरसात तो दूसरे को सूखा और गर्मी डराने लगे। पर्यावरण और मौसमों के इतिहास में अल नीनो जैसा कोई नहीं। यह मानव इतिहास में सभ्यताओं को समाप्त करने का माध्यम बन चुका है। आइए बैठते हैं, टाइम मशीन में, और चलते हैं स्पेन होते हुए लैटिन अमेरिका। सन् 1510 हमारा पहला पड़ाव है।
वास्को नुनेज डी बाल्बोआ को इतिहास शायद कभी माफ नहीं करेगा। हुआ यूं कि स्पेन के गांव में पैदा हुआ बाल्बोआ समुद्र के रास्ते मोती का कारोबार करने हैती पहुंच गया। मोती तो न मिले, लेकिन कर्ज के कारण हैती से भागते हुए बाल्बोआ को यह पता चल गया कि पनामा के उस पार प्रशांत महासागर के किनारे कुछ ऐसे बाशिंदे हैं, जिनके पास अकूत सोना है। यह खबर इंका सभ्यता के बारे में थी। उस वक्त स्पेनी हमलावर सोने की खोज में लैटिन अमेरिका में कहर बरपा रहे थे।
सोने के लालच में बाल्बोआ 1513 में पनामा के इस्थुमस को पार करते हुए प्रशांत महासागर पहुंच गया। बाल्बोआ पहला स्पेनी हमलावर था, जिसने प्रशांत महासागर और उसके रास्ते की खोज की थी। लैटिन अमेरिका में स्पेनी बर्बरता की शुरुआत बाल्बोआ के साथ होती है। इस क्रूर हमलावर ने लोगों को गुलाम बनाया। बोल्बोआ ने डैरियन शहर स्थापित किया और पनामा को स्पेन का गढ़ बनाया।
प्रशांत महासागर के रास्ते की खोज को यूरोप के नौसैनिक इतिहास में बड़ी उपलब्धि बताया जाता है। मशहूर कवि जॉन कीट्स नुनेज ने बाल्बोओ के अभियान पर कविता भी लिखी थी। कहते हैं बाल्बोआ और हरमन कोर्टेस के बीच गफलत थी। हमरन कोर्टेस स्पेन का बेहद निर्मम सेनानायक था, जिसने मेक्सिकाे में तेनोचिटिटलान पर कब्जा कर भव्य एजटेक सभ्यता का विनाश किया था।
हम टाइम मशीन में बैठकर चलते हैं पनामा, यहां हमें मिलेगा बोल्बोआ का उत्तराधिकारी, जिसने अल नीनो की मदद से इंका सभ्यता को दुनिया के नक्शे से मिटा दिया। बोल्बोआ जिस जहाजी अभियान से पनामा पहुंचा था, उस जहाज का कप्तान था फ्रांसिस्को पिजैरो। इसी ने स्पेनी सेनानायक पेड्रियास के आदेश पर बोल्बोआ को गिरफ्तार किया था। 1519 में बोल्बोला की गर्दन काट दी गई। बोल्बोआ के रुखसत होते ही पिजैरो ने इंका के सोने की लूट का अभियान शुरू कर दिया। पिजैरो आज कोलंबिया और इक्वाडोर तक पहुंच गया, मगर दक्षिण से आती तेज हवाओं और उत्तर की तरफ बहती समुद्री धाराओं ने उसका रास्ता रोक लिया।
पिजैरो की मंजिल थी आज का पेरु, जहां इंका सभ्यता फल-फूल रही थी। इधर पनामा का नया स्पेनी गवर्नर पिजैरो के अभियानों से नाराज था। कहते हैं फ्रांसिस पिजैरो ने समुद्र तट पर एक रेखा खींची और अपने लोगों से कहा कि जो भरपूर सोना-चांदी चाहते हैं, वे लकीर के इस तरफ आ जाएं। 13 स्पेनी कप्तान और सेना नायक पिजैरो के साथ हो लिए। इनमें उसका भाई हर्नांडो डे ल्यूक भी था।
अब तक मौसम बदल गया था।
अल नीनो के इतिहास के लेखक सीज़र कैवियाडस लिखते हैं कि 1531 से 1533 पर्यावरण में अल नीनो सक्रिय हुआ। पिजैरो के जहाजों को उत्तरी हवा की मदद मिल गई और वह पेरु पहुंच गया। पिजैरो ने एक नए देश की खोज की थी, परंतु अन नीनो की हवाएं इंका सभ्यता का विनाश उसके तट पर ले आई थीं।
पिजैरो ने उत्तर पेरु में कैखामार्का के करीब मोर्चा बांधा। यह भव्य शहर इंका सभ्यता का केंद्र था। अथाहुल्पा इंकाओं का सम्राट था। इंका की समृद्धि देख स्पेनी हतप्रभ थे। पिजैरो ने अपने भाई हर्नांड को अथाहुल्पा से मिलने भेजा।
इंका सम्राट स्पेनियों के इरादे नहीं समझ पाया। कुछ दिन बाद अथाहुल्पा और पिजैरो की मुलाकात तय हुई। कैखामार्क के चौक पर सम्राट अथाहुल्पा 3,000 सिपाहियों के साथ आया। उनके पास हथियार नहीं थे। जबकि स्पेनी हमले को तैयार थे। पिजैरो के पादरी ने इंका सम्राट से स्पेन की गुलामी स्वीकार करने को कहा। इंका सम्राट इसे क्यों मानते? बस स्पेनियों ने हमला बोल दिया। तकरीबन ऐसा ही हरमन कोर्टेस ने एजटेक सम्राट मांतेजुमा के साथ किया था।
इंका सम्राट अथाहुल्पा को कैद कर 29 अगस्त, 1953 को उसकी हत्या कर दी गई। पिजैरो की फौज इंका की राजधानी कुजो पर कब्जे के लिए बढ़ गई। कुछ महीनों में इंका सभ्यता का अस्तित्व मिट गया। स्पेनियों को अकूत सोना-चांदी मिला। चांदी की खदानें अलग से।
अल नीनो की हवाओं की मदद से इंका सभ्यता मिटा दी गई। फ्रांसिस्को पिजैरो ने नया शहर बसाया, जो आज का लीमा है, यानी पेरु की राजधानी। इतिहास बताता है कि अल नीनो दुनिया की सबसे भयावह मौसमी करवट है। पेरु के मछुआरे इसे सदियों से जानते थे। स्पेनियों ने इसे अल नीनो कहा। यानी छोटा बच्चा। यह मौसमी परिवर्तन दिसंबर में क्रिसमस के आसपास होता है। कहते हैं ‘छोटा बच्चा’ का इशारा जीसस क्राइस्ट के बाल अवतार की तरफ रहा होगा।
18वीं सदी तक भारी बरसात और सूखे के इतने तजुर्बे एकत्र हो चुके थे, जिससे अल नीनो एक विनाशक आपदा साबित हो गया। माइक डेविस ने अपनी किताब विक्टोरियन होलकॉस्ट में दर्ज किया है कि 19वीं सदी में तीन बडे़ अकाल अल नीनो की वजह से आए थे। अध्ययन बताते हैं कि 18वीं सदी के अंत में अल नीनो से यूरोप में फसलें तबाह हुईं थी। यही अकाल फ्रांस की क्रांति की वजह बना था।
ब्रिटिश दस्तावेजों में दर्ज है कि भारत में 19वीं सदी के तीन सबसे विनाशक अकाल इसी मौसमी कहर से निकले थे। ब्राजील, चीन और ऑस्ट्रेलिया में कई सूखे अल नीनो का अभिशाप रहे हैं। 20वीं सदी में 26 बार अल नीनो आया। बीते 130 साल में भारत के 60 फीसदी सूखे या अकाल की वजह अल नीनो रहा है। 2009 और 2014 का सूखा सबसे ताजा है। आज कनाडा के जंगल दहक रहे हैं। जापान से चीन तक बाढ़ का कहर है। पहाड़ फट रहे हैं। भारत के एक हिस्से में बाढ़ और एक में सूखा। इतिहास फिर बन रहा है।