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सरकार की तरह होता है ईगो
आसिम अनमोल
Updated Mon, 01 Apr 2013 10:05 PM IST
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दरवाजा खोलो, मैं ईगो हूं। अरे आप मेरे द्वार पर? मैंने आश्चर्य से दरवाजा खोलते हुए कहा, विश्वास ही नहीं हो रहा। आइए, आइए... ईगो ने अपनी ईगो दिखाते हुए कहा, मूड तो नहीं हो रहा था, बस यों ही चला आया। चलिए, आप आ ही गए, यह मेरे लिए सौभाग्य की बात है।
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चाय बनवाता हूं आपके लिए। जैसे रेल किराया बढ़ाया गया है, मैंने वैसे ही ईगो का रेट बढ़ाते हुए कहा। नहीं मैं चाय-वाय नहीं लेता। शुगर का ख्याल रखता हूं। बादाम-पिश्ते की दुद्धी अभी पी के आ रहा हूं। फल वगैरह भी जस्ट खाए हैं। तुम्हारी चाय ड्यू रही, भविष्य में जरूर पिएंगे। ईगो ने टांग पर टांग रखते हुए और सिगरेट को लाइटर से जलाते हुए अपनी ईगो में और चार चांद लगाए।
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आप शर्मा जी की बेटी की शादी के रिसेप्शन पर तो जाएंगे न? मैंने पूछा। पहली बात, मेरे पास टाइम का झंझट बहुत है। दूसरी बात, शर्मा दरवाजे पर लड़के को कार्ड थमाकर चला गया। क्या मुझे नहीं दे सकता था? मैं खा तो नहीं जाता उसे। हां, थोड़ा बहुत ईगो का ख्याल रखते हुए उसे घूरकर अपना हाई प्रोफाइल दरवाजा जरूर बंद कर लेता। और इससे ज्यादा क्या करता?
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ईगो ने अपने सम्मान के विपरीत न जाने की अपनी जन्मजात बीमारी का खुलासा किया। यह बताइए कि आप इतना कम क्यों बोलते हैं? समाज यदा-कदा आपके बारे में टिप्पणी करता रहता है। मैंने सहानुभूति जताते हुए ईगो से जुड़ने की कोशिश की।
समाज को क्या पता मेरी मार्केट वैल्यू क्या है? उसकी तो कुछ है नहीं, इसलिए उसको अपनी परवाह क्यों हो भला। मुझे अपनी ईगो की टीआरपी बढ़ानी होती है। इसलिए इसमें खामोशी अख्तियार करना, गलतियां और संबंध बिगाड़ने जैसे बड़े-बड़े योगदान देने पड़ते हैं।
इन सबमें कितनी मेहनत और कौशल छिपा होता है, यह गैर ईगो समाज क्या जाने! ईगो ने अपनी उच्च कोटि की गुणवत्ता का बखान किया। मैंने ईगो को जज्बात की अहमियत बताते हुए कहा, लेकिन सुनने में यह भी आता है कि आप भावनात्मक पहलू पर ध्यान नहीं देते?
मेरा ईगो इतना लचीला और कमजोर नहीं है, जो भावनाओं का शिकार होता फिरे। ईगो ईगो होता है। बिल्कुल सरकार की मानिंद... जैसा मन होता है, वैसा करता है। उसका मुकाबला कोई नहीं कर सकता। यहां तक कि कई बार ऐसा होता आया है कि पति-पत्नी के टूटते रिश्तों में भी ईगो ने अपनी महती भूमिका निभाई है। जय हो ईगो जी।