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बाढ़ में धुली अर्थव्यवस्था : बारिश ने लोगों के घरों और जीवन को बदहाल बना दिया है

नारायण कृष्णमूर्ति Updated Tue, 13 Aug 2019 12:06 AM IST
बाढ़
बाढ़ - फोटो : a
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देश के पूर्वोत्तर इलाके में असम, पूर्व में बिहार, पश्चिम में राजस्थान, गुजरात और महाराष्ट्र के अलावा दक्षिण में केरल और कर्नाटक-ये सभी ऐसे राज्य हैं, जो हाल के वर्षों में बहुत कम समय में अत्यधिक बारिश की चपेट में आए हैं। नतीजतन गुजरात के वड़ोदरा, अहमदाबाद, संपूर्ण केरल और कर्नाटक के कूर्ग, बेलगावी शहरों में अभूतपूर्व बाढ़ आ गई।
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बेशक बचाव कार्यों से जानमाल की क्षति कम की गई है, लेकिन बारिश ने लोगों के घरों और जीवन को बदहाल बना दिया है। लोगों के घर तो क्षतिग्रस्त हुए ही हैं, आजीविका का भी नुकसान हुआ है। आम तौर पर बाढ़ का असर कृषि पर पड़ता है, लेकिन बाढ़ ने अर्थव्यवस्था के अन्य क्षेत्रों को भी प्रभावित किया है।

बारिश से फसलें, मवेशी, वन्यजीव, आधारभूत ढांचे, कृषि एवं अर्थव्यवस्था-सभी प्रभावित हुए हैं। अर्थव्यवस्था पर बाढ़ के प्रभाव के आंकड़े अलग-अलग हैं, लेकिन यदि विश्लेषण किया जाए, तो नुकसान का आंकड़ा आसानी से जीडीपी के 0.25 फीसदी तक पहुंच सकता है। बाढ़ के आर्थिक प्रभाव का पहला संकेत तब मिलता है, जब लोग कम खर्च करना शुरू करते हैं, क्योंकि उनकी आजीविका प्रभावित होती है, जिससे खर्च करने के लिए उनके पास कम पैसे होते हैं।

शहर-गांव एक समान-प्रकृति कोई भेदभाव नहीं करती। मसलन, ज्यादातर लोग समझते हैं कि भारी बारिश का असर केवल ग्रामीण इलाकों में ही महसूस किया जाता है। ऐसा निश्चित रूप से होता है, लेकिन पिछले कुछ वर्षों से शहरों में बड़ा असर देखने को मिला है। व्यावसायिक राजधानी मुंबई ने 2006 के प्रलय के बाद से भारी बारिश का सामना किया है, जिससे शहर के डूबने की आशंका पैदा हो गई।
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