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क्या हुआ जब धरती के इंसान से प्रेम विवाह किया एक अप्सरा ने
ओशो
Updated Mon, 27 Apr 2015 12:12 PM IST
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उस समय मनुष्य के पास प्रकाश नहीं था, अग्नि नहीं थी। रात्रि तब कठोर थी। लोगों ने अंधकार को दूर करने के बहुत उपाय सोचे, पर कोई भी कारगर नहीं हुआ। किसी ने कहा मंत्र पढ़ो, तो मंत्र पढ़े गए, और किसी ने सुझाया कि प्रार्थना करो, तो कोरे आकाश की ओर हाथ उठाकर प्रार्थनाएं की गईं। पर अंधकार न गया।
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किसी युवा चिंतक ने कहा, अंधकार को टोकरियों में भरकर गड्ढ़ों में डाल दें। धीरे-धीरे अंधकार क्षीण होगा। यह बात बहुत युक्तिपूर्ण मालूम हुई और लोग रात-रात भर अंधेरे को टोकरियों में भर-भरकर गड्ढ़ों में डालते, पर जब देखते, तो पाते कि वहां तो कुछ भी नहीं है!
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ऐसा करते-करते लोग बहुत ऊब गए। लेकिन अंधकार को फेंकने ने एक प्रथा का रूप ले लिया था और हर व्यक्ति प्रति रात्रि कम से कम एक टोकरी अंधेरा तो जरूर ही फेंक आता था! फिर कभी ऐसा हुआ कि एक युवक किसी अप्सरा के प्रेम में पड़ गया और उसका विवाह उस अप्सरा से हुआ। पहली ही रात बहू से घर के बूढ़े-सयानों ने अंधेरे की एक टोकरी गड्ढ़े में फेंक आने को कहा।
वह अप्सरा सुनकर हंसने लगी। उसने किसी सफेद पदार्थ की बत्ती बनाई, एक मिट्टी के कटोरे में घी रखा और फिर किन्हीं दो पत्थरों को टकराया। लोग चकित देखते रहे-आग पैदा हो गई थी, और अंधेरा दूर हो गया था!
उस दिन से फिर लोगों ने अंधेरा फेंकना छोड़ दिया, क्योंकि वे दीया जलाना सीख गए थे। लेकिन जीवन के संबंध में हममें से अधिक लोग अब भी दीया जलाना नहीं जानते हैं। और, अंधकार से लड़ने में ही उस अवसर को गंवा देते हैं, जो कि अलौकिक प्रकाश में परिणत हो सकता है।
प्रभु को पाने की आकांक्षा से भरो, तो पाप अपने से छूट जाते हैं। और, जो लोग पापों से ही हमेशा लड़ते रहते हैं, तो वे उनमें ही और गहरे धंसते जाते हैं।