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जयललिता को कम मत आंकिए
आर राजगोपालन
Updated Thu, 26 Dec 2013 08:32 AM IST
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पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव की समाप्ति के बाद देश 16वीं लोकसभा की ओर कदम बढ़ा चुका है। अगला साल चुनावी वर्ष होगा और उम्मीद है कि पहली छमाही में ही केंद्र में नई सरकार का गठन हो जाएगा। लेकिन चुनावों के इस मौसम में कई सवाल हवा में तैर रहे हैं, जिनके जवाब तलाशने जरूरी हैं। मसलन, देश की दो प्रमुख पार्टियां भाजपा और कांग्रेस आखिर तमिलनाडु में इतनी कमजोर क्यों हैं, और क्या जयललिता प्रधानमंत्री पद की दावेदारी पेश करेंगी?
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पिछले दिनों अन्नाद्रमुक ने प्रस्ताव पास कर कहा कि अगर पार्टी लोकसभा में 30 सीटें जीतती हैं, तो जयललिता दिल्ली में बड़ी भूमिका निभाएंगी। तमिलनाडु की राजनीति बड़ी निराली है। वह देश का ऐसा राज्य है, जहां राष्ट्रीयता के साथ हिंदू भावना भी मजबूती से जुड़ी हुई है। ऐसे में, अन्नाद्रमुक और द्रमुक, दोनों पार्टियों ने तय किया है कि वे भाजपा और कांग्रेस के साथ कोई गठजोड़ नहीं करेंगी।
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वैसे तमिलनाडु में राष्ट्रीय पार्टियों की कोई भूमिका नहीं है। लेकिन इस बार दिलचस्प यह है कि तमिलनाडु के कई सुदूर जिलों में नरेंद्र मोदी बड़े हीरो बनकर उभरे हैं। सर्वेक्षण कहते हैं कि वहां मोदी के प्रशंसकों की संख्या 10 से 12 प्रतिशत तक है, लेकिन वे भाजपा के समर्थक नहीं हैं। तमिलनाडु की राजनीति को करीब से देखने के कारण मैं कह सकता हूं कि चूंकि हिंदू धर्म और विश्वास की नींव तमिलनाडु में गहरी है, इसलिए मोदी वहां काफी वोट बटोर सकते हैं।
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बहरहाल, तमिलनाडु की प्रमुख राजनीतिक पार्टियां 2014 के लोकसभा चुनाव को लेकर काफी सतर्क हैं। न सिर्फ तमिलनाडु के नजरिये से, बल्कि 7 रेसकोर्स रोड (प्रधानमंत्री निवास) की सोच के साथ भी विचार-विमर्श हो रहा है। इसके साथ ही द्रमुक और अन्नाद्रमुक, दोनों पार्टियों की बैठकों में यह सवाल बना हुआ है कि क्या लोकसभा चुनाव में भाजपा 200 का आंकड़ा पार करेगी या कांग्रेस 100 के अंदर सिमट जाएगी।
इन सबके बीच अन्नाद्रमुक की आम परिषद ने पिछले दिनों प्रस्ताव पास कर यह स्पष्ट किया है कि अम्मा ही प्रधानमंत्री पद की उनकी उम्मीदवार हैं। 256 सदस्यों वाली इस परिषद को संबोधित करते हुए उन्होंने कांग्रेस की बुरी तरह आलोचना की। उन्होंने कांग्रेस को विश्वासघात करने वाली पार्टी भी बताया।
दूसरी तरफ द्रमुक आम परिषद की भी चेन्नई में करुणानिधि की अध्यक्षता में बैठक हुई, जिसमें प्रस्ताव पारित कर 2 जी घोटाले को बेवजह तूल देने और द्रमुक कोटे के मंत्री ए राजा तथा करुणानिधि की बेटी कनिमोझी के खिलाफ सीबीआई की कार्रवाई को लेकर कांग्रेस की लानत-मलामत की गई। कहना अतिशयोक्ति नहीं है कि तमिलनाडु में कांग्रेस बिलकुल अलग-थलग और अस्पृश्य पार्टी बन गई है। पिछले पांच दशक से वह यहां की सत्ता से बाहर है।
जिन दिनों चेन्नई में ये बैठकें हो रही थीं, उस समय दिल्ली एक अलग परिस्थिति से दो-चार हो रहा था। केंद्रीय मंत्री जयराम रमेश ने शीत सत्र के अंतिम दिन राज्यसभा में एक माहौल बनाने की कोशिश की। उन्होंने कनिमोझी को भगवद्गीता के कुछ श्लोकों को पहले संस्कृत में, फिर उसका अंग्रेजी और तमिल अनुवाद पढ़कर सुनाया। प्रथम अध्याय का यह 37वां श्लोक 'मित्रदोहम' यानी 'दोस्त के साथ विश्वासघाती करने' से संबंधित था, जिसमें कहा गया है, 'हे कृष्ण, इन लोगों के दिलों में लालच और स्वार्थ ने घर बना लिया है। वे अपनों के साथ लड़कर और परिजनों का नाश करके जो पाप कर्म कर रहे हैं, उसे नहीं देख पा रहे। यह जानते हुए भी, कि यह गंभीर अपराध हमारे परिजनों का नाश करेगा, क्या हमें इस पापकर्म से बचना नहीं चाहिए?' दूसरे शब्दों में कहें, तो जयराम रमेश का यह मानना था कि द्रमुक ने कांग्रेस का हाथ झटककर एक विश्वासी मित्र के साथ घात किया है। कनिमोझी ने गंभीरता से इसे सुना और टिप्पणी की कि वह इसे अपने पिता को जरूर बताएंगी।
कांग्रेस का मानना है कि द्रमुक ने सोनिया और राहुल गांधी को धोखा दिया है। दूसरी तरफ द्रमुक का आक्रोश इस बात को लेकर है कि पिछले साल और इस वर्ष चेन्नई की कुल पांच यात्राओं में राहुल गांधी ने एक बार भी करुणानिधि से मुलाकात नहीं की। कांग्रेस के पक्ष में हमेशा चट्टान की तरह खड़े रहने वाले द्रमुक के इस 90 वर्षीय बुजुर्ग नेता का यह अपमान आखिर क्यों किया गया?
इधर जयललिता दस रुपये में अम्मा इडली और अम्मा सांभर जैसी अद्भुत योजनाओं के कारण तमिलनाडु के दक्षिणी जिलों में काफी लोकप्रिय हो चुकी हैं। दस रुपये में लंबी यात्रा की बसों और बस अड्डों पर अम्मा थानीर (अम्मा पानी) की बोतल देने की उनकी योजना भी ग्रामीण बस अड्डों पर उन्हें शोहरत दिला रही हैं। इसके अतिरिक्त उन्होंने अपने राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों का भी अंत कर दिया है, जैसे कि विजयकांत का गुट काफी कमजोर हो गया है।
लेकिन भ्रष्टाचार को लेकर इस बार सतर्क होने के बावजूद उनके लिए आगे की राह मुश्किल हो सकती है। देवगौड़ा सरकार के दौरान 1996 में जब पी चिदंबरम वित्त मंत्री थे, तब सीबीआई ने उन पर आय से अधिक धन का मुकदमा दर्ज किया था। उस मुकदमे का फैसला 2014 की शुरुआत में आएगा।
ऐसे में यह कहना गलत नहीं कि तमिलनाडु में राष्ट्रीय राजनीतिक पार्टियों के लिए कोई जगह नहीं है। कहा जा रहा है कि जयललिता के वास्तविक दोस्त नरेंद्र मोदी हैं। आंतरिक सर्वेक्षण के अनुसार, अन्नाद्रमुक 25 से 30 लोकसभा सीट जीत सकती है। वैसी स्थिति में जयललिता न सिर्फ प्रधानमंत्री पद की मजबूत दावेदार होंगी, बल्कि प्रधानमंत्री न बन पाने की स्थिति में नरेंद्र मोदी को मदद पहुंचा सकती हैं। यहां कांग्रेस की सबसे बड़ी पराजय दिख रही है। राज्य से शायद उसका पूरी तरह सफाया हो जाएगा।