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समाज: प्रौद्योगिकी से बदलता जीवन, गरीब और वंचितों को भी मुख्यधारा से जोड़ रही है डिजिटल क्रांति

Mon, 27 Mar 2023 06:36 AM IST
Ashwini Vaishnav अश्विनी वैष्णव
Updated Mon, 27 Mar 2023 06:36 AM IST
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सार
डिजिटल क्रांति आम नागरिकों के जीवन को सशक्त बना रही है। यह सबसे गरीब और वंचित वर्गों का जीवन बदल रही है।
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Digital India Technology changing lives digital revolution connecting poor with mainstream
Digital India - फोटो : Istock

विस्तार

कुछ साल पहले तक प्रौद्योगिकी सुलभ होना किसी के लिए बड़े सौभाग्य की बात मानी जाती थी और यह केवल शहरी अभिजात वर्ग तक ही सीमित थी। ग्रामीण क्षेत्रों के लोग तो इंटरनेट का खर्च उठाने में स्वयं को बिल्कुल असमर्थ पाते थे। वर्ष 2014 तक केवल 25 करोड़ भारतीय ही इंटरनेट का उपयोग किया करते थे। यह संख्या बढ़कर वर्ष 2022 में 84 करोड़ के आंकड़े को छू गई। पहले एक जीबी डाटा की कीमत करीब 300 रुपये होती थी, जो घटकर लगभग 13.5 रुपये प्रति जीबी रह गई है। इंटरनेट सस्ता हो जाने से लोग विभिन्न सेवाओं का लाभ बड़ी आसानी से उठाने लगे। प्रधानमंत्री मोदी द्वारा प्रौद्योगिकी को गरीबी के खिलाफ लड़ाई के एक अहम साधन में बदलने से लोगों को काफी लाभ हुआ है। डिजिटल प्रौद्योगिकियां हमारे जीवन का अभिन्न हिस्सा बन गई हैं। एआई, 5जी और क्वांटम प्रौद्योगिकी का चलन अब इतना ज्यादा बढ़ गया है कि वे अब मुख्यधारा में शामिल होती जा रही हैं।


 
भारत ने ऐसे सार्वजनिक डिजिटल प्लेटफॉर्म बनाने पर अपना ध्यान केंद्रित किया, जो सभी को उपलब्ध हैं एवं बड़े पैमाने पर सृजित किए गए हैं। कोविन की बदौलत भारत ने अब तक करीब 220 करोड़ खुराक दे दी है। आज ‘कोविन’ समस्त देशवासियों को डिजिटल प्रौद्योगिकी सुलभ कराने का एक अभूतपूर्व उदाहरण बन गया है। आज पूरे भारत में स्ट्रीट वेंडर्स, छोटी-छोटी दुकानों से लेकर बड़े-बड़े शोरूम तक में डिजिटल भुगतान के लिए क्यूआर कोड स्टिकर नजर आते हैं।


सार्वजनिक धन का उपयोग करके सरकार ने एक ऐसा प्लेटफॉर्म बनाया है, जिससे बैंक, बीमा कंपनियां, ई-कॉमर्स कंपनियां, एमएसएमई, स्टार्ट-अप्स और सबसे महत्वपूर्ण 120 करोड़ लोग जुड़ गए हैं। वर्ष 2016 में लॉन्च किया गया यूपीआई अब हर साल 15 खरब डॉलर मूल्य का लेन-देन करता है। प्रत्येक लेन-देन के लिए औसत निपटान समय दो सेकंड है। इससे पारदर्शिता और सहूलियत बढ़ी है। यही कारण है कि भारत का ‘यूपीआई’ अब डिजिटल भुगतान के लिए एक वैश्विक मानक बन गया है। लोगों के जीवन को आसान बनाने में प्रौद्योगिकी की भूमिका दिन-ब-दिन बढ़ती ही जा रही है।

‘फास्टैग’ से अब वाहन राजमार्गों पर बिना रुके फर्राटे भरते हैं। 5जी का शुभारंभ होने के साथ ही प्रौद्योगिकी ने ऊंची छलांग लगाई है और 481 जिलों में 5जी कवरेज वाली एक लाख से भी अधिक साइटों को स्थापित किया जा चुका है। भारत आगामी तीन वर्षों में 4जी और 5जी प्रौद्योगिकी का निर्यातक बनने की दिशा में भी निरंतर काम कर रहा है। अब भारत ‘ओसीईएन (ओपन क्रेडिट एनैबलमेंट नेटवर्क)’ विकसित कर रहा है, जो बैंकिंग प्रणाली को ‘नकदी प्रवाह-आधारित ऋण व्यवस्था’ में परिवर्तित करके देश भर में कर्जों की उपलब्धता काफी हद तक बढ़ा देगा। ‘ओसीईएन’ से लोगों को ऋण देने के लिए विभिन्न बैंकों के बीच प्रतिस्पर्धा बढ़ जाएगी, जिससे कर्ज की लागत कम हो जाएगी। मॉर्गन स्टेनली के अनुमान के अनुसार, इसकी बदौलत कर्ज-जीडीपी अनुपात मौजूदा 57 फीसदी से बढ़कर वर्ष 2031 तक 100 फीसदी हो जाएगा।

डिजिटल और प्रौद्योगिकी-आधारित क्रांति आम नागरिकों के जीवन को सशक्त और रूपांतरित कर रही है। यह सबसे गरीब और वंचित वर्गों को सशक्त बना रही है और देश को युवा एवं प्रतिभाशाली पीढ़ी की रचनात्मक सोच के जरिये कुछ विशेष सृजित करने की क्षमता प्रदान कर रही है। इसी मॉडल को अब विभिन्न क्षेत्रों में दोहराया जा रहा है, चाहे वह स्वास्थ्य क्षेत्र हो, शिक्षा क्षेत्र हो, लॉजिस्टिक्स हो, कृषि हो या रक्षा क्षेत्र। ऐसे प्लेटफॉर्म सृजित किए जा रहे हैं, जिन पर स्टार्ट-अप्स या किसी उद्यम का सक्रिय इको सिस्टम आगे चलकर सटीक समाधान विकसित कर सकता है।

वैश्विक अनिश्चितता के इस दौर में भारत अपने ‘अमृत काल’ में प्रवेश कर चुका है। इस दिशा में आगे बढ़ते हुए प्रधानमंत्री मोदी के दूरदर्शी, निर्णायक नेतृत्व में भारत की जी-20 अध्यक्षता पथप्रदर्शक साबित होगी, और इस दौरान सार्वजनिक डिजिटल अवसंरचना को पूरी दुनिया के साथ साझा किया जाएगा।
लेखक- केंद्रीय रेल, संचार और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री।

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