आपका शहर Close

एनजीटी से हिंदी की विदाई

उमेश चतुर्वेदी

Updated Wed, 30 Nov 2016 07:46 PM IST
Departure of Hindi from NGT

उमेश चतुर्वेदी

जनता की भाषा में जनता को न्याय मिले, न्याय पाने की प्रक्रिया में जरूरी बहस-मुबाहिसे जनता की ही भाषा में होने चाहिए। सच्चे जनतंत्र की यह बुनियादी शर्त होनी चाहिए। लेकिन लगता है कि आए दिन सरकारों को न्याय और जनतंत्र का पाठ पढ़ाने वाली न्यायपालिका खुद जनतंत्र का बुनियादी पाठ भूल गई है। ताजा मामला राष्ट्रीय हरित अधिकरण यानी नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल से जुड़ा है, जिसने अपनी कार्यवाही के दौरान हिंदी पर प्रतिबंध लगाते हुए, यह बात साफ कर दी कि जो वादी उसके समक्ष व्यक्तिगत रूप से पेश होते हैं, वे अपने दस्तावेज केवल अंग्रेजी में ही प्रस्तुत कर सकते हैं। जस्टिस यू डी साल्वे की अध्यक्षता वाली एनजीटी की पीठ ने ओजस्वी पार्टी की एक अपील पर यह व्यवस्था दी है, जिसे हिंदी में दायर किए जाने के चलते पहले अस्वीकार कर दिया गया था। जनतांत्रिक समाजों में कानून की किताबों में कानून के तीन स्रोत बताए गए हैं। पहला स्रोत है विधायिका, दूसरा स्रोत है परंपराएं और तीसरा अदालतों के फैसले। इन अर्थों में देखें, तो अदालतों पर समाज, समुदाय और वक्ती संदर्भों के मुताबिक फैसले देने का भी अधिकार है।
बेशक एनजीटी 2011 की नियमावली अंग्रेजी में सुनवाई का आधार देती है। अगर ऐसा है, भी तो अंग्रेजी की अनिवार्यता का विरोध किया ही जाना चाहिए, क्योंकि यह जनतंत्र की न्यायिक प्रक्रिया के बुनियादी सिद्धांत के खिलाफ है। वैसे एनजीटी के इस फैसले का मूल संविधान के अनुच्छेद 348 के खंड एक के भाग ख में भी ढूंढ़ा जा सकता है। जिसमें कहा गया है कि सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालयों की कामकाज की भाषा सिर्फ अंग्रेजी होगी। पता नहीं, यह समझ में नहीं आता कि जिन संविधान निर्माताओं ने 14 सितंबर 1949 को हिंदी को देश की राजभाषा के तौर पर स्वीकार किया, उन्होंने ही संविधान के अनुच्छेद 348 के खंड एक के भाग ख में उस विदेशी भाषा को उच्च न्यायपालिका के लिए जरूरी क्यों मान लिया, जिसके खिलाफ उन्होंने बड़ी लड़ाई थी। हो सकता है कि तब इंसाफ की मूर्तियों में भारतीय भाषाओं और हिंदी के ज्ञान की कमी संविधान निर्माताओं की मजबूरी की वजह रही हो। लेकिन वक्त के साथ इसमें बदलाव आ जाना चाहिए था।

वैसे केंद्रीय गृह मंत्रालय और कानून मंत्रालय चाहे, तो राज्यों की मांग पर इस व्यवस्था में बदलाव किया जा सकता है। इसी के तहत राजस्थान हाई कोर्ट, जोधपुर पहला उच्च न्यायालय बना, जहां कामकाज की भाषा के लिए अंग्रेजी के अलावा हिंदी को भी मान्यता दी गई। उसे हिंदी में कामकाज की अनुमति 14 फरवरी 1950 को मिली थी। इसी तरह उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद हाई कोर्ट और बिहार के पटना हाई कोर्ट में भी हिंदी में कामकाज के लिए अनुमति मांगी गई थी। जिन्हें क्रमश: 1970 और 1972 में अनुमति मिली। इसी तरह मध्य प्रदेश हाई कोर्ट, जबलपुर में भी हिंदी में कामकाज करने की अनुमति 1971 में मिली थी। पर इसके बाद जैसे इस पर रोक ही लग गई। 2010 में तमिलनाडु ने तमिल में, 2002 में छत्तीसगढ़ ने हिंदी में और 2012 में गुजरात ने गुजराती में काम करने की अनुमति मांगी। लेकिन केंद्रीय गृह मंत्रालय और कानून मंत्रालय ने इसे मानने से इन्कार कर दिया। इसी से पता चलता है कि भाषायी स्वाभिमान को लेकर केंद्र सरकार की सोच क्या रही। अब चूंकि एक ऐसे नेता के हाथ में केंद्र की कमान है, जो अपना पूरा संवाद हिंदी में ही करता है, एक ऐसी शख्श के हाथ गृह मंत्रालय का दायित्व है, जो हिंदी में ही पूरा कामकाज करता है, इसलिए बदलाव की उम्मीद की जानी चाहिए।
Comments

Browse By Tags

स्पॉटलाइट

सलमान ने एक और भाषा में किया 'स्वैग से स्वागत', मजेदार है यह नया वर्जन, देखें वीडियो

  • गुरुवार, 14 दिसंबर 2017
  • +

PHOTOS: शादी पर खर्चे थे 100 करोड़ सोचिए रिसेप्‍शन कैसा होगा, पूरा कार्ड देखकर लग जाएगा अंदाजा

  • गुरुवार, 14 दिसंबर 2017
  • +

अनुष्‍का की शादी में मेहमानों पर 'विराट' खर्च, दिया कीमती गिफ्ट, वेडिंग प्लानर ने खोले कई और राज

  • गुरुवार, 14 दिसंबर 2017
  • +

Bigg Boss 11: बिकिनी पहन प्रियांक ने की ऐसी हरकत, भड़के विकास ने नेशनल टीवी पर किया बेइज्जत

  • गुरुवार, 14 दिसंबर 2017
  • +

विदेश जाकर टूट गया था 'आवारा' राजकपूर का दिल, करने लगे थे भारत लौटने की जिद

  • गुरुवार, 14 दिसंबर 2017
  • +

Most Read

कसमे-वादे और बैंक डिपॉजिट

promise and Bank Deposit
  • गुरुवार, 14 दिसंबर 2017
  • +

राहुल के लिए पहाड़ जैसी चुनौतियां

Challenges like mountain for Rahul
  • रविवार, 10 दिसंबर 2017
  • +

तुष्टिकरण के विरुद्ध

Against apeasement
  • बुधवार, 13 दिसंबर 2017
  • +

कट्टरता के आगे समर्पण

 bowed down to radicalism
  • शुक्रवार, 8 दिसंबर 2017
  • +

क्या अब नेपाल में स्थिरता आएगी?

Will there be stability in Nepal now
  • मंगलवार, 12 दिसंबर 2017
  • +

आसान नहीं राहुल की राह

Not easy way for Rahul
  • सोमवार, 11 दिसंबर 2017
  • +
Top
  • Downloads

Follow Us

Read the latest and breaking Hindi news on amarujala.com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala.com to get all the latest Hindi news updates as they happen.

E-Paper
Your Story has been saved!